कम हिस्सा बेचेगी रिलायंस रिटेल

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 14, 2022 | 11:02 PM IST

रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) की सहायक इकाई रिलायंस रिटेल वेंचर्स अपनी रिटेल होल्डिंग कंपनी में महज 10 से 15 फीसदी हिस्सेदारी की बिक्री कर सकती है। इससे प्राप्त रकम का इस्तेमाल फ्यूचर ग्रुप के खुदरा एवं थोक कारोबार के अधिग्रहण के अलावा अन्य सौदों के लिए वित्त पोषण में किया जाएगा। रकम जुटाने के अपने शुरुआती और मौजूदा प्रयासों के तहत रिलायंस रिटेल 7.28 फीसदी हिस्सेदारी निजी इक्विटी फंडों को बेचकर 32,197.50 करोड़ रुपये पहले ही जुटा चुकी है।
इस मामले से अवगत सूत्रों का कहना है कि 10 से 15 फीसदी हिस्सेदारी की बिक्री में रणनीतिक निवेशक शामिल नहीं होंगे बल्कि इसमें केवली पीई और सॉवरिन फंड ही शिरकत करेंगे। इन सूत्रों के अनुसार, कंपनी की रणनीति जियो प्लेटफॉम्र्स के लिए बड़े पैमाने पर रकम जुटाने की कवायद से बिल्कुल अलग है जहां उसने 32.97 फीसदी हिस्सेदारी 13 निवेशकों के समूह को 1,52,055 करोड़ रुपये में बेची थी।
उस बड़े विनिवेश का उद्देश्य रिलायंस इंडस्ट्रीज को अगले साल मार्च तक ऋण मुक्त बनाना था। आरआईएल 1,60,000 करोड़ रुपये के शुद्ध ऋण बोझ तले दबी थी।
सूत्रों का कहना है कि समूह को तत्काल नकदी की कोई जरूरत नहीं है और रिलायंस रिटेल में हिस्सेदारी बिक्री से कंपनी को बेंचमार्क मूल्यांकन तैयार करने में मदद मिलेगी। मौजूदा सौदों के आधार पर यह 4,28,500 करोड़ रुपये का रकम पूर्व मूल्यांकन है।
इस हिस्सेदारी बिक्री से कंपनी को अधिग्रहण सौदों के लिए रकम जुटाने में भी मदद मिलेगी। हाल ही में आरआईएल ने फ्यूचर समूह में विभिन्न कंपनियों को खरीदने का सौदा किया है जिसके लिए उसे करीब 24,713 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ेंगे।
सूत्रों ने यह भी बताया कि इस चरण में किसी रणनीतिक निवेशक के शामिल होने की संभावना नहीं है बल्कि इसमें अधिकतर पीई निवेशक ही शामिल होंगे।
रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्रवक्ता ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, ‘मीडिया द्वारा तमाम तरह के कयास लगाए जाने और रिलायंस इंडस्ट्रीज अथवा हमारे समूह की कंपनियों में पूंजी के लेनदेन से संबंधित गलत एवं पक्षपातपूर्ण लेख के मद्देनजर हम दोहराना चाहेंगे कि अफवाहों और मीडिया की अटकलों पर टिप्पणी करने की हमारी नीति नहीं है। हम ऐसे किसी लेनदेन की पुष्टि अथवा खंडन नहीं कर सकते जिस पर काम हो भी सकता है अथवा नहीं भी हो सकता है।’ बयान में यह भी कहा गया है कि कंपनी लगातार विभिन्न अवसरों का आकलन करती है और आवश्यक नियामकीय खुलासे करेगी।
कई विश्लेषकों का मानना है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज की तरफ से फ्यूचर समूह के खुदरा व थोक कारोबार के अधिग्रहण से आने वाले समय में आरआईएल को अपने खुदरा कारोबार के मूल्यांकन में इजाफा करने में मदद मिलेगी। इस संदर्भ में कंपनी 3 करोड़ छोटे खुदरा दुकानों (जिनमें करीब 60 लाख किराना दुकान शामिल) को अपने जियो मार्ट प्लेटफॉर्म के दायरे में लाकर संगठित क्षेत्र में शामिल कर रही है और इस तरह से उन्हें अपना साझेदार बना रही है। यह प्लेटफॉर्म एमेजॉन व फ्लिपकार्ट से दो-दो हाथ करने की शुरुआत कर रही है।
विशेषज्ञों ने कहा कि फ्यूचर समूह केखुदरा कारोबार के अधिग्रहण ने रिलायंस के दो से तीन साल बचा दिए, जो उसे खुद इतनी बड़ी शृंखला बनाने में लगते। इसी वजह से रिलायंस इस निवेश पर प्रीमियम का भुगतान करने को राजी हुई। अगर जियो मार्ट ई-कॉमर्स में उआगे बढ़ती है तो यह और मूल्यवान बन जाएगी।
फ्यूचर समूह का अधिग्रहण रिलायंस को आगे जाने में मदद करेगा। देश के आधुनिक खुदरा बाजार में 12 फीसदी राजस्व हिस्सेदारी के साथ फ्यूचर समूह का कारोबार रिलायंस को अपनी हिस्सेदारी 16 फीसदी पर ले जाने में मदद करेगा। ये आंकड़े टेक्नोपाक से मिले हैं।

First Published : October 6, 2020 | 11:29 PM IST