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Economic Survey 2026: क्रॉस-सब्सिडी और नवीकरणीय निवेश बाधाएं बनीं ऊर्जा क्षेत्र की रफ्तार में रोड़ा

क्रॉस सब्सिडी के कारण घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं को मिलने वाली सस्ती बिजली की भरपाई औद्योगिक व वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को करनी पड़ती है और उन्हें ज्यादा शुल्क देना पड़ता है

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सुधीर पाल सिंह   
Last Updated- January 29, 2026 | 11:13 PM IST

आर्थिक समीक्षा में भारत के ऊर्जा क्षेत्र की वृद्धि की राह की 2 प्रमुख बाधाओं को दूर करने पर जोर दिया गया है। इनमें बिजली आपूर्ति में बहुत ज्यादा क्रॉस-सब्सिडी और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं से जुड़ी प्रमुख सामग्री और पूंजी से जुड़ा मसला शामिल है।

क्रॉस सब्सिडी के कारण घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं को मिलने वाली सस्ती बिजली की भरपाई औद्योगिक व वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को करनी पड़ती है और उन्हें ज्यादा शुल्क देना पड़ता है। इस ढांचे के तहत श्रेणीवार सब्सिडी मिलती है। इसमें उद्योगों को आपूर्ति की औसत कीमत से अधिक शुल्क का भुगतान करना पड़ता है, जबकि घरेलू व कृषि उपभोक्ता कम भुगतान करते हैं।

समीक्षा में कहा गया है, ‘बिजली दरों को तार्किक बनाने के लिए संतुलित दृष्टिकोण की जरूरत है। इसमें सब्सिडी की दरों को चरणबद्ध तरीके से तर्कसंगत बनाना शामिल है। इसमें स्वैच्छिक और श्रेणी के आधार पर सब्सिडी से बाहर करना शामिल हो सकता है।’

बिजली अधिनियम के प्रावधानों के मुताबिक राज्य बिजली नियामक आयोगों के लिए धीरे धीरे बिजली शुल्कों में क्रॉस सब्सिडी कम करना जरूरी है, जिससे यह आपूर्ति की लागत में नजर आए। बहरहाल कुछ राज्यों की शुल्क नीति में कुछ विशेष श्रेणियों के लिए बिजली की औसत लागत से 20 प्रतिशत कम या अधिक दरों का प्रावधान किया गया है।

समीक्षा में कहा गया है कि इससे निपटने के लिए सरकार ने पिछले महीने विद्युत (संशोधन) विधेयक, 2025 पेश किया, ताकि गहके तक पैठी अक्षमताओं को दूर किया जा सके, बिजली क्षेत्र पर वित्तीय दबाव कम किया जा सके, प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दिया जा सके और बिजली वितरण क्षेत्र में नेटवर्क लागत को अनुकूल बनाया जा सके।

विधेयक का उद्देश्य क्रॉस-सब्सिडी को तर्कसंगत बनाकर, लागत के अनुकूल शुल्क को बढ़ावा देकर और औद्योगिक उपयोगकर्ताओं को सीधी बिजली खरीद में सक्षम बनाकर मौजूदा बाजार ढांचे को बदलना है। इसमें यह अनिवार्य है कि बिजली की आपूर्ति की लागत के मुताबिक दरें होनी चाहिए और विनिर्माण उद्यमों, रेलवे और मेट्रो रेलवे द्वारा भुगतान की जाने वाली क्रॉस-सब्सिडी को 5 वर्षों के भीतर समाप्त किया जाना चाहिए।

First Published : January 29, 2026 | 10:56 PM IST