कुमार मंगलम बिड़ला द्वारा वोडाफोन आइडिया (वी) में अपनी 27 प्रतिशत हिस्सेदारी सरकार या घरेलू इकाई को सौंपने के संबंध में लिखे गए पत्र को लेकर खबरें सामने आने के एक दिन बाद कंपनी के ऋणदाताओं ने कहा है कि वे इस पत्र पर गंभीरता से विचार करेंगे और एक साझा समाधान तलाशने की कोशिश करेंगे। इस पत्र मे आदित्य बिड़ला गु्रप द्वारा वीआई में अपनी 27 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचे जाने की इच्छा जताई गई है।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकरों ने कहा है कि वे वीआई द्वारा भुगतान चूक को लेकर चिंतित नहीं थे, और कंपनी ने नियमित रूप से ऋण चुकाया है। कुछ अन्य समस्याओं – स्पेक्ट्रम भुगतान और समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) बकाया ने दबाव पैदा किया है, जिसे सरकार दूर करने की कोशिश कर रही है।
इसी तरह का विचार प्रकट करते हुए पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी एस एस मल्लिकार्जुन राव ने तिमाही नतीजों की घोषणा के बाद मीडिया को बताया कि पिछले महीनों के दौरान दूरसंचार क्षेत्र में सामने आए घटनाक्रम चिंता का विषय थे। राव ने कहा कि बैंक का काफी कम बकाया (संयुक्त ऋण और वीआई के लिए बैंक गारंटी शामिल) है और इससे कोई प्रभाव पडऩे की आशंका नहीं है। हालांकि उन्होंने ऋणदाताओं की संभावित बैठकों के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी।
कर्ज का बोझ
वीआई का कर्ज पिछले चार वर्षों के दौरान तीन गुना बढ़कर मार्च 2021 तक 1.6 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो वित्त वर्ष 2016 में करीब 37,000 करोड़ रुपये था। इसमें आस्थगित स्पेक्ट्रम देनदारियां और एजीआर बकाया शामिल है।
बैंकरों का कहना है कि मुख्य प्रयास इस उद्योग के लिए उपयुक्त समाधान तलाशना था, न कि किसी खास कंपनी के लिए। उन्होंने कहा कि ऋणदाताओं को आश्वस्त किया गया था, और मौजूदा समय में ऋण पुनर्गठन की कोई योजना नहीं है।
कंपनी का नियंत्रण सौंपने के संबंध मेंबिड़ला ने 7 जून को केंद्रीय कैबिनेट सचिव राजीव गौबा को पत्र लिखा था।