भारत में तपेदिक (टीबी) और वेक्टर जनित संक्रमण जैसी संक्रामक बीमारियां (सीडी) अभी भी बनी हुई हैं। इसके साथ ही हृदय रोग, मधुमेह और मोटापे जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां बढ़ रही हैं। आर्थिक समीक्षा में इस स्थिति को लेकर चिंता जताई गई है। इसमें कहा गया है कि भारत इस समय महत्त्वपूर्ण और जटिल दौर से गुजर रहा है। संक्रामक और गैर संक्रामक बीमारियों के बढ़ते बोझ से सामाजिक असमानता में इजाफा हो रहा है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश समीक्षा में कहा गया है, ‘हाल के आंकड़ों से पता चलता है कि देश में होने वाली कुल मौतों में गैर संचारी बीमारियों (एनसीडी) की हिस्सेदारी 57 प्रतिशत से अधिक है।’ उदाहरण के लिए हृदय रोग पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए मृत्यु का प्रमुख कारण रहा है, जिसमें पुरुषों का अनुपात अधिक है।
इसमें कहा गया है, ‘हृदय रोग से मरने वालों में महिलाओं की तुलना में पुरुषों की संख्या अधिक है। लेकिन इलाज की सुविधा न मिल पाने और समय से बीमारी का पता न चलने के कारण होने वाली मृत्यु के मामले में महिलाओं की स्थिति खराब हो सकती है।’
रिपोर्ट में कहा गया है कि अस्वास्थकर भोजन, जीवन शैली में बदलाव और पर्यावरण संबंधी वजहों से मोटापा बहुत तेजी से भारतीयों के स्वास्थ्य के लिए चुनौती बनता जा रहा है।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) 2019-21 के अनुसार भारत में कम से कम 24 प्रतिशत महिलाओं और 23 प्रतिशत पुरुषों का वजन मानक से अधिक है और वे मोटापे के शिकार हैं।
15 से 49 साल की महिलाओं में 6.4 प्रतिशत मोटी हैं, जबकि इस आयुवर्ग में 4 प्रतिशत पुरुष मोटे हैं। समीक्षा में कहा गया है, ‘सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि 5 साल से कम उम्र के बच्चों में मोटापा बढ़ा है और 2015-16 के 2.1 प्रतिशत की तुलना में 2019-20 में 3.4 प्रतिशत बच्चे मोटापे के शिकार हुए हैं।’
अनुमान के मुताबिक 2020 में 3.3 करोड़ से अधिक बच्चे मोटापे के शिकार थे और 2035 तक ऐसे बच्चों की संख्या बढ़कर 8.3 करोड़ हो जाने का अनुमान है। समीक्षा में कहा गया है कि अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड की बढ़ती खपत मोटापे की प्रमुख वजह है।
अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड की बिक्री के मामले में भारत सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक है। इसकी खुदरा बिक्री 2006 के 0.9 अरब डॉलर से 40 गुना बढ़कर 2019 में 38 अरब डॉलर पर पहुंच चुकी है। इस दौरान पुरुषों और महिलाओं में मोटापा बढ़कर करीब दोगुना हो चुका है।
इस समस्या से निपटने के लिए अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड पैक या अधिक फैट, चीनी और नमक (एचएफएसएस) वाले उन खाद्य पदार्थों के पैकेट पर चेतावनी लेवल लगाए जाने चाहिए, जिन्हें शिशु और बच्चे खाते हैं, क्योंकि ये खाद्य पदार्थ इस समय नियमन के दायरे में नहीं हैं।