facebookmetapixel
Advertisement
इस हफ्ते खुलेंगे 6 नए म्युचुअल फंड, ICICI Pru MF के 3 लाइफ साइकिल फंड पर रहेगी सबकी नजरपीयूष गोयल 200 सदस्यीय कारोबारी प्रतिनिधिमंडल के साथ जापान जाएंगे, निवेश बढ़ाने पर जोरग्रासिम का FY27 में ₹2 लाख करोड़ रेवेन्यू का लक्ष्य, नए कारोबार से ग्रोथ को रफ्तार: कुमार मंगलम बिड़लाREITs को सिर्फ फिक्स्ड इनकम समझना भूल! यील्ड के साथ कैपिटल ग्रोथ का भी मौकानिवेशक पैसा रखें तैयार! इस हफ्ते खुलेंगे कुल 10 IPO, कई कंपनियों के शेयर भी होंगे लिस्टभारी उछाल के बाद क्या सोने-चांदी की कीमत में आएगी गिरावट या जारी रहेगी तेजी? जानें एक्सपर्ट्स की रायपीपीएफ से डिजिटल गोल्ड तक: इन 7 विकल्पों में हर महीने थोड़ा निवेश, लंबे समय में बनाएं बड़ा फंडअमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की चाल तय करेगी बाजार की दिशा, सेंसेक्स-निफ्टी में उठापटक के आसार‘भारत में रिटायरमेंट फंड बड़ा संकट’, PFRDA चेयरमैन का खुलासा: बुढ़ापे में घट जाती है 60-65% तक कमाईMcap: टॉप-10 में से 4 कंपनियों का मार्केट कैप 87,960 करोड़ घटा, भारती एयरटेल को सबसे बड़ा नुकसान

टावर बढ़ाने का रास्ता साफ

Advertisement
Last Updated- December 11, 2022 | 5:17 PM IST

दूरसंचार विभाग ने आज कहा कि वह टावरों के बैकहॉल के लिए यानी दो सेल टावरों के बीच संपर्क के लिए दूरसंचार कंपनियों को ई बैंड (71 से 76 गीगाहर्ट्ज और 81 से 86 गीगाहर्ट्ज) में 250-250 मेगाहर्ट्ज के ज्यादा से ज्यादा दो कैरियर आवंटित करेगा। इससे देश भर में 5जी नेटवर्क बिछाने की राह से बड़ी बाधा दूर हो जाएगी और नेटवर्क तेजी से बिछेगा।
दूरसंचार कंपनियों के आवेदन के बाद भी बहुप्रतीक्षित ई बैंड स्पेक्ट्रम का आवंटन अटका हुआ था क्योंकि सरकार यही नहीं तय कर पाई थी कि इसके लिए एक्सेस स्पेक्ट्रम की तरह नीलामी की जाए या इसे एक्सेस स्पेक्ट्रम के साथ दिया जाए अथवा सरकार द्वारा तय कीमत पर दे दिया जाए। ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम ने सार्वजनिक वाई-फाई में उपयोग के लिए इसे तय कीमत पर देने की मांग की थी।
दूरसंचार नियामक ने पहले सिफारिश की थी कि ई बैंड स्पेक्ट्रम को प्रशासन द्वारा तय कीमत पर दिया जाए मगर दूरसंचार कंपनियों ने इसका विरोध किया था। उनका कहना था कि समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए इसकी भी नीलमी की जानी चाहिए। किंतु 5जी स्पेक्ट्रम नीलामी की मंजूरी देने वाले केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बैकहॉल स्पेक्ट्रम अस्थायी तौर पर आवंटित करने की मंजूरी दे दी। सरकार अंतरिम अवधि में प्रत्येक ई बैंड कैरियर के लिए दूरसंचार सेवा प्रदाताओं से उनके समायोजित सकल राजस्व का 0.15 फीसदी बतौर शुल्क लेगी। इस तरह दूरसंचार कंपनियों से 2021 के उनके एजीआर के आधार पर 313 करोड़ रुपये लिए जा सकते हैं। जब कीमत तय कर ली जाएगी तो अस्थायी आवंटन की तारीख से हिसाब लगाया जाएगा। उसके बाद अगर कुछ बकाया रहता है तो उस पर ब्याज नहीं देना पड़ेगा। उद्योग का अनुमान है कि देश में अभी 7.23 लाख दूरसंचार टॉवर हैं, जिनकी संख्या 5जी सेवा शुरू होने पर 10 लाख के पार पहुंच सकती है। मगर अभी केवल 34 फीसदी टावरों के पास फाइबर बैकहॉल है। बाकी टावर पर पारंपरिक स्पैक्ट्रम बैंडविड्थ वाले माइक्रोवेव से चलते हैं, जिनकी कवरेज का दायरा बहुत है। दिक्कत यह है कि तेज रफ्तार इंटरनेट वाली 5जी सेवा इन बैंडों पर नहीं चल सकतीं। इनके लिए फाइबर या ई बैंड स्पेक्ट्रम की जरूरत है।
विश्लेषकों के अनुसार इससे एयरटेल और वोडाफोन आइडिया को ज्यादा लाभ होगा क्योंकि इनके पास फाइबर कनेक्शन वाले टावर कम हैं।

5जी के लिए 1.45 लाख करोड़ रुपये की बोलियां
नई पीढ़ी की 5जी स्पेक्ट्रम नीलामी की प्रक्रिया आज शुरू हो गई। दूरसंचार मंत्री अश्विनी वैष्णव  ने कहा कि चार चरण की बोली प्रक्रिया के बाद पहले दिन 1.45 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बोलियां मिलीं। उन्होंने कहा कि इस बार 700 मेगाहर्ट्ज बैंड फ्रीक्वेंसी में भी बोलियां मिली हैं। उन्होंने उम्मीद जताई  कि स्पेक्ट्रम का आवंटन 15 अगस्त तक पूरा हो जाएगा। इसके साथ ही देश के कई शहरों में साल के अंत तक 5जी सेवाएं शुरू होने की संभावना है। नीलामी में 600 से 2,300 मेगाहर्ट्ज, 3300 मेगाहर्ट्ज और 26 गीगार्ट्ज फ्रीक्वेंसी बैंड के स्पेक्ट्रम उपलब्ध हैं।

Advertisement
First Published - July 27, 2022 | 12:51 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement