facebookmetapixel
Advertisement
भारत की ₹28 लाख करोड़ की खेती-किसानी पर मंडरा रहा खतरा, कमजोर मानसून ने बढ़ाई देश की चिंतासिर्फ लोन बांटने की नहीं, मुनाफे वाली ग्रोथ पर फोकस; कोटक महिंद्रा बैंक पर BUY की सलाह, ₹470 का टारगेटLG, Blue Star: गर्मी और AC की बढ़ती मांग से चमक सकते हैं ये 6 शेयर, 23% तक अपसाइड के टारगेटVenezuela Earthquake: वेनेजुएला में धरती का कहर! 7.5 तीव्रता के भूकंप से मची तबाही, हजारों मौतों की आशंकासोना इस साल पहली बार 4,000 डॉलर से नीचे, चांदी भी साल के निचले स्तर परTata, Hyundai या TVS? नुवामा ने बताए लंबे समय के लिए 4 सबसे भरोसेमंद ऑटो शेयरUPI-नेट बैंकिंग फ्रॉड में राहत! RBI ने तय किया मुआवजा नियम, ग्राहकों को मिलेगा बड़ा फायदाCrude Oil: लगातार चौथे दिन टूटा कच्चा तेल, 70 डॉलर से नीचे फिसला भावबंगाल में उद्योगों की वापसी का बिगुल! BJP सरकार लाई 5,000 करोड़ रुपये की नई निवेश योजनाभारत के लिए खुशखबरी! वैश्विक बॉन्ड सूचकांकों में शामिल होने की राह अब लगभग पूरी

कहां टिकेगा कच्चा तेल

Advertisement
Last Updated- December 06, 2022 | 10:41 PM IST

कच्चा तेल कीमतों में तेजी का रोज नया रेकॉर्ड बनाता जा रहा है। कच्चे तेल की कीमतें 124.73 डॉलर प्रति बैरल तक जा पहुंची हैं और 125 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक आंकड़े से मामूली दूरी पर है।


तेल की कीमतों के बढ़ने की वजह अमेरिका में मांग की तुलना में कम आपूर्ति को बताया जा रहा है। गौरतलब है कि गर्मियों की शुरूआत के साथ ही अमेरिका में तेल की मांग में इजाफा हो जाता है।


न्यू यॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज में जून में कच्चे तेल के वायदा कारोबार में 0.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। यहां पर कच्चे तेल की कीमतें कल की तुलना में 1.04 डॉलर बढ़कर 124.73 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर जा पहुंची। पिछले साल इसी दौरान की कीमतों की तुलना में कीमतें बढ़कर लगभग दोगुनी हो गई हैं।


दूसरी ओर कच्चे तेल ने ब्रेंट को भी प्रभावित किया है। यहां पर भी जून में कच्चे तेल के वायदा कारोबार में 1.2 फीसदी का उछाल आया और कीमतें 1.41 डॉलर प्रति बैरल तक बढ़कर रेकॉर्ड 124.25 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं।


एक सरकारी रिपोर्ट में बताया गया था कि अमेरिका में रिफाइन ईंधन भंडार में कमी आई है इसके अलावा रिफाइनरियों के उत्पादन में कमी आई है। दूसरी ओर बार्कलेज कैपिटल ने कल ही संभावना जताई थी कि चीन और मध्य पूर्व में डीजल की तेज मांग अमेरिका में तेल की कीमतों को प्रभावित करेगी।


सिंगापुर में हडसन कैपिटेल एनर्जी के एशिया क्षेत्र के निदेशक जोनाथन कोर्नाफेल कहते हैं कि नाइजीरिया से निरंतर आपूर्ति के लिए आप कोई निश्चित तारीख तय नहीं कर सकते। इसके बारे में कोई भी अंदाजा लगाना बड़ा मुश्किल है। उनका कहना है कि उत्पादन के लिहाज से यह बेहद निराशाजनक है।


एक अन्य विशेषज्ञ का मानना है कि अभी जो कीमतें बढ़ रही हैं, उसमें डीजल का खास योगदान है। उनका कहना है कि नाइजीरिया से आपूर्ति प्रभावित होने की वजह से गैसोलीन और डीजल बनाने की क्षमता प्रभावित हुई है। रिफाइनरियों के रखरखाव में अधिक लागत आने और मुनाफे में कमी की वजह से रिफाइनरियों का उत्पादन प्रभावित हुआ है।


नतीजतन इस साल डीजल की आपूर्ति में कमी आई है। एक सरकारी  सूत्र ने गुरुवार को ही जानकारी दी कि रॉयल डच शेल पीएलसी के उत्पादन में कमी आई है और इसको पटरी पर लाने में अभी दो हफ्तों का समय लगेगा।

Advertisement
First Published - May 9, 2008 | 11:15 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement