अरविंद मफतलाल समूह के वाइस-चेयरमैन और मफतलाल इंडस्ट्रीज के प्रबंध निदेशक प्रियव्रत मफतलाल ने अक्षरा श्रीवास्तव और निवेदिता मुखर्जी के साथ 121 साल पुराने ब्रांड को नए रूप में पेश करने, भू-राजनीतिक बाधाओं से निपटने, परिवार के स्वामित्व वाले बनाम पेशेवरों से चलने वाले व्यवसायों और अन्य मसलों पर बातचीत की। हाल में नई दिल्ली आए पांचवीं पीढ़ी के उद्योगपति 38 वर्षीय मफतलाल के साथ साक्षात्कार के खास अंश….
मफतलाल समूह लंबे समय से यूनिफॉर्म के क्षेत्र में है। आपने इस समय ऑनलाइन जाने का फैसला क्यों किया?
हां, हम बहुत लंबे समय से स्कूल इकोसिस्टम में हैं। हमने प्रत्येक नौ में से एक स्कूली भारतीय बच्चे के लिए कपड़े बनाए हैं। लेकिन उस वक्त ब्रांडिंग अहम नहीं थी। अब चीजें बदल गई हैं क्योंकि देश और अधिक महत्त्वाकांक्षी हो रहा है। हमने देखा है कि लोग यूनिफॉर्म का लेबल जानना चाहते हैं। टेलरिंग उद्योग भी छोटा होता जा रहा है और ई-कॉमर्स के आगमन से परिधानों की ओर बदलाव तेजी से हो रहा है। इसलिए, हमने कॉरपोरेट घरानों और स्कूलों के लिए एक मार्केटप्लेस के रूप में उस परत को जोड़ा है। हम मफतलाल मेडफिट्स (हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स के लिए परिधान) के लॉन्च के साथ इसका अस्पतालों तक भी विस्तार कर रहे हैं।
पिछले 120 वर्षों में मफतलाल घराने ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। आप अब किस तरह के पीढ़ीगत बदलाव की दिशा में बढ़ रहे हैं?
हमारे लिए सबसे बुरा दौर 90 के दशक में था जब हम बीआईएफआर (औद्योगिक और वित्तीय पुनर्निर्माण बोर्ड) में औपचारिक रूप से एक बीमार कंपनी के रूप में थे। हमें नहीं पता था कि हम रहेंगे भी या नहीं। इसलिए, संगठन के प्रति यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम फिर से आगे बढ़ें और लोगों को बताएं, जिससे वे प्रेरित हो सकें।
आपने हाल में निर्यात में भी कदम रखा है। यह कैसे हुआ?
जब हम पुनर्निर्माण कर रहे थे, तो हम एक मजबूत बाजार यानी भारत के सहारे पुनर्निर्माण करना चाहते थे। पिछले एक दशक या 15 वर्षों में, हम अपने लिए एक अनुमानित वृद्धि में कामयाब रहे हैं। सरकार बदलने के बाद हमारे लिए उनके साथ मिलकर काम करना सही लगा, एक ऐसे बाजार के लिए जिसे हम समझते थे। हमें लगता है कि हम जिस चीज में मजबूत हैं, उसे और बढ़ाना चाहते हैं और उसे दुनिया तक ले जाना चाहते हैं।
यूरोपीय संघ (ईयू) और अमेरिका के साथ हाल में हुए व्यापार सौदों के संदर्भ में आप अपने निर्यात कारोबार को कैसे विकसित होते हुए देखते हैं?
हमने पश्चिमी एशिया से शुरुआत की, जो सांस्कृतिक रूप से भारत जैसा है। हमने श्रीलंका और बांग्लादेश के साथ बहुत कारोबार किया है। अब यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौते और अमेरिकी टैरिफ पर कुछ निश्चितता के साथ, हम उन बाजारों के लिए रणनीतियां बनाना शुरू कर सकते हैं। यूरोपीय संघ हमारे आगे बढ़ने के तरीके में बड़ी भूमिका निभाएगा क्योंकि इस समझौते से हम बांग्लादेश और श्रीलंका जितना (अगर उससे ज्यादा नहीं तो) प्रतिस्पर्धी बनते हैं।
भू-राजनीति और एआई व्यवसायों के लिए दो बड़े उथल-पुथल वाले कारक बने हुए हैं। आप इन्हें कैसे देख रहे हैं?
हमारी रबर केमिकल निर्माण इकाई नोसिल वैश्विक व्यापार पर निर्भर है और यह भू-राजनीतिक व्यवधानों के असर का सामना कर रही है। टेक्सटाइल में, हमारी मजबूत पकड़ है। जब से हम बीआईएफआर से बाहर आए हैं, दुनिया बदल गई थी और हम बराबरी की कोशिश कर रहे थे।
हमने पिछले पांच वर्षों में ही आत्मविश्वास महसूस करना शुरू किया। हमें यकीन है कि हमने एक समूह स्तर पर मजबूत आधार बनाया है जो हमें आगे बढ़ने की राह देगा। एआई की बात करें तो, व्यवधान की गति इन दो स्थानों तक सीमित है। लेकिन हमारे पास भविष्य के कौशल निर्माण कार्यक्रमों के लिए गेट सेट लर्न भी है, जहां हम बहुत सारे एआई का उपयोग कर रहे हैं।