बाजार विभिन्न ईंधन श्रेणियों में मूल्य वृद्धि की तैयारी में था लेकिन विमान ईंधन (एटीएफ) की कीमतों में बुधवार को हुई 18 फीसदी की वृद्धि ने सबको अचंभित कर दिया। इससे नागरिक उड्डयन क्षेत्र को जबरदस्त झटका लग सकता है, खासकर ऐसे समय में जब कोविड-19 प्रेरित लॉकडाउन एवं प्रतिबंधों के भयानक प्रभावों के बाद सुधार दिखना शुरू हो गया था।
वित्त वर्ष 2022 की तीसरी तिमाही के दौरान बेहतर वित्तीय नतीजों के साथ यात्री यातायात में सुधार के संकेत दिखने लगे थे। लेकिन जनवरी 2022 में ओमीक्रोन लहर के कारण यात्रियों की संख्या में दोबारा गिरावट आई। महीने के दौरान घरेलू यात्रियों की संख्या में मासिक आधार पर 43 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि फरवरी 2022 हवाई यात्रियों की संख्या में जनवरी 2022 के मुकाबले करीब 20 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। इसी प्रकार मार्च के पहले सप्ताह में रुझान अच्छा दिखा। यात्रियों का स्तर फिलहाल कोविड-पूर्व स्तर के मुकाबले करीब 75 फीसदी पर है।
एटीएफ कीमतों में हालिया वृद्धि से पहले भी विमान ईंधन की कीमत कोविड-पूर्व स्तर के मुकाबले 50 फीसदी अधिक थी। बढ़ी हुई लागत के बोझ से निपटने के लिए विमानन कंपनियों ने किराये में बढ़ोतरी की थी। औसत विमानन कंपनी की कुल परिचालन लागत में ईंधन लागत की हिस्सेदारी करीब 40 फीसदी होती है। विमान र्ईंधन की कीमतों में हुई ताजा वृद्धि से घरेलू विमानन कंपनियों की लागत में 4 से 5 फीसदी की वृद्धि हो सकती है। ऐसे में विमानन कंपनियां बढ़ी हुई लागत का बोझ खुद वहन कर सकती हैं अन्यथा किराये में बढ़ोतरी की जा सकती है।
यात्रियों के लिए हवाई टिकट और 2एटसी/ प्रथम श्रेणी के रेलवे टिकटों के बीच लागत की तुलना भी काफी महत्त्वपूर्ण है। 15 मार्च तक (एटीएम मूल्य में 18 फीसदी की वृद्धि से पहले) कुछ सप्ताह पहले बुकिंग कराने पर हवाई किराया ट्रेन किराये के मुकाबले करीब 20 फीसदी महंगा था। यह शुरुआती बुकिंग का मामला नहीं है जहां काफी पहले बुकिंग कराने पर रेल टिकट और हवाई टिकट लगभग बराबर दिखता था।
ऐसे में अधिक विमान किराये से यात्रियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और वे सस्ता विकल्प के तौर पर रेलवे को तरजीह दे सकते हैं। इसके अलावा एक अन्य कोविड लहर का जोखिम बराकरार है जिससे यातायात की रफ्तार सुस्त होगी अथवा नए सिरे से लॉकडाउन अथवा कफ्र्यू लगाना पड़सकता है।
साल 2012-13 और 2013-14 के बीच हवाई किराये में करीब 25 फीसदी की वृद्धि हुई थी और यात्रियों की संख्या में करीब 4 फीसदी की गिरावट आई थी। इस प्रकार महज दो साल बाद हवाई यातायात 2012 के स्तर पर चला गया था। ऐसा नहीं है कि किराये में वृद्धि होने पर यात्रियों की संख्या में भी बढ़ोतरी होगी। जाहिर तौर पर हवाई यातायात अन्य कारकों से भी प्रभावित हुई है। लेकिन यह एक अन्य संकेत है कि यातायात नकारात्मक तौर पर प्रभावित होगी।
एक विश्लेषण के अबनुसार, मौजूदा एटीएफ की कीमत और किराये पर इंडिगो का प्रति यात्री प्रति किलोमीटर राजस्व प्राप्ति करीब 4.5 रुपये के आसपास होगी और यह एक बफर है। लेकिन यदि हवाई यातायात गंभीर रूप से प्रभावित हुई तो उसकी भरपाई इससे नहीं हो पाएगी।