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ऑफिस से फैक्ट्री तक कर्मचारियों को पहुंचाने पर उबर का फोकस, कंपनी को दिख रहा यहां बड़ा अवसर

भारत जीसीसी, आईटी  पार्क और बड़े उद्यमों में तेजी से बढ़ोतरी देख रहा है, जिससे संगठित क्षेत्र के कर्मचारी परिवहन की महत्त्वपूर्ण संरचनात्मक मांग पैदा हो रही है

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पीरज़ादा अबरार   
Last Updated- January 11, 2026 | 10:12 PM IST

उबर भारत में कॉरपोरेट परिवहन बाजार पर भी ध्यान बढ़ा रही है। उसका अनुमान है कि 2030 तक यह बाजार 13 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। राइड-हेलिंग दिग्गज कंपनी इस पर दांव लगा रही है कि ऑफिस कर्मचारियों को आईटी पार्क, फैक्ट्री और वैश्विक क्षमता केंद्रों (जीसीसी) तक पहुंचाने से उसे वह बिजनेस और अनुमानित मांग मिलेगी जो कम ही मोबिलिटी सेगमेंट देते हैं।

उबर शटल के ईएमईए और भारत के महा प्रबंधक निकोलस वैन डे लूक ने कहा,’यह एक बहुत बड़ा मौका है, न सिर्फ भारत के लिए, बल्कि दुनिया भर में उबर के लिए भी। इस कदम से देश के कॉरपोरेट इकोसिस्टम में वृद्धि का पता चलता है।’

भारत जीसीसी, आईटी  पार्क, विनिर्माण केंद्र और बड़े उद्यमों में तेजी से बढ़ोतरी देख रहा है, जिससे संगठित क्षेत्र के कर्मचारी परिवहन की महत्त्वपूर्ण संरचनात्मक मांग पैदा हो रही है। उद्योग के अनुमानों से पता चलता है कि भारत का कॉरपोरेट परिवहन बाजार 2030 तक लगभग 13 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।

वैन डे लूक ने कहा कि कंपनी ने सात से आठ साल पहले बड़े आवागमन पैटर्न के साथ प्रयोग शुरू कर दिया था। मिस्र में एक आरंभिक परियोजना के रूप में जो शुरू हुआ, उसे दिल्ली जैसे शहरों में बाजार के आकार, भीड़भाड़ की चुनौतियों और स्पष्ट रूप से परिभाषित आवागमन पैटर्न द्वारा संचालित भारत में शीघ्र अपनाया गया। 

वैन डे लूक ने कहा कि एम्प्लॉई ट्रांसपोर्ट बिजनेस उबर की मार्केटप्लेस राइड्स से इस मामले में अलग है कि इसमें ग्राहकों को एक भरोसेमंद वाहन मुहया कराया जाता है और खाली समय में गाड़ियों को बड़े मार्केटप्लेस में भेजा जाता है। उन्होंने कहा कि यह प्लेटफॉर्म मॉडल ड्राइवरों को पीक शिफ्ट के दौरान ग्राहकों को सेवा देने और फिर भी मार्केटप्लेस पर काम करने की सुविधा देता है, जिससे ड्राइवरों को फायदा होता है और ग्राहकों के लिए कीमतें कम करने में भी मदद मिलती है।

First Published : January 11, 2026 | 10:12 PM IST