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चिप की आपूर्र्ति में बिटकॉइन की सेंध

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Last Updated- December 12, 2022 | 3:27 AM IST

दुनिया भर में बिटकॉइन की बढ़ रही लोकप्रियता से इस उद्योग (सेमीकंडक्टर) में मांग बढ़ गई है। ऐसे में वैश्विक चिप निर्माता ऐसे चिप बनाने के लिए अपने संयंत्रों को पुन: तैयार कर रहे हैं जो बिटकॉइन सर्वरों के लिए जरूरी हाई प्रोसेसिंग स्पीड के लिहाज से उपयुक्त हों। वे छोटे लेकिन शक्तिशाली नैनोमीटर चिपों की ओर भी रुख कर रहे हैं जो ऊंचे कीमत वसूलने में मददगार हैं।
इसकी वजह यह है कि कार निर्माता और दूरसंचार उपकरण निर्माताओं जैसे अन्य उद्योगों को दुनियाभर में और भारत में, ऐसी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है जो संभवत: लंबे समय तक बनी रह सकती है।
चिप निर्माताओं के लिए उपकरणों की प्रख्यात निर्माता अप्लायड मैटेरियल्स के अनुमान से संकेत मिलता है कि बढ़ती मांग के अनुरूप आपूर्ति के लिहाज से नए संयंत्रों द्वारा उत्पादन पूरी तरह शुरू किए जाने में 24-30 महीने लग सकते हैं। चिप की किल्लत करीब एक साल पहले शुरू हुई थी। मोबाइल डिवाइस का निर्माण करने वाली लावा इंटरनैशनल के चेयरमैन हरि ओम राय यह किल्लत अनुमान के मुकाबले बेहतर लंबे से बनी हुई है। उन्होंने कहा, ‘हमने सोचा था कि यह एक साल बाद दूर हो जाएगी, लेकिन हमारा मानना है कि इसमें अन्य 6 महीने लग सकते हैं।’
राय ने कहा कि चिप की किल्लत से उन मोबाइल उपकरण निर्माताओं को समस्या हो रही है जिन्हें चिप की सामान्य जरूरत का 30-40 प्रतिशत से कम हिस्सा हासिल हो रहा है।
सिर्फ ऐसा नहीं है कि बिटकॉइन कंपनियों से मांग बढऩे से यह किल्लत पैदा हुई है। राय का मानना है कि फोन के लिए भी मांग में अचानक वृद्घि (इसलिए चिप की भी मांग बढ़ी है) कोविड संबंधित लॉकडाउन के बाद अनुमानित नहीं थी। उन्होंने कहा, ‘उदाहरण के लिए, विद्युत प्रबंधन और डिस्पले कम्युनिकेशन के लिए एकीकृत सर्किट को तैयार किया जाता है, जबकि मेमरी और सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट के लिए ये हाईटेक होते हैं। किल्लत नॉन-लीडिंग टेक चिप को लेकर है। इनके बगैर फोन का निर्माण नहीं किया जा सकता।’ उन्होंने कहा कि अपेक्षाकृत बड़े चिप निर्माता हाई-एंड चिप निर्माण के लिए क्षमता को नए तरह से विकसित कर रहे हैं और वे मोबाइल डिवाइस कंपनियों छोटे निर्माताओं या कारोबारियों के जरिये हाई नैनोमीटर चिप खरीदने को कह रहे हैं। बिटकॉइन ने चिप निर्माताओं को पिछले साल नए अवसर मुहैया कराए। अप्लायड मैटेरियल्स इंडिया के कंट्री प्रेसीडेंट श्रीनिवास सत्या ने कहा, ‘हम बिटकॉइन सर्वर जैसे क्षेत्रों में मौजूदा चिप क्षमता का पुनर्विकास देख रहे हैं। इन सर्वर के लिए आधुनिक चिप की जरूरत होती है जो अच्छी रकम हासिल करते हैं।’
सत्या का कहना है कि दूसरी तरफ, भारत और अन्य कहीं भी (जहां लागत घटाने के लिए जस्ट-इन-टाइम ऑपरेशन पर अमल किया जाता है) वाहन निर्माताओं ने चिप निर्माताओं से अपना उत्पादन घटाने को कहा है, क्योंकि वाहनों की बिक्री और उत्पादन स्तर घटा है।
इसे ध्यान में रखते हुए चिप निर्माताओं ने इस क्षमता को बिटकॉइन सर्वरों के लिए चिप बनाने पर केंद्रित किया है। यह उनके लिए फायदेमंद है, क्योंकि ज्यादातर चिप की जरूरत वाहन विनिर्माओं द्वारा इस्तेमाल माइक्रो कंट्रोलर में होती है, जो अत्याधुनिक नहीं हैं और इसलिए उनसे बहुत ज्यादा मार्जिन नहीं मिलता, जितना कि बिटकॉइन के लिए इस्तेमाल हाईटेक चिप पर मिलता है।

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First Published - June 21, 2021 | 12:13 AM IST

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