दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को सन फार्मा को उन देशों में सेमाग्लूटाइड वाली वजन घटाने की दवाओं के निर्माण और निर्यात की अनुमति दे दी, जहां ओजेम्पिक बनाने वाली डेनमार्क की कंपनी नोवो नॉर्डिस्क का पेटेंट नहीं है। मगर नोवो नॉर्डिस्क का सेकंडरी पेटेंट अगले साल मार्च में समाप्त होने तक सन फार्मा को भारत में अपनी सेमाग्लूटाइड आधारित दवाओं की बिक्री करने की अनुमति नहीं दी गई है। न्यायमूर्ति प्रीतम सिंह अरोड़ा ने सन फार्मा को दो सप्ताह के भीतर न्यायालय को इसकी पुष्टि करते हुए एक लिखित दस्तावेज देने का निर्देश दिया है।
न्यायालय ने कंपनी को निर्यात से संबंधित खातों का विवरण भी प्रस्तुत करने के लिए कहा है। अदालत अब मामले की सुनवाई 19 फरवरी को करेगी। हालांकि, इस बारे में पूछे जाने पर नोवो नॉर्डिस्क ने आदेश पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। सन फार्मा ने खबर प्रकाशित होने तक बिज़नेस स्टैंडर्ड द्वारा भेजे गए प्रश्नों का कोई जवाब नहीं दिया।
उल्लेखनीय है कि वजन घटाने वाली दवा ओजेम्पिक बनाने वाली कंपनी नोवो नॉर्डिस्क ने सन फार्मास्युटिकल्स को ओजेम्पिक में इस्तेमाल होने वाले सेमाग्लूटाइड या इससे बने किसी भी उत्पाद के निर्माण, वितरण या व्यापार पर रोक लगाने के लिए मंगलवार को दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। यह याचिका ऐसे समय में दायर की गई थी जब न्यायालय ने हाल ही में हैदराबाद की डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज (डीआरएल) को सेमाग्लूटाइड वाली जीएलपी-1 दवा के अपने संस्करण तैयार करने और निर्यात जारी रखने की अनुमति दी है।
जीएलपी-1 (ग्लूकागन-लाइक पेप्टाइड-1) दवाइयां या एगोनिस्ट दवाओं का एक वर्ग है जो टाइप 2 मधुमेह में रक्त शर्करा को नियंत्रित करती हैं और भूख को नियंत्रित करके, पाचन को धीमा करके और इंसुलिन के स्राव को बढ़ाकर महत्त्वपूर्ण रूप से वजन घटाने में मदद करती हैं। यह विवाद नोवो नॉर्डिस्क के सेमाग्लूटाइड के भारतीय पेटेंट पर केंद्रित है, जिसे वह टाइप 2 मधुमेह और वजन घटाने के लिए ओजेम्पिक और वीगोवी के नाम से वैश्विक स्तर पर बेचती है।