Indian Startup Ecosystem 2025: साल 2025 खत्म होने वाला है और भारत के स्टार्टअप तंत्र में आधिक्य के बजाय मजबूती के साफ संकेत दिख रहे हैं। न केवल स्टार्टअप बंद होने की संख्या में तेजी से गिरावट आई है, बल्कि नई कंपनियों के बनने की रफ्तार भी धीमी पड़ी है। इससे वैश्विक महामारी के बाद की तेजी के बाद सतर्कता और परिपक्वता की दिशा में बदलाव का पता चलता है।
बाजार पर नजर रखने वाले प्लेटफॉर्म ट्रैक्सन के आंकड़ों से पता चलता है कि साल 2025 में अब तक केवल 729 स्टार्टअप कंपनियां बंद हुईं। यह 5 साल में सबसे कम संख्या है और पिछले साल बंद हुई लगभग 3,900 स्टार्टअप की तुलना में 81 प्रतिशत की गिरावट है। साथ ही नई स्टार्टअप बनने के मामले में भी तेजी से कमी आई है, जिससे पूंजी की कमी, निवेशकों की कड़ी जांच-परख और संस्थापकों द्वारा नकदी निवेश का स्तर तेजी बढ़ाने के बजाय स्थायित्व को चुने जाने की बात जाहिर होती है।
उद्योग के विशेषज्ञों के अनुसार ये आंकड़े पारिस्थितिकी तंत्र की परिपक्वता दर्शाते हैं, जहां सस्थापक और निवेशक ज्यादा अनुशासित और सतर्क हो गए हैं।
प्रबधंन विशेषज्ञ शैलेश हरिभक्ति ने कहा कि वैश्विक महामारी के दौरान की तेजी में स्थापित कई स्टार्टअप कंपनियां तेजी से विकास और असीमित पूंजी की उम्मीद पर निर्मित की गई थीं। अलबत्ता रकम जुटाने में तंगी और बाजार में गिरावट के कारण कई स्टार्टअप कंपनियों को परिचालन बंद करना पड़ा।
हरिभक्ति ने कहा, ‘हम परिपक्व हो रही अर्थव्यवस्था हैं। संस्थापक तेजी से नाकामयाब होना और आगे बढ़ना सीख रहे हैं। ये आंकड़े हमें बताते हैं कि पूरे क्षेत्र में परिपक्वता आ रही है और लोग नहीं मान रहे हैं कि उन्हें नकदी फूंकने का अधिकार और अनुमति दी जाएगी, इसलिए वे ज्यादा सावधान हैं। इसे देखने का दूसरा तरीका यह है कि लोग अपने कारोबारी प्रारूप और समस्याओं को चुनने के मामले में ज्यादा सावधान हो गए हैं और यह भी बेहतर नतीजों का एक कारण है।’