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चावल निर्यात पर पाबंदी नवंबर तक

Last Updated- December 07, 2022 | 3:02 PM IST

भारत सरकार ने आज कहा कि चावल और अन्य खाद्यान्न के निर्यात पर लगा प्रतिबंध नवंबर के अंत तक जारी रहेगा और इसकी समीक्षा नई फसल के आने के बाद की जाएगी।


सीआईआई के एक समारोह में वाणिज्य सचिव जी के पिल्लई ने कहा, ‘जब तक नई फसल नहीं आती है तब तक जो पाबंदियां लगाई गई हैं वह यथावत बनी रहेंगी। संभवत: नवंबर के अंत तक। चावल की फसल आने के बाद हमें सही स्थिति की जानकारी मिलेगी।’

विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी की अध्यक्षता वाले आधिकारिक मंत्रियों के समूह की कल बैठक हो रही है  जिसमें उत्पादन से जुड़ी परिस्थितियों, भंडार और खुले बाजार में कीमतों की समीक्षा की जाएगी। जन वितरण प्रणाली के लिए भंडार की उपलब्धता की समीक्षा भी की जाएगी।

सरकार ने गैर-बासमती चावल, गेहूं, मक्का और दालों के निर्यात पर पाबंदी लगा दी थी ताकि घरेलू बाजार में इन जिंसों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके साथ ही महंगाई जो 12 प्रतिशत के स्तर पर आ पहुंचा है उसे नियांत्रित करने में मदद मिल सके। हालांकि, चावल के निर्यातकों की मांग है कि गैर-बासमती चावल के निर्यात पर लगी पाबंदी को नरम किया जाए और उन लोगों ने सुझाव दिया है कि केंद्र सरकार परिमाण की सीमा तय कर दे ताकि घरेलू बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे।

साल 2007-08 में देश में रेकॉर्ड 964.3 लाख टन चावल का उत्पादन हुआ था। सरकार की चौथी अग्रिम भविष्यवाणी के अनुसार गेहूं के 584 लाख टन उत्पादन की उम्मीद है। कुछ जगहों को छोड़ कर गेहूं की कीमतें स्थिर रही हैं। सरकार इन शहरों में खुले बाजार में गेहूं बेचने की योजना बना रही है ताकि मूल्य को नियंत्रित किया जा सके।

First Published - August 4, 2008 | 11:52 PM IST

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