एयर इंडिया के लिए रहेंगी चुनौतियां

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 12:07 AM IST

टाटा संस द्वारा 2.4 अरब डॉलर के कर्ज में डूबी सरकारी स्वामित्व वाली एयर इंडिया की खरीद से समूह को मूल्यवान उड़ान अधिकार और लैंडिंग स्लॉट तक तत्काल पहुंच मिल जाएगी, जिससे इसे विदेशी प्रतिस्पद्धिर्यों से बाजार हिस्सेदारी वापस लेने में मदद मिलेगी। लेकिन उद्योग के अधिकारियों ने इस बात के लिए चेताया है कि ऐसी किसी भी सफलता के लिए एक लंबी और जटिल प्रक्रिया रहेगी, जिसकी लागत एक अरब डॉलर से भी अधिक हो सकती है और इसकी बेशुमार दिक्कतों को दुरुस्त करने की भी जरूरत होगी, जिसमें पस्त हो चुका बेड़ा,खराब सेवा और किसी करिश्माई अगुआ की कमी भी शामिल है।
किसी समय एयर इंडिया अपने महाराजा शुभंकर प्रतीक के साथ भव्य रूप से सजाए गए अपने विमानों और विमान कंपनी के संस्थापक जेआरडी टाटा, जो भारत के पहले वाणिज्यिक पायलट थे, द्वारा समर्थित उत्कृष्ट सेवा के लिए प्रसिद्ध थी। लेकिन वर्ष 2000 के दशक के मध्य से वित्तीय संकट बढऩे के कारण इसकी प्रतिष्ठा गिर गई है। इसने बुरी दशा में बिजनेस क्लास सीटों वाले बड़े आकार केे विमानों को उड़ाया और अपने कुछ नए बोइंग को 787 ड्रीमलाइनर विमानों को स्पेयर पार्ट्स के लिए इस्तेमाल करने के वास्ते खड़ा कर दिया। अधिकारियों ने कहा कि ग्राहकों को कई बार देरी का सामना करना पड़ता था और कर्मचारियों तथा आपूर्तिकर्ताओं को हमेशा समय पर भुगतान नहीं किया जाता था।
विमानन उद्योग के एक अनुभवी अधिकारी ने कहा कि अगर आपके पास नए या ऐसे हवाई जहाज नहीं हैं, जो विश्वसनीय हो, तो आप कुछ भी कर लें, आपको परेशानी उठानी पड़ेगी। सरकार से टाटा को मालिकाना हक का हस्तांतरण वर्ष के अंत तक होने की उम्मीद है। अधिकारी ने कहा कि इसके बाद कंपनी के पास इन मसलों को दुरुस्त करने के लिए वर्ष 2022 की गर्मियों तक का समय होगा, जब कोविड के बाद मांग बढऩे की उम्मीद है।
उन्होंने अनुमान जताते हुए कहा कि एयर इंडिया के 141 विमानों के नवीनीकरण के लिए एक अरब डॉलर से अधिक की लागत और कर्मचारियों को दोबारा प्रशिक्षित करने और परिचालन तथा सेवाओं में सुधार के लिए 30 करोड़ डॉलर तक का खर्चा होगा।

First Published : October 19, 2021 | 11:42 PM IST