लॉजिस्टिक्स कंपनी Delhivery को पिछले तिमाही के मुकाबले कम घाटा हुआ है। इसकी एक वजह है सप्लाई चेन और ट्रक सेवाओं में ज़्यादा सामान पहुंचाना। कंपनी को मार्च के अंत में खत्म हुई तिमाही में 68.47 करोड़ रुपये का घाटा हुआ, जबकि पिछले साल इसी अवधि में घाटा 159 करोड़ रुपये था।
हालांकि, ये घाटा एनालिस्ट्स के अनुमान से ज़्यादा रहा। एनालिस्ट्स ने 25.86 करोड़ रुपये के घाटे का अनुमान लगाया था। कुल आमदनी में 13.5% की बढ़ोतरी हुई और 2,195 करोड़ रुपये हो गई।
लॉजिस्टिक्स कंपनियों के लिए मुश्किलें बढ़ रही हैं। ज्यादा से ज्यादा ई-कॉमर्स कंपनियां अपना सामान पहुंचाने का काम खुद करने लगी हैं, ताकि पैसा बचा सकें। इससे पहले ये काम वो थर्ड पार्टी लॉजिस्टिक्स कंपनियों को देती थीं।
एनालिस्ट का मानना था कि पिछली तिमाही में व्यापार से व्यापार (B2B) कारोबार में सामान की मात्रा बढ़ेगी। लेकिन उन्हें चिंता थी कि इतनी मात्रा बढ़ने पर भी कंपनियां उतना ही पैसा कमा पाएंगी या नहीं।
एक्सपर्ट्स की राय में, इस चुनौतीपूर्ण माहौल में Delhivery की स्थिति बेहतर है। इसकी वजह छोटे शहरों तक मजबूत पहुंच और कम लागत का फायदा है। दूसरी तरफ, कंटेनर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया को पिछली तिमाही में निर्यात और आयात कारोबार में बढ़ी हुई मात्रा की वजह से ज्यादा मुनाफा हुआ है।