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शीर्ष आईटी कंपनियों के मार्जिन को इस्तीफों का झटका

Last Updated- December 11, 2022 | 5:16 PM IST

वित्त वर्ष 2023 की पहली तिमाही में शीर्ष आईटी सेवा कंपनियों के नतीजों पर गौर करने से पता चलता है कि वे एट्रिशन (कर्मचारियों द्वारा कंपनी छोड़ने की दर) को नियंत्रित करने से अभी भी कोसों दूर हैं। प्रतिभाओं को बरकरार रखने की ऊंची लागत से न केवल मार्जिन को झटका लगा है बल्कि रुपये में गिरावट के कारण हुए फायदे में भी कमी आई है।
तिमाही के दौरान टीसीएस, इन्फोसिस, एचसीएल टेक्नोलॉजिज और विप्रो सहित लगभग सभी प्रमुख आईटी सेवा कंपनियों ने वृद्धि एवं संभावित सौदों के लिए दमदार आंकड़े दर्ज किए लेकिन मार्जिन के
मोर्चे पर कमजोर प्रदर्शन ने बाजार को अचंभित कर दिया।
उदाहरण के लिए इन्फोसिस को ही लेते हैं। कंपनी का मार्जिन वित्त वर्ष 2023 की पहली तिमाही में 20.1 फीसदी रहा जो 21 से 23 फीसदी के अनुमान से कम है। प्रबंधन ने कहा कि तिमाही के दौरान वेतन वृद्धि का प्रभाव 160 आधार अंकों का रहा जबकि बाजार ने इसे 75 से 100 आधार अंकों के दायरे में रहने का अनुमान जाहिर किया था।
इन्फोसिस के सीएफओ नीलांजन रॉय ने बताया कि वेतन वृद्धि का प्रभाव किस प्रकार 160 आधार अंक हो गया। उन्होंने कहा कि कम उपयोगिता स्तर से मार्जिन पर 40 आधार अंकों का प्रभाव पड़ा जबकि उपठेकेदारों का प्रभाव 30 आधार अंकों का रहा। दूसरी तिमाही में कंपनी को वेतन वृद्धि के एक अन्य चक्र का सामना करना है।
अन्य कंपनियों की स्थिति भी लगभग समान है। टीसीएस का मार्जिन पहली तिमाही में 23.1 फीसदी रहा। विश्लेषकों का मानना था कि कंपनी का मार्जिन 23 से 24 फीसदी के दायरे में होगा। वार्षिक वेतन वृद्धि के कारण मार्जिन को करीब 150 आधार अंकों का झटका लगा। कंपनी ने अपने कर्मचारियों को 5 से 8 फीसदी के दायरे में वेतन वृद्धि दी है। दमदार प्रदर्शन करने वालों को अधिक वेतन वृद्धि दी गई जबकि ऑनसाइट स्टाफ के वेतन में 4 से 5 फीसदी की वृद्धि हुई। आईसीआईसीआई डायरेक्ट रिसर्च ने एक रिपोर्ट कहा कि मार्जिन पर शेष प्रभाव यात्रा लागत और उप-ठेका लागत में वृद्धि का रहा।
टीसीएस के मुख्य वित्तीय अधिकारी समीर सेकसरिया ने कहा, ‘लागत प्रबंधन के लिहाज से यह एक चुनौतीपूर्ण तिमाही रही। पहली तिमाही के दौरान हमारा परिचालन मार्जिन 23.1 फीसदी रहा जो हमारी वार्षिक वेतन वृद्धि, प्रतिभाओं को बरकरार रखने की ऊंची लागत और धीरे-धीरे यात्रा खर्च के सामान्य होने के प्रभाव को दर्शाता है।’
विप्रो भी वित्त वर्ष 2023 की पहली तिमाही में मार्जिन पर 200 आधार अंकों के प्रभाव के साथ लगभग समान स्थिति से जूझ रही है। तिमाही के दौरान कंपनी का मार्जिन घटकर 15 फीसदी रहा गया। मार्जिन में गिरावट को मुख्य तौर पर उपयोगिता में कमी, अधिक उप-ठेका लागत और आंतरिक निवेश के कारण 130 आधार अंकों के प्रभाव से बल मिला। इसके अलावा अधिग्रहण लागत बढ़ने का प्रभाव 20 आधार अंकों का रहा।
अधिक भुगतान एवं कर्मचारियों को बरकरार रखने की अन्य नीतियों के कारण एट्रिशन में हर जगह बढ़ोतरी हुई जबकि विप्रो इससे बची रही। इन्फोसिस में एट्रिशन बढ़कर 28.4 फीसदी हो गई जो वित्त वर्ष 2022 की चौथी तिमाही में 27.7 फीसदी और पहली तिमाही में यह महज 13.9 फीसदी रही थी।
टीसीएस में एट्रिशन चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में बढ़कर 19.7 फीसदी हो गई जो वित्त वर्ष 2022 की चौथी तिमाही में 17.4 फीसदी रही थी। तिमाही के दौरान कंपनी के कर्मचारियों की संख्या में शुद्ध रूप से 14,136 की बढ़ोतरी हुई।
एचसीएल टेक्नोलॉजिज में एट्रिशन बढ़कर 23.8 फीसदी हो गई जो वित्त वर्ष 2022 की चौथी तिमाही में 11. 8 फीसदी रही थी।
 

First Published - July 27, 2022 | 1:22 AM IST

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