डेनमार्क के अधिकारियों ने एक निचली अदालत के उस फैसले के खिलाफ अपने यहां सुप्रीम कोर्ट में अपील करने से इनकार कर दिया जिसमें पुरुलिया में हथियार गिराये जाने के मामले के आरोपी किम डेवी के प्रत्यर्पण से इनकार कर दिया गया था।
आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि डेनमार्क के अधिकारियों को भारतीय एजेंसियों ने मनाने के कई प्रयास किये लेकिन उन्होंने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट मंे अपील करने पर रजामंदी नहीं जताई है।
सूत्रों के मुताबिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अभियोजक डेनमार्क की सरकार के नियंत्रण में नहीं है और उनका फैसला अंतिम समझा जाता है।
उन्होंने कहा कि मामले में मुकदमे के लिहाज से डेवी को भारत वापस लाने के लिए राजनयिक विकल्प तलाशे जाएंगे।
डेनमार्क ने शुरूआत में डेवी के प्रत्यर्पण के भारत के अनुरोध को स्वीकार कर लिया था लेकिन कोपेनहेगन की एक अदालत में डेवी ने इसे चुनौती दी और अदालत ने प्रत्यर्पण रद्द कर दिया।
सीबीआई के सूत्रों ने कहा कि भारतीय अधिकारी मामले में पक्ष नहीं है और सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि अदालतें कथित अपराध के लक्षणों पर नहीं बल्कि जेल के हालात तथा भारत में मानवाधिकारों के मुद्दों पर विचार कर रही हैं।
सीबीआई ने अपने एक आला अधिकारी को डेनमार्क के कानूनी अधिकारियों को मामले की गंभीरता से अवगत कराने के लिए कोपेनहेगन भेजा था लेकिन उस दौरे का कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला।
मामला 17 दिसंबर, 1995 की रात को घटी घटना से जुड़ा है जब एक एएन..26 विमान से पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में हथियार और गोला..बारूद गिराये गये। सैकड़ों एके..47 राइफलें, पिस्तोलें, टैंक रोधी ग्रेनेड, रॉकेट लांचर तथा हजारों कारतूस उस समय गिराये गये थे।
भाषा