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लेखक : मिहिर एस शर्मा

आज का अखबार, लेख

बड़े बदलावों और आर्थिक झटकों का साल: कैसे 2025 ने वैश्विक आर्थिक व्यवस्था की पुरानी नींव हिला दी

आर्थिक नीतियों में बड़े बदलाव या किसी अर्थव्यवस्था की प्रमुख तकनीक में परिवर्तन का आंतरिक राजनीतिक गतिशीलता, संपत्ति वितरण और असमानता पर दीर्घकालिक और कभी-कभी अप्रत्याशित प्रभाव पड़ता है। उदाहरण के लिए, धन की सहज उपलब्धता के युग ने परिसंपत्ति मूल्यों को अत्यधिक बढ़ा दिया और संपत्ति असमानताओं को गहराई से जड़ें जमाने दीं, जिससे […]

आज का अखबार, लेख

अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा नीति 2025: नई सोच या वैचारिक मोड़? जवाब कम और सवाल ज्यादा

अमेरिकी सरकार समय-समय पर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक दस्तावेज जारी करती रहती है। इस दस्तावेज में राष्ट्रीय सुरक्षा अक्षुण्ण रखने के लिए नीतियों का जिक्र होता है। दुनिया के कई देश ऐसा करते हैं। भारत इस मामले में एक अपवाद है क्योंकि उसने पिछले कुछ समय से रक्षा पर श्वेत पत्र लाने या राष्ट्रीय […]

आज का अखबार, लेख

सुपरइंटेलिजेंस की जंग: एआई क्षेत्र में क्या वाकई हो रहा अभूतपूर्व निवेश?

मेटा के संस्थापक मार्क जकरबर्ग ने हाल ही में कहा कि वह आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) की दौड़ में पिछड़ने के बजाय ‘कुछ सौ अरब डॉलर फिजूलखर्ची’ का जोखिम उठाना पसंद करेंगे। जरा इस पर गौर करें कि उन्होंने कुछ सौ अरब डॉलर की बात कही है। जकरबर्ग जिस सरलता से यह स्वीकार करने के लिए […]

आज का अखबार, लेख

ट्रंप की बात को गंभीरता से लें, और टैरिफ लगने से पहले व्यापार समझौते को अंतिम रूप दें

कार्यकारी शक्ति के एक माध्यम के रूप में शुल्क लगाने की अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की ‘प्रतिबद्धता’ पर संदेह नहीं किया जा सकता। सार्वजनिक जीवन में अपनी लंबी पारी के दौरान (पहले एक व्यवसायी के रूप में, फिर एक टेलीविजन हस्ती के रूप में और अंत में एक राजनेता के रूप में) ट्रंप हमेशा व्यापार […]

आज का अखबार, लेख

बिहार चुनाव 2025: पिछले प्रदर्शन की बानगी देता 1 करोड़ नौकरियों का वादा

बिहार में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने विधानसभा चुनावों के लिए शुक्रवार को जो घोषणापत्र जारी किया, उसमें राज्य की जनता से कई वादे किए गए हैं। लेकिन एक वादा सबसे अलग नजर आया और आना ही था। वह वादा है कि अगर राजग फिर से सत्ता में आता है तो एक करोड़ से […]

आज का अखबार, लेख

आ​र्थिक वृद्धि का रास्ता: नोबेल विजेताओं ने व्यवहारिक सोच और प्रगति की संस्कृति पर दिया जोर

आर्थिक वृद्धि क्या है और वह कहां से उत्पन्न होती है? क्या यह केवल विभिन्न सामग्रियों, कच्चे माल और प्राकृतिक संसाधनों, श्रम और पूंजी का संचयन है? क्या यह तकनीकी प्रगति का उत्पाद है या फिर इसमें कुछ और भी सूक्ष्म बात काम करती है? यह अर्थशास्त्र के लिए बुनियादी प्रश्न होना चाहिए लेकिन आश्चर्य […]

आज का अखबार, लेख

क्रिकेट के मैदान से बाहर, पाकिस्तान ने विश्व स्तर पर भारत के लिए बढ़ाई चुनौतियां

इस्लामी गणराज्य पाकिस्तान सभी वस्तुनिष्ठ मानदंडों के हिसाब से एक नाजुक देश है, इसलिए इसे विश्व मंच पर नजरअंदाज और खारिज कर दिया जाना चाहिए। इसके बजाय, हाल के सप्ताहों में अमेरिका और चीन, दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने पाकिस्तान के नेताओं का गर्मजोशी से स्वागत किया है और आंतरिक निवेश बढ़ाने के लिए उसके […]

आज का अखबार, लेख

एच-1बी वीजा पर ट्रंप का बड़ा फैसला: अमेरिका में भारत के खास दर्जे का बीता दौर!

एच-1बी वीजा पर राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप का नया ऐलान क्या भारत को निशाना बनाने के लिए उठाया गया एक और कदम है? आखिरकार, दो-तिहाई से अधिक एच-1बी वीजा भारतीयों को दिए जाते हैं और भारतीय कंपनियां इस वीजा के सबसे बड़े लाभार्थियों में शुमार हैं। शायद हां। एक नजरिये से ट्रंप के सभी कदम वास्तव […]

आज का अखबार, लेख

विदेश नीति का बदलता रुख: भारत में अमेरिकी विरोध बढ़ा, क्या नेहरूवादी जड़ों की ओर हो रही वापसी?

दो दशक पहले यह विश्वास करना संभव था कि भारत के वैश्विक रुख के निर्धारण में आगे स्वत: स्फूर्त अमेरिका विरोध निर्णायक भूमिका नहीं निभाएगा। परंतु हाल के महीनों और वर्षों में यह स्पष्ट हो गया है कि पश्चिम के प्रति अविवेकी अविश्वास, तर्कसंगत स्तर तक कम होने के बजाय, भारतीय राजनीति में एक प्रमुख […]

आज का अखबार, लेख

अमेरिकी संस्थानों पर ट्रंप का निरंतर हमला उनकी महत्ता की अग्निपरीक्षा होगी

संस्थान मायने रखते हैं। उन्हीं पर विकास, निवेश और आर्थिक स्थिरता की बुनियाद रखी जाती है। या फिर इसका उलटा सच है? क्या आर्थिक परिवर्तन ही आधुनिक संस्थाओं को जन्म देते हैं? अर्थशास्त्रियों ने लंबे समय से इन दोनों के बीच संबंध को समझने की कोशिश की है। पिछले वर्ष, तीन अर्थशास्त्रियों को नोबेल पुरस्कार […]

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