केंद्र सरकार ने तीन साल के लंबे अंतराल के बाद 25 लाख टन गेहूं के निर्यात की अनुमति दी है। साथ ही इसके 5 लाख टन उत्पादों के निर्यात को भी मंजूरी दी है। गेहूं निर्यात की अनुमति ऐसे समय दी गई है जब 2025-26 का खरीद सीजन अप्रैल से शुरू होने वाला है और इस सीजन में गेहूं उत्पादन लगभग 11.8 करोड़ टन के पिछले रिकॉर्ड को पार कर सकता है। सरकार ने 5 लाख अतिरिक्त चीनी निर्यात को भी अनुमति दी है।
रबी 2026 में गेहूं का रकबा भी पिछले साल के 328.04 लाख हेक्टेयर की तुलना में बढ़कर लगभग 334.17 लाख हेक्टेयर हो गया है। जो सामान्य क्षेत्र का 107 फीसदी और पिछले साल की समान अवधि से 6.13 फीसदी अधिक है। देश में गेहूं का भंडार भी पर्याप्त है। सरकार का कहना है कि 16 जनवरी 2026 तक भारत के पास गेहूं और चावल का कुल भंडार करीब 6 करोड़ टन था, जबकि बफर आवश्यकता 2.14 करोड़ टन है।
सिर्फ गेहूं की बात करें तो कारोबारियों के मुताबिक 31 मार्च 2026 तक गेहूं का क्लोजिंग स्टॉक करीब 2 करोड़ टन रहने का अनुमान है, जबकि इसकी बफर आवश्यकता 75 लाख टन है। सरकारी बयान में कहा गया है कि 2025–26 के दौरान निजी क्षेत्र के पास गेहूं का स्टॉक करीब 75 लाख टन आंका गया है, जो पिछले साल की समान अवधि से लगभग 32 लाख टन अधिक है। रोलर फ्लोर मिलर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष नवनीत चितलांगिया ने कहा कि खुले बाजार में पर्याप्त गेहूं उपलब्ध होने और जल्द मजबूत फसल आने की उम्मीद के बीच सरकार ने अतिरिक्त स्टॉक को निर्यात के जरिए बाजार में उतारने का संतुलित फैसला लिया है। इससे किसानों के हितों की रक्षा होगी और गेहूं की कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिलेगी।
सरकार का कहना है कि 1 अप्रैल 2026 तक एफसीआई के पास केंद्रीय पूल में कुल गेहूं की उपलब्धता लगभग 182 लाख टन होने का अनुमान है, जिससे निर्यात की इजाजत से घरेलू खाद्य सुरक्षा की जरूरतों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। दिल्ली के बाजार में गेहूं की कीमतें फिलहाल करीब 2,675–2,680 रुपये प्रति क्विंटल चल रही हैं, जबकि 2025-26 सीजन के लिए एमएसपी 2,585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। कारोबारी सूत्रों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय गेहूं करीब 265 डॉलर प्रति टन (करीब 2,400 रुपये प्रति क्विंटल) के आसपास बिक रहा है।
केंद्र सरकार ने मौजूदा चीनी सत्र 2025–26 के दौरान इच्छुक चीनी मिलों को अतिरिक्त 5 लाख टन चीनी निर्यात करने की इजाजत दी है। इससे पहले, सरकार ने 14 नवंबर 2025 के आदेश के जरिए मौजूदा चीनी सत्र 2025–26 के दौरान 15 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी थी।
चीनी मिलों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार 31 जनवरी 2026 तक सिर्फ़ लगभग 1.97 लाख टन चीनी निर्यात की गई है। इसके अलावा आज तक चीनी मिलों ने लगभग 2.72 चीनी निर्यात के लिए सौदे किए हैं। 5 लाख टन अतिरिक्त निर्यात की मात्रा उन चीनी मिलों को दी जाएगी जो तैयार हैं, लेकिन शर्त यह है कि उन्हें तय मात्रा का कम से कम 70 फीसदी 30 जून 2026 तक निर्यात करना होगा।
निर्यात कोटा तैयार चीनी मिलों के बीच प्रो-राटा बेसिस पर दिया जाएगा और मिलों को ऑर्डर जारी होने की तारीख से 15 दिनों के अंदर अपनी मर्ज़ी बतानी होगी। निर्यात कोटा किसी दूसरी चीनी मिल के साथ बदला नहीं जाएगा।