गाजियाबाद, 26 नवंबर :भाषा: गाजियाबाद की एक सीबीआई अदालत ने दंत चिकित्सक दंपति राजेश और नूपुर तलवार को आज आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोनों को कल अदालत ने अपनी बेटी आरषि और घरेलू नौकर हेमराज की साढ़े पांच साल पहले हत्या करने का दोषी ठहराया था।
49 वर्षीय राजेश और 48 वर्षीय नूपुर को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश श्याम लाल ने मौत की सजा से बख्श दिया। उन्होंने जांच एजेंसी की अधिकतम सजा की मांग को खारिज कर दिया। इससे पहले सीबीआई ने मामले को जघन्य से जघन्यतम श्रेणी का बताते हुए दोनों के लिए मौत की सजा की मांग की थी।
न्यायाधीश श्याम लाल ने फैसला सुनाते हुए कहा, समूचे तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मेरी राय है कि दोनों आरोपी व्यवस्थित समाज के लिए खतरा नहीं हैं।
उन्होंने कहा, यह आईपीसी की धारा 302 :हत्या: को धारा 34 :साझा मंशा: के साथ पढ़ते हुए मौत की सजा सुनाने के लिए उपयुक्त मामला नहीं है और इसलिए आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाना उचित लगता है।
सनसनीखेज दोहरे हत्याकांड में सजा पर अदालत के समक्ष दलील देते हुए सीबीआई के वकील आर के सैनी ने कहा कि हत्याएं नृशंस थीं और यह जघन्य से जघन्यतम की श्रेणी में आता है।
बचाव पक्ष के वकील तनवीर मीर ने सीबीआई की दलीलों का विरोध किया और कहा कि उनके मुवक्किलों के खिलाफ सबूत कमजोर हैं और उन्होंने तलवार दंपति के प्रति नरमी बरतने की मांग की। उन्होंने कहा कि अपराध जघन्य से जघन्यतम की श्रेणी में नहीं आता है क्योंकि न्यायाधीश ने कहा है कि अपराध अचानक और गंभीर गुस्से का नतीजा था।
दलील सिर्फ पांच मिनट तक चली और उसके बाद न्यायाधीश ने कार्यवाही स्थगित कर दी और शाम साढ़े चार बजे तलवार दंपति को सजा सुनाई। सजा सुनाए जाने के दौरान राजेश और नूपुर तलवार शांत दिखे।
जारी :भाषा