Silver Outlook: दुनियाभर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता के बीच सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं की मांग फिर मजबूत होती दिख रही है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव के कारण निवेशक सेफ हेवन एसेट्स (सुरक्षित निवेश) की ओर रुख कर रहे हैं, जिसका असर सोना और चांदी की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है। ऐसे माहौल में टाटा म्युचुअल फंड (Tata Mutual Fund) ने चांदी पर लंबी अवधि के लिए बुलिश रुख बनाए रखा है और कहा है कि चांदी को सहारा देने वाले बुनियादी कारण अब भी मजबूत बने हुए हैं।
टाटा म्युचुअल फंड लॉन्ग टर्म के लिए चांदी पर बुलिश है। फंड हाउस ने नोट में कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण चांदी की कीमतों में हाल के समय में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया है। मजबूत बुनियादी कारकों और बाजार में अनिश्चितता को देखते हुए टाटा म्युचुअल फंड ने चांदी में निवेश की सलाह दोहराई हैं।
फंड हाउस ने कहा कि अगर डॉलर मजबूत होने या भू-राजनीतिक तनाव कम होने की वजह से कीमतों में गिरावट आती है, तो इसे सोना और चांदी में निवेश या खरीद बढ़ाने के मौके के रूप में देखा जा सकता है।
Also Read: सोने में निवेश करें या रुकें? Tata MF ने बताई सही स्ट्रैटेजी; इन 5 फैक्टर्स पर रखें नजर
टाटा म्युचुअल फंड ने नोट में कहा कि ऐतिहासिक तेजी के बाद बाजार में करेक्शन आना आम बात है। लेकिन इससे कीमती धातुओं का लंबी अवधि का तेजी वाला रुख कमजोर नहीं होता। चांदी को सहारा देने वाले बुनियादी कारण अब भी मजबूत बने हुए हैं।
1. भू-राजनीतिक तनाव: दुनिया के कई हिस्सों में भू-राजनीतिक तनाव बरकरार है। ऐसे माहौल में निवेशक सोने और चांदी जैसी सुरक्षित संपत्तियों का रुख करते हैं।
2. फिस्कल डेफिसिट और डी-डॉलराइजेशन: बढ़ते राजकोषीय घाटे (fiscal deficits) और डी-डॉलराइजेशन (डॉलर पर निर्भरता कम करने) के रुझान के कारण करेंसी को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। हालांकि तेल की कीमत बढ़ने और अमेरिकी फेड द्वारा ब्याज दर में कटौती की संभावना कम होने से डॉलर में कुछ मजबूती के संकेत भी दिख रहे हैं।
3. चांदी की औद्योगिक मांग में तेज बढ़ोतरी: चांदी की कुल मांग का लगभग 60% हिस्सा औद्योगिक उपयोग में जाता है। चीन से निवेश और औद्योगिक मांग बढ़ने की वजह से कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं।
4. लगातार सप्लाई की कमी: चांदी के बाजार में पिछले कई वर्षों से सप्लाई की कमी बनी हुई है। लगातार पांच साल से सप्लाई घाटा देखने को मिल रहा है और अब चांदी छठे साल भी इसी स्थिति में है। यानी बाजार में मांग के मुकाबले सप्लाई कम है। इस वजह से बाजार का सेंटिमेंट मजबूत बना हुआ है और चांदी की कीमतों में तेजी की उम्मीद बढ़ रही है।
इसके अलावा निर्यात पर पाबंदियां भी लगी हुई हैं। शंघाई फ्यूचर्स एक्सचेंज (SHFE) में चांदी का भंडार भी घटकर करीब 10 साल के निचले स्तर पर आ गया है। इससे साफ संकेत मिलता है कि बाजार में चांदी की भौतिक आपूर्ति (physical supplies) की भारी कमी है।
टाटा म्युचुअल फंड ने कहा कि मौजूदा भू-आर्थिक माहौल सोना और चांदी की कीमतों को सहारा दे सकती हैं। इसके साथ ही कुछ स्ट्रक्चरल और साईकलिक फंडामेंटल फैक्टर्स भी इनके पक्ष में हैं। अगर कीमतों में गिरावट आती है, तो निवेशक इसे धीरे-धीरे खरीदारी या निवेश बढ़ाने के मौके के रूप में देख सकते हैं।
फंड हाउस ने नोट में कहा कि चांदी को एक उभरती हुई ग्रोथ स्टोरी माना जा रहा है, लेकिन इसका रुझान काफी हद तक औद्योगिक मांग में व्यापक सुधार पर निर्भर करेगा। चूंकि यह कमोडिटी स्वभाव से काफी उतार-चढ़ाव वाली है, इसलिए मध्यम से लंबी अवधि के निवेश के लिए इसमें चरणबद्ध (स्टैगर्ड) तरीके से निवेश करना बेहतर हो सकता है।