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केले के रेशों से बन सकेगा कपड़ा

Last Updated- December 07, 2022 | 6:06 PM IST

केले के रेशे से बुने कपड़े फैशन की दुनिया में धूम मचा सकते हैं। इस काम को सफल बनाने के लिए राष्ट्रीय केला अनुसंधान संस्थान (एनआरसीबी) शोध कार्य में जुटा है। इसके लिए तो संस्थान ने बकायदा मुंबई स्थित केंद्रीय कपास तकनीक संस्थान से समझौता किया है।


उम्मीद है कि इस दिशा में किए जा रहे प्रयास जल्द ही रंग लाएंगे। रेशे गलाने की प्रक्रिया में सुधार कर उम्दा क्वालिटी के रेशों का उत्पादन करने के लिए एनआरसीबी और केंद्रीय कपास तकनीक संस्थान साथ-साथ मिलकर काम करेगा। केले के रेशों में गैर-हानिकारक रसायनों को मिलाकर लंबे और मजबूत रेशे तैयार करने की दिशा में काम चल रहा है।

एनआरसीबी के निदेशक डॉ. एम.एम. मुस्तफा ने कहा कि केले के तने से निकाले गए रेशे कमजोर होते हैं और इनसे लंबे रेशे नहीं निकाले जा सकते। उन्होंने कहा कि एनआरसीबी ने फिलिपींस और पश्चिम एशिया से केले के पेड़ों की विशेष किस्में हासिल की हैं जिनमें केवल रेशे होते हैं। इसमें फल या फूल नहीं होते।

रेशे के लंबी अवधि तक टिकाऊपन, रंग-रोगन और सिलने की क्षमता जैसी जांच करने के बाद ही प्रौद्योगिकी को वाणिज्यिक उत्पादन के लिए हस्तांतरित किया जा सकता है। एनआरसीबी के वैज्ञानिक एक ऐसा तरीका खोजने में लगे हैं जिसके जरिए केले के तने से निकाले गए रस को पाउडर के रूप में तब्दील किया जा सके ताकि इसका इस्तेमाल पथरी जैसी बीमारियों का इलाज करने में हो सके।

एक बार सफलता मिलने पर इस प्रौद्योगिकी को फार्मा कंपनियों को हस्तांतरित किया जा सकेगा। एनआरसीबी ने केले के छिलके से शराब निकालने की भी पेटेंट प्रौद्योगिकी विकसित की है। इसके लिए उसने महाराष्ट्र में बेलगांव स्थित एक समूह से गठजोड़ किया है। यहां केले से बनी शराब का वाणिज्यिक उत्पादन किया जाएगा।

मुस्तफा ने बताया कि उनका संस्थान पहले ही केले के 12 मूल्य वर्द्धित खाद्य सामग्रियों को विकसित कर चुका है। उनके मुताबिक, इनमें से 6 का कारोबार करने के लिए औद्योगिक इकाइयों को सुपुर्द भी किया जा चुका है। इन खाद्य पदार्थों में इसके फूलों से तैयार होने वाला चिप्स और अचार, केले की सब्जी, केले का पाउडर, केले का जूस, जैम और केचअप शामिल हैं।

एनआरसीबी केले की दो किस्में तैयार करने की कोशिश में हैं। इसके लिए विभिन्न केंद्रों पर इसका परीक्षण किया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि इस किस्म को संक्रमण से कोई खतरा नहीं होगा। केंद्र ऐसा केला तैयार करने का प्रयास कर रहा है जो पकने में काफी वक्त ले ताकि इसे दूर-दूर तक आसानी से ढोया जा सके।

First Published - August 23, 2008 | 4:49 AM IST

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