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कोविशील्ड के दूसरे चरण का परीक्षण जल्द

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Last Updated- December 15, 2022 | 3:19 AM IST

पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) का मानना है कि ऑक्सफर्ड विश्वविद्यालय और ब्रिटिश-स्वीडिश दवा कंपनी ऐस्ट्राजेनेका द्वारा मिलकर विकसित किए जा रहे कोविड-19 के टीके (कोविशील्ड) के दूसरे और तीसरे चरण के परीक्षण भारत में साल के अंत तक पूरे हो जाएंगे। एसआईआई दूसरे चरण का परीक्षण शुरू करने को एकदम तैयार है। इस पूरी प्रक्रिया से वाकिफ एक व्यक्ति के मुताबिक ‘ऐसा इसलिए क्योंकि यूके में 10,000 से अधिक स्वस्थ स्वयंसेवकों पर परीक्षण चल रहे हैं और प्राथमिक आंकड़े भारतीय नियामकों के समक्ष समीक्षा के लिए पेश किए जाएंगे।’ ऐसे में नवंबर तक निर्णायक आंकड़े सामने आ सकते हैं।
ऑक्सफर्ड-एस्ट्राजेनेका दुनिया भर में कोविड-19 का टीका बनाने की होड़ में काफी आगे हैं और एसआईआई ने भारत तथा अन्य गरीब मुल्कों में टीके की आपूर्ति के लिए एस्ट्राजेनेका से समझौता किया है। एसआईआई ने पुणे में इसका उत्पादन भी शुरू कर दिया है। भारतीय आबादी पर टीके का असर जानने के लिए एसआईआई दूसरे और तीसरे चरण का परीक्षण कर रही है। भारतीय औषधि महानियंत्रक ने अगस्त के पहले सप्ताह में उसे दूसरे और तीसरे चरण के परीक्षण की इजाजत दी। कोविड-19 की विषय विशेषज्ञ समिति ने एसआईआई के प्रस्ताव का आकलन किया और टीके की प्रतिरोधक क्षमता तैयार करने की काबिलियत के अध्ययन की मंजूरी दी।
इस टीके का परीक्षण ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका में भी हो रहा है। एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि चूंकि ब्रिटेन में हो रहे परीक्षण में एशियाई मूल के ज्यादा लोग शामिल नहीं हैं इसलिए भारत में परीक्षण करना महत्त्वपूर्ण है।
भारत में हर स्वयंसेवक को चार सप्ताह के अंतराल पर टीके की दो खुराक दी जाएंगी। इसके बाद पूर्वनिर्धारित अंतराल के बाद इसकी सुरक्षा और प्रतिरोधक क्षमता का आकलन किया जाएगा। ये परीक्षण देश में 17 स्थानों पर 18 वर्ष से अधिक उम्र के 1,600 स्वस्थ स्वयंसेवकों पर किए जाएंगे।
परीक्षण के लिए चुनी गई जगहों में एम्स दिल्ली, एम्स जोधपुर, नेहरू अस्पताल गोरखपुर, बीजे मेडिकल कॉलेज पुणे, आंध्र मेडिकल कॉलेज विशाखापत्तनम, केईएम अस्पताल और नायर अस्पताल मुंबई शामिल हैं। हालांकि एसआईआई ने इन नामों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
केईएम अस्पताल में करीब 160 लोगों पर परीक्षण किया जाएगा। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ने अगस्त के पहले सप्ताह में अस्पताल को इस बारे में पत्र लिखा। केईएम अस्पताल के डीन हेमंत देशमुख के मुताबिक इस परीक्षण के लिए अत्यंत युवा या ज्यादा बुजुर्गों का चयन नहीं किया जाएगा। दूसरे चरण के परीक्षण के बाद एसआईआई द्वारा दिए गए आंकड़ों की जांच डेटा सेफ्टी मॉनिटरिंग बोर्ड और केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संस्थान द्वारा की जाएगी। मंजूरी मिलने पर तीसरे चरण के परीक्षण हो सकेंगे। मेडिकल जर्नल द लैंसेट के जुलाई अंक में प्रकाशित समीक्षा में कहा गया है कि ब्र्रिटेन में हुए परीक्षण में टीके का प्रदर्शन अच्छा रहा है और कोई खास सुरक्षा चिंता सामने नहीं आई।
एसआईआई को बिल ऐंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन से 15 करोड़ डॉलर की रिस्क फंडिंग मिली है ताकि टीके की 10 करोड़ खुराक 250 रुपये प्रति खुराक की दर पर गावी नामक टीका गठजोड़ को मुहैया कराई जा सके। फर्म के मुताबिक भारत में टीके की कीमत 1,000 रुपये प्रति टीके से कम रखी जाएगी। भारत उन देशों में भी शामिल है जहां गावी टीके की आपूर्ति कर यह सुनिश्चित करेगा कि दुनिया भर में टीके का समान वितरण हो सके।

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First Published - August 18, 2020 | 11:37 PM IST

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