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मोबाइल फोन निर्माताओं ने अधिक सीमा शुल्क पर जताई चिंता

Last Updated- December 12, 2022 | 8:46 AM IST

बजट में चीनी आयात पर भारत की निर्भरता घटाने के लिए सीमा शुल्क वृद्घि की गई है। इसे लेकर उद्योग के दो प्रमुख क्षेत्रों से अलग अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। ये उद्योग हैं मोबाइल डिवाइस निर्माता और वाहन कलपुर्जा निर्माता। वैश्विक और भारतीय मोबाइल उपकरण निर्माताओं द्वारा इस प्रस्ताव का विरोध किया जा रहा है और वे इसके खिलाफ आवाज उठाने की तैयारी कर रहे हैं। उनका मानना है कि फोन निर्माण में इस्तेमाल कलपुर्जों पर सीमा शुल्क में वृद्घि आत्मनिर्भर भारत के खिलाफ है।
उनका यह भी कहना है कि इससे महज फोन की कीमत बढ़ जाएगी और देश को इस उद्योग के एक प्रमुख वैश्विक निर्माण केंद्र में तब्दील करने की सरकार की इच्छा प्रभावित होगी। वहीं वाहन कलपुर्जा निर्माता भी सीमा शुल्क वृद्घि को लेकर परेशान हैं।
सोमवार को बजट में उन कलपुर्जों पर 2.5 प्रतिशत का सीमा शुल्क लगाया गया जिनका इस्तेमाल प्रिंटेड सर्किट बोर्ड एसेंबली और कनेक्टर के साथ साथ अन्य मोबाइल डिवाइस के निर्माण में होता है। इसका कारणघरेलू वैल्यू वृद्घि पर जोर देना बताया गया। इससे पहले इन कलपुर्जों पर शुल्क लागू नहीं था।
इंडियन सेल्युलर ऐंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन के चेयरमैन पंकज मोहिंदू्र ने कहा कि इस शुल्क वृद्घि से घरेलू वैल्यू को बढ़ावा नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा, ‘2.5 प्रतिशत शुल्क का मामूली राजस्व प्राप्ति के अलावा कुछ फायदा नहीं है। उत्पादों का निर्माण देश में भी नहीं होता है, इसलिए यहशुल्क सिर्फ मोबाइल फोन की कीमत बढ़ाएगा जिससे एक घरेलू मोबाइल डिवाइस एक्सपोर्ट हब के तौर पर आत्मनिर्भर भारत और भारत, दोनों प्रभावित होंगे।’
देश से आयात करने वाली एक वैश्विक मोबाइल डिवाइस कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि उन्हें सरकार के इस निर्णय का तर्क समझ में नहीं आ रहा है। उन्होंने कहा, ‘इस तरह के कई उत्पादों का निर्माण चीन द्वारा किया जाता है, इसलिए शुल्क तभी उपयुक्त है जब आप भारत में संयंत्र लगाने के लिए उन्हें प्रोत्साहित करना चाहते हों। लेकिन देश की एफडीआई नीति चीन को ऐसा करने से रोक रही है। और मौजूदा समय में इस तरह के सेमी-कंडक्टर उत्पाद घरेलू कंपनियों द्वारा नहीं बनाए जाते हैं। इसमें अभी लंबा समय लगेगा।’
वैश्विक कंपनियों का भी कहना है कि यह बदलाव जापान, दक्षिण कोरिया और अमेरिका जैसे देशों के लिए चिंता पैदा करेगा, क्योंकि उन पर भारत सरकार द्वारा शुल्क वृद्घि का काफी असर पड़ता है।
मोबाइल डिवाइस निर्माताओं का कहना है कि जहां एक तरफ, सरकार ने निर्यात प्रोत्साहन के लिए उत्पादन संबंधित प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) पर जोर दिया है जिससे कि उत्पादन की लागत वियतनाम और चीन के अनुरूप बनाई जा सके। वहीं दूसरी तरफ, ऐसा लगता है कि सरकार ने मोबाइल डिवाइस पर जीएसटी 12 से बढ़ाकर 18 प्रतिशत करने और अब सीमा शुल्क लगाकर राजस्व वृद्घि पर ध्यान दिया है।
हालांकि कार पुर्जा निर्माता बजट से संतुष्ट हैं क्योंकि इसमें टफेंड ग्लास, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक कलपुर्जे, ब्रेक, पेडल, क्रैंक गियर और फ्रेम जैसे उत्पादों पर सीमा शुल्क 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत किया गया है।
ऑटोमोटिव कम्पोनेंट्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के महानिदेशक विनी मेहता ने कहा, ‘इन शुल्कों का एकमात्र मकसद इन उत्पादों के चीनी आयात पर हमारी निर्भरता घटाना है। इससे अधिक स्थानीयकरण और इन उत्पादों के घरेलू निर्माण को बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि जिनके लिए हम पहले से ही मजबूत क्षमता से संपन्न हैं।’ 2019-20 में भारत का वाहन कलपुर्जा आयात बिल 15.4 अरब डॉलर पर रहा, जबकि उसने 14.5 अरब डॉलर का निर्यात किया। आयात में चीन का योगदान 27 प्रतिशत है।

First Published - February 4, 2021 | 11:38 PM IST

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