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हाइब्रिड की तुलना इलेक्ट्रिक वाहनों से नहीं की जा सकती: Tata Motors MD

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शैलेश चंद्रा ने कहा ‘सरकार पहले से ही कम कराधान के जरिये हाइब्रिड वाहनों को समर्थन दे रही है और इन्हें इलेक्ट्रिक वाहनों के समान लाने की कोई जरूरत नहीं है।’

Last Updated- January 21, 2024 | 9:54 PM IST
‘There’s high preference for diesel in high-end SUV segment’

टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के प्रबंध निदेशक शैलेश चंद्रा का मानना है कि केवल शून्य उत्सर्जन वाली कारें ही वायु प्रदूषण में कमी लाने, ईंधन आयात घटाने और शुद्ध शून्य उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने में मदद कर सकती हैं।

उद्योग के एक वर्ग द्वारा हाइब्रिड कारों पर लगाए गए करों में कटौती की मांग के बीच चंद्रा ने कहा कि ऐसे वाहन शुद्ध शून्य उत्सर्जन लक्ष्य को प्राप्त करने, वायु गुणवत्ता के स्तर में सुधार और जीवाश्म ईंधन आयात को कम करने के प्रमुख राष्ट्रीय उद्देश्यों के साथ मेल नहीं खाते हैं।

उन्होंने कहा कि कारों में हाइब्रिड और सीएनजी प्रौद्योगिकियां ईंधन दक्षता में सुधार करने और उत्सर्जन-संबंधी नियामकीय अनुपालन को पूरा करने में मदद करती हैं, लेकिन इसकी तुलना शुद्ध बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों से नहीं की जा सकती।

चंद्रा ने कहा ‘सरकार पहले से ही कम कराधान के जरिये हाइब्रिड वाहनों को समर्थन दे रही है और इन्हें इलेक्ट्रिक वाहनों के समान लाने की कोई जरूरत नहीं है।’

उन्होंने कहा कि हाइब्रिड कारों की तुलना इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) से नहीं की जा सकती क्योंकि वे अनिवार्य रूप से प्रदूषण फैलाने वाले ‘जीवाश्म ईंधन’ पर चलती हैं।

चंद्रा ने कहा कि ईवी की तुलना में हाइब्रिड को ‘अनावश्यक दर्जा’ देने पर जोर दिया जा रहा है।

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First Published - January 21, 2024 | 9:54 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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