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Budget Trivia: भारत में इस वित्त मंत्री ने पेश किया था बजट, बाद में बना पाकिस्तान का PM

लियाकत अली खान ने 1947 में पेश किया ‘गरीबों का बजट’, जो आज भी बजट इतिहास में याद किया जाता है।

Last Updated- January 14, 2026 | 3:44 PM IST
Liaquat Ali Khan
Liaquat Ali Khan presented the Interim Budget on Feb 28, 1947.

Budget Trivia: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी 2026 को संसद में अपने बजट भाषण के माध्यम से नए वित्त वर्ष के लिए सरकार की आर्थिक रूपरेखा पेश करेंगी। यह दिन विशेष इसलिए है क्योंकि इस बार बजट का दिन रविवार पड़ रहा है। बजट में सरकार की आगामी नीतियों, खर्चों और आर्थिक सुधारों के प्रस्ताव शामिल होंगे, जो देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम साबित होंगे।

इतिहास में जब हम बजट की झलक देखते हैं, तो कई दिलचस्प बातें सामने आती हैं। कुछ वित्त मंत्रियों ने पहली बार बजट पेश किया, कुछ ने अपने जन्मदिन पर इसे पेश किया, तो कुछ ने रिकॉर्ड तोड़ भाषण दिए। वहीं, कोई ऐसे भी था जिसने कभी भारत का बजट पेश किया था, लेकिन बाद में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बन गया।

सबसे ‘जनप्रिय बजट’ कौन सा था?

इतिहासकारों के अनुसार, सबसे जनप्रिय बजट वह था जिसे 28 फरवरी 1947 को लियाकत अली खान (Liaquat Ali Khan) ने पेश किया था। वह उस समय अंतरिम सरकार के वित्त मंत्री थे, जिसमें कांग्रेस और मुस्लिम लीग दोनों शामिल थीं। इस बजट को उन्होंने ‘गरीबों का बजट’ और ‘सामाजिक बजट’ कहा।

इस बजट के तहत लियाकत अली खान ने नमक पर लगाए गए उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्क को हटा दिया, जो उस समय औपनिवेशिक दमन (colonial oppression) का प्रतीक था। साथ ही, आयकर की न्यूनतम सीमा भी 2,000 रुपए से बढ़ाकर 2,500 रुपए कर दी गई। इस कदम से गरीबों को राहत देने का खर्च लगभग 9 करोड़ रुपए और उच्च आयकर सीमा बढ़ाने पर 25 लाख रुपए का बोझ सरकार ने उठाया।

विभाजन के बाद पाकिस्तान गए लियाकत अली खान

1947 में भारत के विभाजन के बाद लियाकत अली खान पाकिस्तान चले गए और वहां के पहले प्रधानमंत्री बने। वे मुस्लिम लीग के वरिष्ठ नेता और मोहम्मद अली जिन्ना के करीबी भी थे। स्वतंत्र भारत में वे उत्तर प्रदेश के मेरठ और मुजफ्फरपुर से चुनाव लड़ते थे, जबकि उनका जन्म अविभाजित पंजाब के करनाल में हुआ था।

इस ऐतिहासिक पल ने यह साबित कर दिया कि बजट केवल आर्थिक दस्तावेज नहीं, बल्कि समाज और देश की दिशा तय करने वाला एक शक्तिशाली उपकरण होता है।

First Published - January 14, 2026 | 3:44 PM IST

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