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रिलायंस-फ्यूचर सौदे पर लगी रोक

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Last Updated- December 12, 2022 | 6:53 AM IST

ई-कॉमर्स दिग्गज एमेजॉन को आज बड़ी राहत मिली, जब दिल्ली उच्च न्यायालय ने 3.4 अरब डॉलर (करीब 24,713 करोड़ रुपये) के फ्यचूर-रिलायंस सौदे के खिलाफ आपात मध्यस्थता आदेश बरकरार रखने का फैसला सुनाया। अदालत ने फ्यूचर समूह को प्रधानमंत्री राहत कोष में 20 लाख रुपये जमा कराने का भी आदेश दिया।
न्यायमूर्ति जेआर मिधा ने फ्यचूर रिटेल, फ्यचूर कूपन्स और किशोर बियाणी तथा अन्य को आपात मध्यस्थता आदेश के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार ठहराया। अदालत ने बियाणी तथा अन्य को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि उन्हें हिरासत में क्यों नहीं लिया जाए। इसके साथ ही अदालत ने बियाणी की संपत्तियों को जब्त करने का भी निर्देश दिया और संपत्तियों से जुड़ा हलफनामा दायर करने को कहा।
अदालत ने आपात मध्यस्थता आदेश को सही ठहराया। इसके साथ ही समूह को सक्षम प्राधिकरणों के पास जाने और फ्यचूर-रिलायंस सौदे के बारे में मिली मंजूरियां वापस करने का निर्देश दिया गया है। फ्यचूर समूह को निर्देश दिया गया कि वह रिलायंस के साथ सौदे पर आगे नहीं बढ़े। बियाणी तथा अन्य को 28 अप्रैल को अदालत में हाजिर होने का भी आदेश दिया गया। इसके साथ ही अदालत ने कहा कि 25 अक्टूबर, 2020 के बाद रिलायंस संग सौदे में कोई कार्रवाई की गई हो तो उसके बारे में भी फ्यचूर समूह जानकारी मुहैया कराए। मद्रास उच्च न्यायालय के वकील के नरसिम्हन ने कहा, ‘दिल्ली उच्च न्यायालय का आदेश संभवत: सर्वाधिक सख्त फैसलों में से एक है और इसका कारोबारी सुगमता में भारत की रैंकिंग पर भी असर पड़ सकता है।’ उन्होंने कहा कि यह आदेश न्यायिक व्यवस्था में भरोसे को और पुख्ता करेगा तथा कारोबारियों को अहसास होगा कि समझौतों या करार का मतलब होता है।
पिछले महीने एकल पीठ ने आदेश आने तक सौदे पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया था। हालांकि दिल्ली उच्च न्यायालय के खंडपीठ ने बाद में इस फैसले पर रोक लगा दी थी। यथास्थिति पर रोक लगाने के आदेश को एमेजॉन ने सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।  यह मामला अभी सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है।
जेफ बेजोस के नियंत्रण वाली एमेजॉन किशोर बियाणी की फ्यूचर से कानूनी लड़ाई लड़ रही है। एमेजॉन ने आरोप लगाया है कि फ्यूचर समूह ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ सौदा कर समझौते का उल्लंघन किया था।
पिछले साल रिलायंस को खुदरा कारोबार बेचने के लिए फ्यूचर ने सौदा किया था, जिसका एमेजॉन ने विरोध किया था। फ्यूचर लगातार कहती रही है कि उसने एमेजॉन के साथ हुए सौदे का उल्लंघन नहीं किया है।इस बीच दिल्ली उच्च न्यायालय के एक निर्णय को दी गई चुनौती से संबंधित एमेजॉन की याचिका पर अप्रैल के अंतिम सप्ताह में सुनवाई होगी। उच्च न्यायालय के एकल पीठ द्वारा यथास्थिति बनाए रखने के आदेश पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी थी।
वरिष्ठ वकील गोपाल सुब्रमण्यन ने गुरुवार को इस याचिका पर जल्द सुनवाई के लिए न्यायाधीश रोहिंटन नरीमन से चर्चा की थी। सुब्रमण्यन 22 फरवरी को उच्चतम न्यायालय के उस आदेश का हवाला दे रहे थे जिसमें एमेजॉन की याचिका पर विचार किए जाने के बाद फ्यूचर से जवाब मांगा गया था।
न्यायाधीश नरीमन की अध्यक्षता वाले पीठ ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) में कार्यवाही जारी रह सकती है, लेकिन उन्हें कोई अंतिम आदेश नहीं नहीं जारी करना चाहिए। संज्ञान में मामला लाए जाने के बाद शीर्ष न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि उसके  दिल्ली उच्च न्यायालय का खंडपीठ इस मामले पर आगे सुनवाई नहीं करेगा।
ऐसी खबर है कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए फ्यूचर रिटेल ने पिछले साल सिंगापुर मध्यस्थता न्यायाधिकरण द्वारा सौदे पर लगाई अंतरिम रोक उठाने के लिए न्यायाधिकरण में याचिका दायर की है।

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First Published - March 19, 2021 | 12:01 AM IST

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