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सोने में फिर आने वाली है जोरदार तेजी! अक्टूबर का भाव भी छूटेगा पीछे – ब्रोकरेज ने बताया नया ऊंचा टारगेट

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एमके वेल्थ मैनेजमेंट का कहना है कि भू-राजनीतिक तनाव, कमजोर डॉलर और केंद्रीय बैंकों की खरीद से सोने की मांग बढ़ी है।

Last Updated- November 12, 2025 | 11:42 AM IST
Gold investment in India

Gold rates: सोना एक बार फिर दुनिया भर के निवेशकों का पसंदीदा सुरक्षित निवेश (Safe Haven) बन गया है। एमके वेल्थ मैनेजमेंट (Emkay Wealth Management) के अनुसार, सोना अभी भी मजबूत स्थिति में है और इसकी कीमत 4,368 से लेकर 4,600 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस तक जाने की संभावना है, जबकि नीचे 3,890 और 3,510 डॉलर पर सपोर्ट यानी सहारा मौजूद है।

अक्टूबर में सोने की कीमत 4,368 डॉलर तक पहुंची थी, जिसके बाद यह महीने के अंत तक थोड़ा गिरकर 4,000 डॉलर के नीचे आ गई। यह गिरावट पिछले एक महीने में अमेरिकी डॉलर के 1.4% मज़बूत होने की वजह से हुई। लेकिन एमके का मानना है कि लंबे समय में सोने का रुझान अब भी ऊपर की ओर है, क्योंकि संस्थागत (institutional) और केंद्रीय बैंकों (central banks) की खरीदारी लगातार बनी हुई है, और डॉलर पिछले एक साल में कमजोर हुआ है।

क्यों बढ़ रही है सोने की मांग?

एमके वेल्थ के मुताबिक, पूर्वी यूरोप और पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और तनाव की वजह से लोग अपना पैसा सुरक्षित जगह, यानी सोने में निवेश कर रहे हैं। इसके अलावा, पिछले एक साल में अमेरिकी डॉलर की कीमत करीब 8% गिर गई है, जिससे सोना और दूसरी चीजें (कमोडिटीज) महंगी हो गई हैं।

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केंद्रीय बैंक और बड़े निवेशकों की बड़ी खरीदारी

एमके की रिपोर्ट के अनुसार, इस साल अब तक सोने से जुड़े फंड्स (ETFs) में लगभग 65 अरब डॉलर का निवेश हुआ है। इनमें से 20 अरब डॉलर सिर्फ पिछले तीन महीनों में लगाए गए हैं। दुनिया के कई केंद्रीय बैंक अब अपने विदेशी भंडार में डॉलर की हिस्सेदारी कम करके सोना खरीद रहे हैं, ताकि आर्थिक अनिश्चितता से बचा जा सके।

रिपोर्ट कहती है कि यह एक नया निवेश रुझान है, जहां देश और बड़े संस्थान अब अमेरिकी बॉन्ड और डॉलर के बजाय दूसरे विकल्प ढूंढ रहे हैं, क्योंकि उन्हें सरकारी कर्ज, बढ़ती महंगाई और वैश्विक तनाव की चिंता है।

फिर बढ़ी सेफ-हेवन की मांग

यूक्रेन और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, दुनिया की धीमी अर्थव्यवस्था और लगातार बढ़ती महंगाई की वजह से सोने की मांग और बढ़ गई है। अब ज़्यादातर निवेशक सोने को अपनी पूंजी सुरक्षित रखने का जरिया मान रहे हैं। कई देशों के केंद्रीय बैंक अब ब्याज दरें बढ़ाना बंद कर चुके हैं, लेकिन महंगाई अभी भी ज़्यादा है। ऐसे हालात में असली (वास्तविक) ब्याज दरें बहुत कम या शून्य के करीब रह सकती हैं, जिससे सोने में निवेश और फायदेमंद लगने लगा है।

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Gold rates पर तकनीकी नजरिया: क्या आगे भी बढ़ेगा सोना?

एमके वेल्थ का कहना है कि सोने की कीमत कुछ समय तक 4,000 डॉलर के आसपास टिक सकती है, जिसके बाद इसमें फिर तेजी देखने को मिल सकती है। ब्रोकरेज के अनुसार, 4,368 और 4,600 डॉलर संभावित ऊपरी टारगेट (resistance) हैं, जबकि 3,890 और 3,510 डॉलर लंबे समय के निवेशकों के लिए बेहतर खरीद स्तर (accumulation zones) हैं।

एमके की सलाह है कि निवेशक अपनी मौजूदा होल्डिंग बनाए रखें और गिरावट पर खरीदारी करें, क्योंकि सोने की लंबी अवधि की स्थिति मजबूत बनी हुई है।

क्यों जारी रह सकती है सोने की चमक?

  • कमजोर डॉलर: पिछले एक साल में अमेरिकी डॉलर 8% गिरा है, जिससे गैर-डॉलर निवेशकों के लिए सोना सस्ता हुआ।
  • मुद्रास्फीति का डर: महंगाई और आर्थिक असंतुलन की चिंताओं से सोना बचाव का जरिया बना है।
  • केंद्रीय बैंक की खरीद: कई विकासशील देश अपने रिजर्व में डॉलर की जगह सोना जोड़ रहे हैं।
  • ETF में रिकॉर्ड निवेश: 2025 में 65 अरब डॉलर की इनफ्लो सोने में बढ़ते भरोसे को दिखाती है।
  • भू-राजनीतिक तनाव: यूरोप और पश्चिम एशिया की अस्थिरता ने सेफ-हेवन संपत्तियों की मांग बढ़ाई है।

विश्लेषकों का कहना है कि सोना अभी भी लंबी अवधि के निवेश के लिए आकर्षक संपत्ति है। वित्तीय सलाहकार आमतौर पर कुल निवेश पोर्टफोलियो का 10–15% हिस्सा सोने में रखने की सलाह देते हैं। चाहे वह ETF, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) या फिजिकल गोल्ड के रूप में हो।

एमके वेल्थ का साफ संदेश है, “जो निवेशक पहले से सोने में पैसा लगाए हुए हैं, वे अपनी पोजिशन बनाए रखें और हर गिरावट पर थोड़ा-थोड़ा खरीदते रहें।” 2026 की ओर बढ़ते हुए, संस्थागत निवेश और वैश्विक अस्थिरता के बीच सोने की चमक फिलहाल फीकी पड़ने वाली नहीं लगती।

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First Published - November 12, 2025 | 11:25 AM IST

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