facebookmetapixel
Advertisement
Explainer: समुद्र में तैरती गैस फैक्ट्री! कैसे फ्लोटिंग LNG बदल रही है दुनिया में गैस की सप्लाई का खेल?MP Economic Survey: मध्य प्रदेश की आर्थिक समीक्षा पेश, 16.69 लाख करोड़ रुपये पहुंचा जीएसडीपीभारत में तेजी से विकसित हो रहा है ड्रोन इकोसिस्टम, 38,500 से ज्यादा ड्रोन रजिस्टर्ड‘AI बनेगा विकसित भारत 2047 का आधार’, धर्मेंद्र प्रधान ने युवाओं को दी AI अपनाने की सलाहExplainer: AI से खेती का समाधान! किसानों के लिए वरदान कहा जा रहा Bharat-VISTAAR क्या है?मुंबई में मिले मोदी-मैक्रों: द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा और 26/11 के शहीदों को दी श्रद्धांजलिPSU Banks पर म्युचुअल फंड्स बुलिश, जनवरी में निवेश 3 साल के हाई पर; SBI को सबसे ज्यादा फायदाबिहार को IT हब बनाने की कोशिश? CIPL के साथ सरकार ने किया MoU साइन, खुलेगा वर्ल्ड-क्लास AI सेंटरदिल्ली में अब जमीन का भी ‘आधार’: 14 अंकों के इस डिजिटल नंबर से कैसे बदल जाएगी प्रॉपर्टी की दुनिया?पोर्टफोलियो में मुनाफा का रंग भर देगा ये Paint Stock! नतीजों के बाद ब्रोकरेज ने 42% अपसाइड का दिया टारगेट

Budget 2025: आम लोगों के लिए ‘आयकर में राहत’ पर क्या कहती है Barclays की रिपोर्ट

Advertisement

नई कर व्यवस्था में 3 लाख रुपये तक की आय पर छूट दी गई है। 3-7 लाख रुपये सालाना कमाने वालों को 5 प्रतिशत कर देना होगा, 7-10 लाख रुपये (10 प्रतिशत)।

Last Updated- January 24, 2025 | 9:20 AM IST
Barclays

वित्तीय सेवा प्रदाता बार्कलेज (Barclays) ने बृहस्पतिवार को कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में सरकार को खपत और मांग को बढ़ावा देने के लिए व्यक्तिगत आयकर में ‘असरदार’ कटौती की घोषणा करनी चाहिए। बार्कलेज ने एक फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट से पहले कहा कि इस बजट से मुख्य मांग राजकोषीय मजबूती की राह पर चलने के साथ आर्थिक वृद्धि को समर्थन देने की है।

‘आम लोगों को आयकर राहत’  पर Barclays Report ने क्या कहा

बार्कलेज को उम्मीद है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण नई कर व्यवस्था के प्रावधानों में बदलावों का ऐलान करेंगी जिससे यह अधिक करदाताओं के लिए आकर्षक बन जाएगी। पिछले बजट में सरकार ने नई कर व्यवस्था के तहत वेतनभोगी करदाताओं के लिए मानक कटौती को बढ़ाकर 75,000 रुपये और पेंशनभोगियों के लिए पारिवारिक पेंशन पर कटौती को बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया था, जो करों की कम दर प्रदान करता है।

बार्कलेज ने कहा कि मुद्रास्फीति नियंत्रित करते हुए खर्च-योग्य आय और क्रय शक्ति को बढ़ावा देने का एक और संभावित विकल्प ईंधन के लिए उत्पाद शुल्क में कटौती हो सकता है। कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में कमी के बावजूद ईंधन की खुदरा कीमतें 2022 से ही लगभग स्थिर बनी हुई हैं। इसके साथ ही बार्कलेज ने कहा कि बजट में सीमा शुल्क की घोषणाएं अमेरिका में ट्रंप प्रशासन आने के बाद शुल्क को लेकर सरकार की प्रतिक्रिया को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण होंगी।

बार्कलेज की मुख्य अर्थशास्त्री (भारत) (Barclays India’s Chief Economist) आस्था गुडवानी ने एक बयान में कहा कि उपभोग को समर्थन देने के प्रयास में वित्त मंत्री को कर स्लैब में बदलाव कर व्यक्तिगत आयकर दर में ‘असरदार’ कटौती करनी चाहिए। ऐसा करने से राजकोषीय लागत ज्यादा बढ़ने की आशंका नहीं है। “इस घोषणा के तहत कर में उछाल से राजस्व में आई कमी की भरपाई हो जाएगी। हमें लगता है कि खपत को बढ़ावा देने की जरूरत है, खासकर निजी निवेश के साथ जो अब मांग में वृद्धि का इंतजार कर रहा है।”

