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भारतीय तेल कंपनियां चलीं ईरान

Last Updated- December 07, 2022 | 5:42 AM IST

पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों से परेशान होकर अब भारतीय तेल उत्खनन कंपनियां गैस उत्खनन के लिए ईरान का रुख कर रही हैं।


इन कंपनियों की सूची में ओएनजीसी विदेश, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) और ऑयल इंडिया मिलकर ईरान के फारसी ब्लॉक में पिछले साल खोजे गए गैस भंडार को विकसित करने के लिए लगभग 120 अरब रुपये का निवेश करने की योजना बना रही हैं।

ऑयल ऐंड नैचुरल गैस कमीशन (ओएनजीसी) की विदेशी इकाई ओएनजीसी विदेश और आईओसी की इस ब्लॉक में 40-20 फीसदी हिस्सेदारी है। जबकि ओआईएल की 20 फीसदी हिस्सेदारी है। आईओसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि संगठन ने इस भंडार में मौजूद व्यवासायिक संभावनाओं का ब्यौरा ईरान की सरकार को दे दिया है।

रिपोर्ट के अनुसार इस भंडार में लगभग 12.8 खरब घन फुट गैस मौजूद है। कृष्णा- गोदावरी बेसिन में मौजूद रिलायंस के रिर्जव में भी इतना ही गैस भंडार मौजूद है। माना जा रहा है कि इस बेसिन से गैस की आपूर्ति शुरू होने पर भारत में ईंधन की आपूर्ति दोगुनी हो जाएगी।

कुल 120 अरब रुपये के निवेश में से आईओसी लगभग 48 अरब रुपये लगाएगी। तेल सब्सिडी के कारण भारी घाटा झेल रही आईओसी ने कहा कि कंपनी फारसी ब्लॉक में निवेश करने के लिए पर्याप्त रकम का इंतजाम कर लेगी। कंपनी के अधिकारी ने कहा, ‘एक बार ईरान सरकार इस ब्लॉक में मौजूद गैस के व्यवासायिक इस्तेमाल को मंजूरी दे दे तो बैंक हमें ऋण देने के लिए राजी हो जाएंगे।’

ईरान में कार्य करने वाली विदेशी कंपनियों को वहां खोजे गये भंडारों में मौजूद ईंधन के इस्तेमाल की दजाजत नहीं मिलती है। उन्हें भंडार के उत्खनन में लगाई गई रकम वहां की कंपनियों और ईरान की सरकार के बीच होने वाली बातचीत के बाद रिइंबर्समेंट के तौर पर ब्याज के साथ वापस की जाती है।

ओएनजीसी विदेश, आईओसी और ओआईएल ने उत्खनन का कार्य पूरा कर ईरान की सरकार को इसकी रिपोर्ट भी सौंप दी है। अब वहां की सरकार को यह तय करना है कि इस गैस का व्यावासायिक इस्तेमाल हो सकता है या नहीं। इस भंडार को विकसित करने का ठेका भारतीय कंपनियों के संगठन को मिल भी सकता है और नहीं भी। भारतीय कंपनियों ने फारसी ब्लॉक में उत्खनन के लिए लगभग 36 करोड़ रुपये खर्च किये थे।

आईओसी के अधिकारी ने कहा, ‘अगर हमें यह ठेका नहीं मिलता है तो हम अपनी लागत को 35 फीसदी ब्याज दर के हिसाब से वसूलेंगे।’ फारसी ब्लॉक में एक अरब बैरल मात्रा से भी ज्यादा तेल मौजूद है और इसका लगभग 10 फीसदी हिस्सा इस्तेमाल के लायक है।

First Published - June 13, 2008 | 11:49 PM IST

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