नियामकीय दुविधा: घोटालों पर लगाम या भारतीय पूंजी बाजारों का दम घोंटना?
हर नियामक को एक अंतर्निहित तनाव का सामना करना पड़ता है। अगर वे नरमी से काम करें तो घोटालों का जोखिम होता है और अगर कठोरता बरतें तो वैध कारोबार का दम घुटता है। एक प्रतिभूति नियामक को इस तनाव को संभालते हुए तीन अलग-अलग लक्ष्यों को हासिल करना होता है। पहला लक्ष्य है निवेशक […]
मौद्रिक नीति और ‘तीन तरफा दुविधा’ पर गंभीर व खुली बहस की जरूरत
अंतरराष्ट्रीय अर्थशास्त्र में ‘असंभव त्रयी’ एक बुनियादी सिद्धांत है। यह कहता है कि कोई भी देश एक साथ स्थिर विनिमय दर बनाए रखना, पूर्ण पूंजी गतिशीलता की अनुमति देना, और स्वतंत्र मौद्रिक नीति का पालन नहीं कर सकता। मुद्रास्फीति को वरीयता: ऊर्जित पटेल कमेटी की जनवरी 2014 में आई रिपोर्ट ने भारत के मौद्रिक नीति […]