पिछले बजट में, सरकार ने वेतनभोगी करदाताओं के लिए मानक कटौती को बढ़ाकर 75,000 रुपये कर दिया था, और पेंशनभोगियों के लिए पारिवारिक पेंशन पर कटौती को नई कर व्यवस्था के तहत 25,000 रुपये कर दिया था, जो करों की कम दर प्रदान करती है। नई कर व्यवस्था में 3 लाख रुपये तक की आय पर छूट दी गई है। 3-7 लाख रुपये सालाना कमाने वालों को 5 प्रतिशत कर देना होगा, 7-10 लाख रुपये (10 प्रतिशत), 10-12 लाख रुपये (15 प्रतिशत), 12-15 लाख रुपये (20 प्रतिशत) और 15 लाख रुपये से अधिक (30 प्रतिशत)।

राजकोषीय घाटे पर क्या कहती है Barclays’ Report

बार्कलेज को उम्मीद है कि सरकार चालू वित्त वर्ष के लिए राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को 20 आधार अंकों से अधिक प्राप्त करेगी, जो कि सकल घरेलू उत्पाद का 4.7 प्रतिशत होगा और 2025-26 का घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 4.5 प्रतिशत या लगभग 16.3 लाख करोड़ रुपये होगा। वित्त वर्ष 20-21 में महामारी के आने के बाद से ही इन नियमों को स्थगित रखा गया है, सरकार ने केवल वित्त वर्ष 25-26 के लिए राजकोषीय घाटे के लक्ष्य की रूपरेखा तैयार की है। बार्कलेज को वित्त वर्ष 2026 में 10.5 प्रतिशत की नाममात्र जीडीपी वृद्धि की उम्मीद है, जो वित्त वर्ष 2024-25 में अनुमानित 9.7 प्रतिशत से अधिक है। बार्कलेज ने कहा कि वह वित्त वर्ष 26-27 से ऋण समेकन रोडमैप का इंतजार कर रहा है, ताकि यह देखा जा सके कि वित्त मंत्री कब तक सामान्य सरकारी ऋण-से-जीडीपी लक्ष्य को 60 प्रतिशत तक कम कर देते हैं।

वित्त मंत्री ने अपने 2024-25 के बजट भाषण में कहा था कि 2026-27 से आगे, राजकोषीय नीति का प्रयास राजकोषीय घाटे को इस तरह बनाए रखना होगा कि केंद्र सरकार का कर्ज जीडीपी के प्रतिशत के रूप में घटता रहे। राजकोषीय नियमों के अनुसार सामान्य सरकारी कर्ज जीडीपी का 60 प्रतिशत होना चाहिए, जिसमें केंद्र और राज्यों के बीच 2:1 का अनुपात हो। इसका मतलब यह होगा कि केंद्र सरकार को मध्यम अवधि में अपने कर्ज को वर्तमान 57 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत करना होगा।

गुडवानी ने कहा कि इस बजट में, हम सरकार के प्रस्तावित मध्यम अवधि के लक्ष्यों पर भी नज़र रखेंगे, जैसा कि इसके राजकोषीय उत्तरदायित्व कानून के तहत अनिवार्य है। हम सीमा शुल्क संरचना में कई बदलावों की उम्मीद करते हैं, खासकर उन वस्तुओं पर जहां चीन से डंपिंग की चिंता बढ़ रही है (जैसे, स्टील, कांच, मूल धातु)। हमें वित्त वर्ष 25-26 में सीमा शुल्क संग्रह में वित्त वर्ष 24-25 की तुलना में मामूली वृद्धि की उम्मीद है।”

Budget: PWC, EY, Deloitte का एनालिसिस, Custom duty पर बजट में हो सकता है बड़ा एलान, कंपनियों के शेयर बनेंगे राकेट?

CRISIL, ICRA, S&P तीनों ने कहा, 5 साल में भारत का ये बिजनेस होगा 31 लाख करोड़ रुपये का

ICRA Report: इस साल धीमी राजस्व वृद्धि दर्ज कर सकेंगी निर्माण कंपनियां

बुरी खबर! शेयर मार्केट को लेकर BNP Paribas की रिपोर्ट बहुत Negative है

भारत की राजकोषीय स्थिति पर Moody’s की रिपोर्ट डराती है

 

 

 

Advertisement
First Published - January 23, 2025 | 6:58 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement