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लेखक : अनंत नारायण

आज का अखबार, लेख

भारत के मजबूत बफर्स बाजारों को संभाल सकते हैं, लेकिन ज्यादा टाले नहीं जा सकते कठिन आर्थिक फैसले

अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध के चलते भारत भी अनिश्चित समय से गुजर रहा है। आर्थिक और नियामक बफर यानी बचाव मौजूद हैं, और बाजारों ने अधिक जोखिम को मूल्यांकित कर लिया है। हालांकि, व्यापक आर्थिक कमजोरियां बनी हुई हैं। भारत को अधिक निवेश और नवाचार की आवश्यकता है। इस उद्देश्य के लिए उपयुक्त नीतियां, बाहरी और राजकोषीय […]

आज का अखबार, लेख

भारत की छिपी क्रेडिट समस्या: दिक्कत कीमत और नियमों में

बैंकिंग तंत्र में प्रचुर नकदी के बावजूद बैंक जमा के लिए जूझ रहे हैं। कुल मिलाकर देश की ऋण व्यवस्था देश की अर्थव्यवस्था की तुलना में काफी छोटी है। यह सब कर प्रोत्साहनों, नियामक संरचनाओं और मौद्रिक परिस्थितियों के संयोजन को दर्शाता है, जो स्थिर आय के आकर्षण को दमित करते हैं और ऋण विस्तार […]

आज का अखबार, ताजा खबरें, लेख

RBI, मुद्रा सृजन और सरकारी खजाना: आने वाले वक्त में बैंकों के अलावा अन्य कर्ज क्यों होंगे जरूरी

मौद्रिक नीति, तरलता, और मुद्रा तथा बॉन्ड बाजारों को दिशा देने में मदद करने के साथ-साथ, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की रिकॉर्ड ओपन मार्केट ऑपरेशन (ओएमओ) बॉन्ड खरीद और लाभांश हस्तांतरण ने सरकार की राजकोषीय गणना को सही रखने में मदद की है, जबकि यील्ड को कम बनाए रखा है। नरम महंगाई ने यह सब […]

आज का अखबार, लेख

नियामकीय दुविधा: घोटालों पर लगाम या भारतीय पूंजी बाजारों का दम घोंटना?

हर नियामक को एक अंतर्निहित तनाव का सामना करना पड़ता है। अगर वे नरमी से काम करें तो घोटालों का जोखिम होता है और अगर कठोरता बरतें तो वैध कारोबार का दम घुटता है। एक प्रतिभूति नियामक को इस तनाव को संभालते हुए तीन अलग-अलग लक्ष्यों को हासिल करना होता है। पहला लक्ष्य है निवेशक […]

आज का अखबार, लेख

मौद्रिक नीति और ‘तीन तरफा दुविधा’ पर गंभीर व खुली बहस की जरूरत

अंतरराष्ट्रीय अर्थशास्त्र में ‘असंभव त्रयी’ एक बुनियादी सिद्धांत है। यह कहता है कि कोई भी देश एक साथ स्थिर विनिमय दर बनाए रखना, पूर्ण पूंजी गतिशीलता की अनुमति देना, और स्वतंत्र मौद्रिक नीति का पालन नहीं कर सकता।  मुद्रास्फीति को वरीयता: ऊर्जित पटेल कमेटी की जनवरी 2014 में आई रिपोर्ट ने भारत के मौद्रिक नीति […]

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