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कंपनियों को बजट छूट से पूंजीगत व्यय बढऩे की उम्मीद

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Last Updated- December 11, 2022 | 9:46 PM IST

भारतीय कंपनियों को उम्मीद है कि केंद्रीय बजट में उदार कर रियायतें दी जाएंगी जिससे उन्हें आगामी वर्षों में क्षमता निर्माण में और अधिक निवेश करने में मदद मिलेगी।
मुख्य कार्याधिकारियों का कहना है कि एक ओर जहां स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन से संबद्घ योजनाएं एक अच्छी शुरुआत हैं वहीं सरकार को उपभोक्ता मांग को बढ़ावा देने के लिए भी कदम उठाने की जरूरत है जिसमें कि उत्साहजनक संकेत नजर नहीं आ रहे हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से जारी आंकड़ों से पता चलता है कि महामारी से प्रभावित मार्च 2021 में समाप्त वित्त वर्ष में भारतीय बैंकों ने 220 परियोजनाओं के लिए 75,558 करोड़ रुपये के ऋण मंजूर किए। इस प्रकार इसमें रिकॉर्ड स्तर की कमी आई। इससे चालू वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में इस क्षेत्र में कोई खास तेजी के संकेत नहीं मिलते हैं।      
रिजर्व बैंक की ओर से जारी आंकड़ों से पता चलता है कि मार्च 2020 में समाप्त वित्त वर्ष में बैंकों ने 320 परियोजनाओं के लिए 2 लाख करोड़ रुपये के ऋण स्वीकृत किए जबकि वित्त वर्ष 2019 में बैंकों ने 409 परियोजनाओं के लिए 1.75 लाख करोड़ रुपये मंजूर किए थे। कंपनियों की ओर से ताजे निवेश को रोक कर रखने के पीछे की मुख्य वजह उपभोक्ताओं द्वारा मांग की कमी बताई जा रही है।
एक विद्युत उत्पादक कंपनी के मुख्य कार्याधिकारी ने पहचान जाहिर नहीं करने की शर्त पर कहा, ‘सरकार को बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं के लिए कम लागत वाली पूंजी पर ध्यान देना चाहिए और घरेलू खर्च को बढ़ावा देने के लिए कॉर्पोरेट और व्यक्तिगत करों को कम करना चाहिए।’  
कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के कारण देश के कई हिस्सों में विभिन्न प्रकार के प्रतिबंध लगाए गए जिससे भारतीय विनिर्माण क्षेत्र में क्षमता उपयोगिता बुरी तरह से प्रभावित हुई। हालांकि, इसका  असर वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही के दौरान लॉडकाउन और दूसरे प्रतिबंधों कारण उत्पन्न हुए असर से कम भयानक रहा। रिजर्व बैंक के मुताबिक समग्र स्तर पर विनिर्माण क्षेत्र के लिए क्षमता उपयोगिता वित्त वर्ष 2021-22 की पहली तिमाही में घटकर 60 फीसदी रह गई जो कि उससे पिछली तिमाही में 69.4 फीसदी दर्ज की गई थी।  
जब तक क्षमता उपयोगिता 75-80 फीसदी की सीमा के पार नहीं जाती है भारतीय कंपनियां क्षमता बढ़ाने में निवेश नहीं करेंगी। बल्कि कंपनियां नई पयिोजनाओं की घोषणा की जगह ऋणों और अन्य देनदारियों को समय से पहले चुकता करने को प्राथमिकता दे रही हैं।
पिछले एक वर्ष में रिलायंस इंडस्ट्रीज, अदाणी समूह और टाटा समूह जैसे शीर्ष समूहों ने सेमीकंडक्टर संयंत्रों में निवेश योजनाओं की घोषणा की। इनके अलावा क्षमता बढ़ाने की घोषणा करने के लिए अधिक संख्या में कंपनियां सामने नहीं आई हैं।
मुख्य कार्याधिकारियों का कहना है कि सरकार को उपभोक्ताओं के लिए खासकर ग्रामीण भारत से मांग को बढ़ावा देना चाहिए जो कि जोर नहीं पकड़ रहा है। कोलकाता स्थित एक समूह के कार्याधिकारी ने कहा, ‘सरकार को निश्चित तौर पर पिरामिड के निचले हिस्से तक धन के प्रभाव को सुनिश्चित करना चाहिए और रोजाना मजदूरी करने वालों के लिए मौके सृजित करना चाहिए।’
वित्त वर्ष 2022 में पूंजीगत व्यय का जोर विशेष तौर पर सड़कों, रेलवे, आवास और ग्रामीण तथा शहरी बुनियादी ढांचे पर रहेगा। सरकार राज्यों को पूंजीगत व्यय बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन की भी पेशकश कर सकती है। विशेष तौर पर ऐसा इसलिए किया जा सकता है कि संभवत: वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) क्षतिपूर्ति नियम समाप्त होने से राज्यों की राजस्व क्षमता को धक्का लग सकता है।
रियल एस्टेट कंपनी हीरानंदानी ग्रुप के प्रबंध निदेशक निरंजन हीरानंदानी कहते हैं कि आगे किसी भी मंदी को रोकने के लिए बजट में महत्त्वपूर्ण कदम नीति की घोषणा की जानी चाहिए।    

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First Published - January 23, 2022 | 11:17 PM IST

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