डॉलर के मुकाबले रुपया बुधवार को 0.8 फीसदी गिरकर 91.71 प्रति डॉलर के नए निचले स्तर पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 91.75 डॉलर तक फिसल गया था। डीलरों के अनुसार ग्रीनलैंड लेने की अमेरिकी धमकियों और येन कैरी ट्रेड के समापन के कारण जापान के बॉन्डों की बिकवाली के चलते वैश्विक जोखिम वाले हालात और खराब हुए। इसकी वजह से शेयरों से लगातार विदेशी निकासी होने से रुपये में गिरावट आई। जानकारों का मानना है कि रुपया जल्द ही 92 प्रति डॉलर के स्तर को छू सकता है।
बाजार के जानकारों का कहना है कि केंद्रीय बैंक ने रुपये के फॉरवर्ड मार्केट में अलग-अलग अवधि के अनौपचारिक खरीद-बिक्री सौदे किए, जिससे रुपये की कीमत में और गिरावट थमी। हाजिर बाजार में सरकारी बैंकों ने आरबीआई की ओर से लगभग 1 अरब से 2 अरब डॉलर बेचे। यह बिक्री तू हुई जब रुपये का भाव 91.74 प्रति डॉलर तक गिर गया था। मंगलवार को रुपया 90.98 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
बाजार के एक प्रतिभागी ने बताया, आरबीआई ने 91.74 प्रति डॉलर पर हस्तक्षेप किया। केंद्रीय बैंक ने लगभग 1 अरब से 2 अरब डॉलर की बिक्री की। आरबीआई द्वारा विभिन्न अवधियों के लिए कुछ अनौपचारिक खरीद/बिक्री सौदे भी किए गए। इस वित्त वर्ष में यह भारतीय मुद्रा का तीसरा सबसे खराब सत्र था।
2025 में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली एशियाई मुद्रा रहने के बाद रुपया जनवरी में अब तक फिर से सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बन गई है और इसमें अभी तक करीब 2 फीसदी की गिरावट आई है। आंकड़ों के अनुसार, रुपये के फॉरवर्ड मार्केट में केंद्रीय बैंक की बकाया नेट शॉर्ट डॉलर पोजीशन नवंबर के अंत तक बढ़कर 66.04 अरब डॉलर हो गई जबकि अक्टूबर के अंत तक यह 63.6 अरब डॉलर थी।
डीबीएस बैंक इंडिया के कार्यकारी निदेशक और ट्रेडिंग प्रमुख समीर करियत ने कहा, रुपये की यह चाल आयातकों की मांग, इक्विटी की निकासी और एनडीएफ बाजार में विदेशी खरीद के कारण देखने को मिली है, क्योंकि हाजिर बाजार का भाव 91.09 के पिछले उच्चतम स्तर को तोड़ चुका है।