facebookmetapixel
Delhi Air Pollution: दिल्ली की हवा अब ‘सर्जिकल मास्क’ वाली! AQI 500 के करीब; GRAP IV लागूTrump Tariffs: ग्रीनलैंड पर ट्रंप का अल्टीमेटम, डेनमार्क को टैरिफ की खुली धमकीWeather Update Today: उत्तर भारत में ठंड का डबल अटैक; घना कोहरा, बारिश और बर्फबारी का अलर्टCorporate Action Next Week: अगले हफ्ते बाजार में हलचल, स्प्लिट-बोनस के साथ कई कंपनियां बांटेंगी डिविडेंड1485% का बड़ा डिविडेंड! Q3 में जबरदस्त प्रदर्शन के बाद हाल में लिस्ट हुई कंपनी ने निवेशकों पर लुटाया प्यार300% का तगड़ा डिविडेंड! IT सेक्टर की दिग्गज कंपनी का निवेशकों को गिफ्ट, रिकॉर्ड डेट भी फिक्सICICI Bank Q3 Results: मुनाफा 4% घटकर ₹11,318 करोड़ पर, NII में 7.7% की बढ़ोतरीX पर लेख लिखिए और जीतिए 1 मिलियन डॉलर! मस्क ने किया मेगा इनाम का ऐलान, जानें पूरी डिटेलChatGPT में अब आएंगे Ads, अमेरिका के यूजर्स के लिए ट्रायल शुरूलक्ष्मी मित्तल के पिता मोहन लाल मित्तल का निधन, उद्योग और समाज में गहरा शोक

बीसीसीआई की कमाई में आयकर विभाग की सेंध

Last Updated- December 07, 2022 | 11:40 AM IST

दुनिया के सबसे रईस क्रिकेट बोर्ड भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की कमाई पर अब आयकर विभाग की नजर पड़ गई है।


भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को इस वित्त वर्ष से ही इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल), टेलीविजन के अधिकारों की बिक्री से, टिकटों और विज्ञापनों से होने वाली कमाई पर कर का भुगतान करना पड़ेगा। आयकर विभाग जल्द ही बीसीसीआई को आयकर अधिनियम, 1961, की धारा 11(4) के आधार पर कर का भुगतान करने के लिए कह सकता है।

यह धारा ट्रस्ट की व्यावसायिक गतिविधियों पर लगाई जाती है। इस धारा के लगने के बाद बीसीसीआई को इस वित्त वर्ष में  33.99 फीसदी की दर से कर का भुगतान करना पड़ेगा। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने बीसीसीआई पर संभावित करों का अध्ययन करने के लिए एक समिति का गठन किया है। सूत्रों के मुताबिक यह समिति भी कुछ ऐसे ही कर लगाने की रिपोर्ट बोर्ड को सौंपेगी।

आयकर विभाग के पास बोर्ड धारा 12 (ए) के तहत एक ट्रस्ट के  रूप में पंजीकृत है। बीसीसीआई को अभी तक धारा 11 के तहत चैरिटेबल ट्रस्ट की तरह ही करों से छूट दी जा रही थी। लेकिन अब आयकर विभाग बीसीसीआई का ट्रस्ट का दर्जा समाप्त कर पब्लिक युटिलिटी कंपनी का दर्जा देने पर विचार कर रहा है। चैरिटी के नाम पर छूट लेने के मामले में हो रही धोखाधड़ी को देखते हुए सरकार ने इस बार बजट के दौरान वित्त मंत्रालय ने चैरिटी की परिभाषा में फेर-बदल किया है। नई परिभाषा के मुताबिक किसी भी चैरिटी को व्यावसायिक कार्य से होने वाली कमाई पर कर में छूट नहीं मिलेगी।

एक अधिकारी ने कहा, ‘इस मामले पर हम बीसीसीआई को कोई सर्कुलर नहीं भेजने वाले हैं। हम बीसीसीआई से व्यावसायिक गतिविधियों से होने वाली कमाई पर कर देने के लिए कहने वाले हैं।’ अगर बीसीसीआई आईपीएल, विज्ञापन, टीवी पर प्रसारण अधिकारों की बिक्री, और टिकटों से होने वाली कमाई को नहीं दिखाते हैं तो इस मामले से जुड़े अधिकारी अकाउंट्स को अलग करने या ऑडिट करने के ऑर्डर भी दे सकते हैं। इसके अलावा विभाग तिमाही अग्रिम कर भुगतान की भी जांच करेगी। आखिरी जांच सितंबर 2009 के आयकर रिर्टन भरने के बाद जांच की जाएगी।

First Published - July 16, 2008 | 12:01 AM IST

संबंधित पोस्ट