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कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी

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Last Updated- December 08, 2022 | 12:05 AM IST

बैंकों में अमेरिकी द्वारा 250 अरब डॉलर निवेश किए जाने की योजना आर्थिक विकास के लिए पर्याप्त होगी और इससे ईंधन की मांग में तेजी आएगी, इसमें संशयता के कारण कच्चे तेल की कीमतें कम होकर 78 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गईं।


ऋण संकट के गहराने के कारण तेल, जिसने इक्विटी बाजार की गतिविधियों का अनुसरण किया, की कीमतों में यूरोपीय बाजार में गिरावट आने की साथ ही कमी आई। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी और अमेरिकी ऊर्जा विभाग ने तेल की वैश्विक मांग संबंधी भविष्यवाणियों में अगले साल के लिए कटौती की है क्योंकि साल 1930 के बाद आए इस प्रकार का वित्तीय संकट वैश्विक मंदी में बदल सकती है।

लंदन के एमएफ ग्लोबल लिमिटेड के वरिष्ठ दलाल रॉबर्ट लॉगलिन ने कहा, ‘अधिकंश वैश्विक अर्थव्यवस्थाएं स्वीकार कर रही हैं कि आर्थिक मंदी आने की संभावना है। और तो और चीन के विकास की संभावनाएं भी चर्चा का विषय बन गया है।’न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज पर नवंबर डिलिवरी वाले कच्चे तेल की कीमतों में 1.15 प्रतिशत की कमी आई और इसका कारोबार 77.45 डॉलर पर किया जा रहा था।

लंदन समयानुसार 10.00 बजे इसका कारोबार 78.04 डॉलर प्रति बैरल के हिसाब से किया जा रहा था। वर्तमान कीमत एक साल पहले की कीमतों से 9.8 प्रतिशत कम है। 11 जुलाई के रेकॉर्ड 147.27 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से अब तक इसमें 46 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है।

कच्चे तेल की कीमतों में कल 3.2 प्रतिशत की गिरावट आई और इसकी कीमत प्रति बैरल 78.63 डॉलर रही। ब्लूमबर्ग न्यूज सर्वे में विश्लेषकों द्वारा दी गई राय के अनुसार, सरकारी रिपोर्ट कल यह प्रदर्शित कर सकता है कि अमेरिकी कच्चे तेल और गैसोलिन के भंडार में पिछले सप्ताह बढ़ोतरी हुई है।

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First Published - October 15, 2008 | 11:52 PM IST

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