उद्योग

बड़े दावे, सीमित नतीजे: AI के दौर में भी कई GCC सिर्फ कॉस्ट सेंटर बनकर रह गए, वैल्यू क्रिएशन से कोसों दूर

आईटी उद्योग के निकाय नैसकॉम के अनुसार, भारत में बैंकिंग, वित्तीय सेवा और बीमा (बीएफएसआई),रिटेल, हेल्थ केयर, एयरोस्पेस और तेल एवं गैस जैसे क्षेत्रों में लगभग 1,800 जीसीसी हैं

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अविक दास   
Last Updated- January 11, 2026 | 10:02 PM IST

कई छोटे और मध्यम आकार के वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) लंबे समय तक काम करने के बाद भी उस तरह का परिणाम देने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जिसकी उम्मीद उनके मुख्यालय ने की थी। इससे वे अब सिर्फ कॉस्ट और डिलिवरी सेंटर बनकर रह गए हैं, खासकर ऐसे समय में, जब आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) व्यवसाय की प्रक्रियाओं को पूरी तरह बदल रहा है। हालांकि ऐसी कई कंपनियां अभी भी शुरुआती चरण में हैं। उन्होंने बेहद धूमधाम से जीसीसी को शुरू किया और कर्मियों की संख्या वृद्धि और उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की घोषणाएं कीं। कई वर्षों तक स्थिर रहने के बाद वे अपने परिचालन को पुनर्गठित करने के लिए कंसल्टिंग कंपनियों से मदद ले रही हैं, या फिर जीसीसी को सर्विस कंपनियों को पूरी तरह बेचने पर भी विचार कर रही हैं।

इंडस्ट्री के जाने-माने व्यक्ति और डिजिटल स्ट्रैटेजिस्ट सुनील पद्मनाभ का अनुमान है कि 18–20 प्रतिशत जीसीसी एआई- अनुकूल होंगे, जिनमें एआई उनके मुख्य कामकाज और असली फैसले लेने की आजादी में शामिल होगा। लगभग 52 प्रतिशत जीसीसी एआई के लिहाज से एक्टिव तो रहेंगे लेकिन सीमित रहेंगे, जिनमें हर जगह टूल्स होंगे और स्ट्रक्चर पर सीमित असर होगा, जबकि 30 प्रतिशत रुक जाएंगे या पीछे चले जाएंगे, जो पायलट प्रोजेक्ट पर ज्यादा निर्भर रहेंगे, बिखरे हुए होंगे और उन पर अधिक सवाल उठेंगे।

निर्माण जैसे क्षेत्रों में ज्यादातर काम ईआरपी सपोर्ट, इंजीनियरिंग बदलाव और रिपोर्टिंग का होता है। टीमें व्यस्त और भरोसेमंद होती हैं, लेकिन फैसले अभी भी विदेश में लिए जाते हैं। जब ऑटोमेशन या कॉस्ट रिव्यू होते हैं, तो डिलीवरी के अलावा ज्यादा कुछ करने का मौका नहीं होता।

आईटी उद्योग के निकाय नैसकॉम के अनुसार, भारत में बैंकिंग, वित्तीय सेवा और बीमा (बीएफएसआई),रिटेल, हेल्थ केयर, एयरोस्पेस और तेल एवं गैस जैसे क्षेत्रों में लगभग 1,800 जीसीसी हैं। लेकिन विश्लेषकों के अनुसार, इस साल हर प्रत्येक पांच में से सिर्फ एक जीसीसी ही सच में एआई-मैच्योर होगा, जिसमें बीएफएसआई, रिटेल और सीपीजी वालों का पलड़ा भारी रहेगा।  

ग्लोप्लक्स सॉल्युशंस के प्रबंध निदेशक एवं सह-संस्थापक अवीक मुखर्जी का कहना है कि भारत में ज्यादातर जीसीसी अभी भी अपनी पेरेंट कंपनी से ऑर्डर लेते हैं, लेकिन वैल्यू देकर, किसी प्रोडक्ट या प्लेटफॉर्म को अपनाकर, या ऐसे इनोवेशन करके जो कंपनी की स्ट्रेटेजी पर असर डालें, वे अभी तक सच्चे सहयोगी के तौर पर काम नहीं कर पाए हैं।

First Published : January 11, 2026 | 10:02 PM IST