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कपास की बढ़ती कीमतों की मार झेल रही हैं कंपनियां

Last Updated- December 05, 2022 | 9:40 PM IST

शॉर्ट स्टैपल कॉटन के कम उत्पादन की वजह से डेनिम कपड़े बनाने वाली कंपनियों के मुनाफे में कटौती हो सकती है।


कम उत्पादन की वजह से शार्ट स्टैपल कॉटन की कीमतों में 20 फीसदी की बढोतरी हो गई है। शार्ट स्टैपल कॉटन डेनिम कपड़े बनाने में काम आने वाला प्रमुख फैब्रिक है। ऐसे में इसकी कीमतें बढ़ने से इस उद्योग से जुड़ी कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ना तय है।


वैसे तो पूरा कपडा उद्योग कॉटन की बढ़ती कीमतों से परेशान है, डेनिम कंपनियों को दूसरी समस्या से दो चार होना पड़ रहा है। मीडियम स्टैपल कॉटन,उसमें भी खासतौर पर बीटी कॉटन के उत्पादन में बढोतरी हुई है लेकिन पिछले तीन साल से शार्ट स्टैपल कॉटन के उत्पादन में कमी आई है।


देश में 2006-07 में शार्ट स्टैपल कॉटन का 80 लाख बेल्स का उत्पादन हुआ था जिसका मतलब है कि 2007-08 में इसके उत्पादन में लगभग 50 फीसदी की कमी आई और इसका उत्पादन 40 लाख टन तक पहुंच गया। अरुण दलाल एंड कंपनी के अरुण दलाल कहते हैं,’उत्पादन में कमी का तो अनुमान है।


दुनियाभर में शार्ट स्टैपल कॉटन का उत्पादन गिरा है। अमेरिका, रूस और उज्बेकिस्तान दुनिया में शार्ट स्टैपल कॉटन का उत्पादन करने वाले प्रमुख देशों में से  हैं।’भारत में कॉटन के 70 फीसदी उत्पादन में 70 फीसदी हिस्सा मीडियम स्टैपल किस्म का है। दरअसल कम उत्पादन ने कीमतों को और ऊपर ले जाने में खास भूमिका निभाई है।


बाजार में शार्ट स्टैपल कॉटन की कीमतें 17,000 से 18,000 रुपये प्रति कैंडी के स्तर पर पहुंच गई हैं जबकि पिछले साल इसकी कीमत 14,000 रुपये प्रति कैंडी थी। भारत में कर्नाटक, गुजरात और पंजाब राज्यों में इसका उत्पादन किया जाता है। 


देश में शार्ट स्टैपल कॉटन की कल्याण वी-797, जे-34, एफ-414 और बंगाल देशी किस्म मिलती हैं। पिछले कुछ महीनों में कॉटन की कीमतों में 30 से 40 फीसदी का इजाफा हुआ है और शार्ट स्टैपल कॉटन भी इस बढोतरी से नहीं बच पाया है।

First Published - April 15, 2008 | 9:10 PM IST

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