भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को भारी गिरावट दर्ज की गई, और बेंचमार्क सूचकांकों ने बजट दिवस के बाद की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की। शेयरों में भारी नुकसान और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कम होने से व्यापक तौर पर बिकवाली शुरू हो गई। सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) शेयरों में लगातार बिकवाली ने भी बाजार के मनोबल पर नकारात्मक असर डाला।
बीएसई सेंसेक्स 1,048 अंक यानी 1.3 फीसदी की गिरावट के साथ 82,627 पर बंद हुआ जबकि निफ्टी 336 अंक यानी 1.3 फीसदी की फिसलन के साथ 25,471 पर टिका। दोनों सूचकांकों के लिए यह 1 फरवरी के बाद की सबसे बड़ी एकदिवसीय गिरावट थी। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 7 लाख करोड़ रुपये घटकर 465 लाख करोड़ रुपये रह गया। इस साल अब तक बाजार पूंजीकरण में 10 लाख करोड़ रुपये की गिरावट आई है।
साप्ताहिक आधार पर सेंसेक्स 1.1 फीसदी और निफ्टी 0.9 फीसदी नीचे आया, जिससे भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर बनी उम्मीदों के चलते पिछले सप्ताह दर्ज की गई बढ़त का कुछ हिस्सा गायब हो गया। एचडीएफसी बैंक में 1.6 फीसदी की गिरावट आई और यह सूचकांकों पर सबसे ज्यादा दबाव डालने वाला शेयर रहा। इसके बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज में 2.1 फीसदी और आईसीआईसीआई बैंक 1.1 फीसदी की गिरावट आई। हिंदुस्तान यूनिलीवर सेंसेक्स का सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला शेयर रहा। दिसंबर तिमाही में कमजोर वॉल्यूम वृद्धि दर्ज करने के बाद इसमें 4.4 फीसदी की गिरावट आई।
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के निवेश में आई तेजी के बावजूद बाजार में गिरावट आई है, जिसने इस महीने की शुरुआत में बाजार को सहारा दिया था। एफपीआई 2025 में 1.7 लाख करोड़ रुपये और जनवरी में 35,962 करोड़ रुपये के शुद्ध बिकवाल रहे थे। अब फरवरी में फिर से शुद्ध बिकवाल बन गए। शुक्रवार को एफपीआई ने शेयरों से लगभग 7,400 करोड़ रुपये निकाल लिए। घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 5,554 करोड़ रुपये का निवेश करके इस झटके को कुछ हद तक कम किया।
इस सप्ताह की शुरुआत में अमेरिकी रोजगार के मजबूत आंकड़ों ने निवेशकों को फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कम करने के लिए प्रेरित किया, जिससे विदेशी निवेश के दृष्टिकोण पर अनिश्चितता छा गई। आर्टिफिशल इंटेलिजेंस के नेतृत्व में होने वाले व्यवधान से आईटी सेवा कंपनियों के व्यावसायिक मॉडल के प्रभावित होने की चिंताओं के बीच प्रौद्योगिकी शेयरों को भारी बिकवाली का सामना करना पड़ा। निफ्टी आईटी इंडेक्स इंट्राडे में 5.2 फीसदी तक गिर गया, लेकिन अंत में 1.4 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ। सप्ताह के दौरान, इंडेक्स में 8.2 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जो 4 अप्रैल, 2025 के बाद से इसकी सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट है।
जियोजित फाइनैंशियल सर्विसेज के अनुसंधान प्रमुख विनोद नायर ने कहा, अमेरिका-भारत व्यापार समझौते से बाजार में आए सकारात्मक बदलाव अब फीके पड़ गए हैं क्योंकि एआई-आधारित व्यवधानों के नए सिरे से बढ़ते डर ने जोखिम लेने की प्रवृत्ति पर असर डाला है। बाजार इस बात को लेकर चिंतित है कि लेबर आर्बिट्रेज मॉडल पर निर्भर भारतीय आईटी कंपनियों को नैस्डैक की अन्य कंपनियों की तुलना में अधिक प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा, इस सतर्कता का असर व्यापक बाजार पर भी पड़ा, जिससे सभी प्रमुख सूचकांक नकारात्मक दायरे में आ गए और अधिकांश क्षेत्र लाल निशान में बंद हुए। आगे चलकर निवेशक भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बारे में और अधिक जानकारी पर बारीकी से नजर रखेंगे। स्वतंत्र इक्विटी विश्लेषक अंबरीश बालिगा ने कहा, जब तक कोई प्रतिकूल वैश्विक समाचार नहीं आता, भारतीय बाज़ारों का प्रदर्शन काफी अच्छा रहना चाहिए