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भारत की मिड-मार्केट कंपनियों के लिए प्राइवेट लोन बन रहा फंडिंग का मुख्य विकल्प: रोहित गुलाटी

देश में ऋण के लिए बैंक हमेशा से मुख्य आधार रहे हैं। लेकिन ढांचे के हिसाब से बैंक हर जरूरत का समाधान नहीं हो सकते

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समी मोडक   
Last Updated- January 26, 2026 | 1:36 PM IST

यूटीआई अल्टरनेटिव्स के सीईओ रोहित गुलाटी का कहना है कि भारत की मिड-मार्केट कंपनियों के लिए निजी ऋण धीरे धीरे रकम जुटाने के मुख्य विकल्प के तौर पर उभर रहा है। समी मोडक को ईमेल इंटरव्यू में गुलाटी ने कहा कि इस इस परिसंपत्ति वर्ग में तेजी से वृद्धि हुई है, जिसे शुरू में भारत में फैमिली ऑफिस और एचएनआई से सहारा मिला। इसके बाद संस्थागत पूंजी से मदद मिली। बातचीत के मुख्य अंश:

पिछले कुछ वर्षों में भारत में प्राइवेट क्रेडिट यानी निजी ऋण तेजी से बढ़ा है। इस वृद्धि की वजह क्या रही है और क्या तेजी बनी रहेगी?

आठ साल पहले, जब हमने मिड-मार्केट परफॉर्मिंग क्रेडिट स्ट्रैटजी की अपनी पहली सीरीज शुरू की थी, तो संभावित निवेशकों के साथ हर बातचीत में काफी अनिश्चितता थी। वहां से आज यह बाजार भारत की मिड-मार्केट इकॉनमी के लिए फाइनैंसिंग मुख्य जरिया बन गया है। इस बदलाव वैश्विक संस्थागत पूंजी से नहीं, बल्कि ज्यादातर घरेलू फैमिली ऑफिस और अमीर निवेशकों से आया है। अब भारतीय और वैश्विक संस्थान भी इसे अपना रहे हैं। घरेलू और वैश्विक दोनों नजरिये से, भारत अभी भी निजी ऋण चक्र के शुरुआती दौर में है।

आज प्राइवेट क्रेडिट फंड किन कमियों को पूरा कर रहे हैं जिन्हें बैंक और पारंपरिक एनबीएफसी पूरा नहीं कर सकते?

देश में ऋण के लिए बैंक हमेशा से मुख्य आधार रहे हैं। लेकिन ढांचे के हिसाब से बैंक हर जरूरत का समाधान नहीं हो सकते। विकसित अर्थव्यवस्थाओं में, कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार ऋण बाजार की कमियों को पूरा करता है। भारत में, केंद्रीय बैंक और सरकार की कई कोशिशों के बावजूद कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार अभी भी छोटा है। यह सिर्फ सॉवरिन, बीएफएसआई और एएए दर्जे की बड़ी कंपनियों तक ही सीमित है। इसलिए प्राइवेट क्रेडिट फंड देश में बड़े कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार के विकास के लिए स्वाभाविक माध्यम हैं।

आपके दूसरे डेट फंड को क्रेडिट सख्ती से लेकर कोविड तक के उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ा है। किन बातों ने आपको इस दबाव और उतार-चढ़ाव का सामना करने में मदद की?

यूटीआई अल्टरनेटिव्स भारत में कुछ मिड-मार्केट-फोकस्ड निजी ऋण परिसंपत्ति प्रबंधकों में से एक है। इसका परिचालन ट्रैक रिकॉर्ड आठ साल से ज्यादा का है। इसके दो स्ट्रक्चर्ड डेट फंडों ने अपना लाइफ साइकल पूरा कर लिया है और निवेशकों को पूंजी वापस की है। हमारे दोनों फंडों को कई दबावों का सामना करना पड़ा। इनमें आईएलऐंडएफएस और कोविड जैसे दौर शामिल हैं। फिर भी पोर्टफोलियो स्तर पर दो अंक का आईआरआर हासिल किया।

आप स्ट्रक्चर्ड ऋण, विशेष परिस्थितियों और शुद्ध आय रणनीतियों के बीच कैसे निर्णय लेते हैं? क्या हाल में इस संयोजन में कोई बदलाव आया है?

यूटीआई अल्टरनेटिव्स में हमने एक मल्टी-स्ट्रैटजी अल्टरनेटिव्स प्लेटफॉर्म विकसित किया है जो हमें बाजार की विभिन्न स्थितियों में पूंजी लगाने और निवेशकों को रणनीतियों में निवेश की सुविधा प्रदान करता है। निजी ऋण में हमारी क्षमताएं सुव्यवस्थित ऋण तक हैं। यह हमारी प्रमुख रणनीति है। रियल एस्टेट में हम अंतिम चरण के परियोजना-विशिष्ट निवेश पर ध्यान केंद्रित करते हैं, ढांचागत इक्विटी में नुकसान से सुरक्षा के साथ-साथ इक्विटी में लाभ भी शामिल है। पूंजी को चक्र के साथ चलना चाहिए, न कि उसमें बाधक बनना चाहिए।

प्राइवेट क्रेडिट फंडों के बीच प्रतिस्पर्धा को देखते हुए क्या यील्ड पर दबाव है?

हालांकि प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। लेकिन बाजार इतना बड़ा है कि इसे संभाल सकता है। ज्यादातर फंडों ने अपने लिए खास जगह या फोकस एरिया बना लिए हैं और जो डील उस खास जगह में फिट होती हैं, उसमें प्रतिस्पर्धा कम है। यूटीआई में हमारे पास डील की कमी नहीं है और असल में अपने प्रमुख क्रेडिट फंडों की ताजा सीरीज में हमने एप्लीकेशन के समय ही 50 प्रतिशत कमिटमेंट के लिए कहा है।

आज निवेशक किन चीजों को प्राथमिकता दे रहे हैं – ऊंची यील्ड, पूंजी सुरक्षा या निकलने की संभावना?

सभी निवेशक श्रेणियों में प्राथमिकताएं एक जैसी हो गई हैं। पूंजी की सुरक्षा सबसे पहले आती है, उसके बाद यील्ड और कम उतार-चढ़ाव। निजी ऋण की खासियत यह है कि यह पोर्टफोलियो के उतार-चढ़ाव को कम करते हुए आकर्षक यील्ड देती है। निजी ऋण के अब लोकप्रिय होने का कारण शायद यह है कि घरेलू निवेशक काफी समझदार हो गए हैं। फैमिली ऑफिस और अमीर निवेशक अब सिर्फ हेडलाइन यील्ड पर ध्यान नहीं दे रहे हैं, उन्होंने डाइवर्सिफिकेशन को महत्त्व देना शुरू कर दिया है और वे नए परिसंपत्ति वर्ग की तलाश में हैं, जिसमें यील्ड को उतार-चढ़ाव के मुकाबले मापा जा सकता है। यह वैश्विक रुझानों को दिखाता है, जहां प्राइवेट क्रेडिट को ट्रेड के एक मौके के बजाय प्रमुख आवंटन के रूप में देखा जाता है।

First Published : January 26, 2026 | 1:36 PM IST