प्रमुख विमानन कंपनी इंडिगो के करीब 7 पायलट जांच के दायरे में हैं। उन पर उड़ान के दौरान रेडियो पर अपशब्द कहने का आरोप है। ये पायलट कोविड-पूर्व वेतन बहाल करने में विमानन कंपनी द्वारा की जा रही देरी और 121.5 मेगाहट्र्ज फ्रीक्वेंसी पर गुस्सा दिखा रहे थे।
रेडियो ट्रांसमिशन के दौरान 121.5 मेगाहट्र्ज फ्रीक्वेंसी का उपयोग ‘गार्ड’ फीक्वेंसी के तौर पर केवल आपातकाल में किया जाता है। इसके जरिये रेंज के दायरे में किसी भी एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) से संपर्क करने की कोशिश की जाती है और इससे पायलट को एटीसी के साथ लगातार संचार एवं कवरेज मिलता है। विमानन नियामक डीजीसीए मामले की जांच कर रहा है और यदि दोष साबित हो जाता है तो पायलटों को अपना लाइसेंस खोना पड़ सकता है।
यह 9 अप्रैल की घटना है। इससे पहले इंडिगो ने वेतन में कटौती के खिलाफ विरोध जताने के लिए हड़ताल की योजना बना रहे छह पायलटों को निलंबित कर दिया था। विमानन कंपनी के इतिहास में श्रमिकों के संगठित विरोध का यह पहला मामला है।
समझा जाता है कि एटीसी के अधिकारियों ने विमानन नियामक डीजीसीए को इस घटना की जानकारी दी थी। विमानन नियामक ने उस पर काफी सख्त रुख अख्तियार किया है क्योंकि रेडियो ट्रांसमिशन के दौरान अनुशासन पायलट प्रशिक्षण का बुनियादी हिस्सा है।
इस मामले से अवगत एक अधिकारी ने कहा, ‘सभी पायलट जानते हैं कि 121.5 फ्रीक्वेंसी का उपयोग आपातकाल में किया जाता है और नियमों के तहत संकट के बारे में गलत जानकारी देना गलत है। इसलिए इस फ्रीक्वेंसी पर गलत संकट एवं आपात संदेश अथवा फालतू बातचीत प्रतिबंधित है। एटीसी संकट में फंसे विमान के लिए 121.5 फ्रीक्वेंसी की निगरानी करता है।’ विमानन कंपनी के प्रवक्ता ने इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं की।
इस घटना के कुछ दिनों बाद इंडिगो के उड़ान परिचालन विभाग ने पायलटों को एक मेमो जारी कर रेडियो ट्रांसमिशन के दौरान अनुशासन को बनाए रखने की हिदायत दी थी।
इंडिगो के मुख्य पायलट (क्वालिटी एश्योरेंस एवं परिचालन सुरक्षा) राकेश श्रीवास्तव ने कहा, ‘रेडियो ट्रांसमिशन किसी विमानन कंपनी में अनुशासन एवं उसके पेशेवर रुख को मापने का एक प्रमुख मानदंड है और इंडिगो इसके लिए खुद पर गर्व करती रही है। दुर्भाग्य से हाल के दिनों में रेडियो ट्रांसमिशन के दुरुपयोग की घटना सामने आई है जिसकी पहचान कर ली गई है और उस पर उपयुक्त कार्रवाई की जा रही है।’
अमेरिका में 121.5 मेगाहट्र्ज फ्रीक्वेंसी के दुरुपयोग को काफी गंभीर मामला समझा जाता है और उसके लिए 19,246 डॉलर से लेकर 1,44,000 डॉलर तक का जुर्माना किया जा सकता है।
इंडिगो के लिए पायलटों का वेतन काफी गंभीर मुद्दा बन गया है क्योंकि पायलट इस बात से नाराज है कि उनका वेतन कोविड-पूर्व स्तर पर बहाल नहीं किया गया है। वेतन की आंशिक बहाली और पायलटों की नाराजगी के
बावजूद विमानन कंपनी रोजाना 1,600 से अधिक उड़ानों का संचालन करती है।