वित्त पर गठित संसद की स्थायी समिति ने आज इस संबंध में पेश अपनी रिपोर्ट में कहा है समिति का मजबूती के साथ यह मानना है कि गरीबी की परिभाषा के बारे में केवल संबंधित विभागों को शामिल किये जाने से ही वांछित परिणाम मिल सकते हैं और इसके लिये संयुक्त प्रणाली .. इस काम को बखूबी कर सकती है।
पूर्व वित्त मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा की अध्यक्षता वाली समिति ने यह सुझाव हाल ही में योजना आयोग की रिपोर्ट में दिये गये गरीबी की परिभाषा के नये अनुमान को लेकर सामने आई है। योजना आयोग की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में वर्ष 2004..05 में जहां 37.2 प्रतिशत गरीब थे वहीं इनकी संख्या 2011..12 में घटकर 21.9 प्रतिशत रह गई।
आयोग के अनुसार वर्ष 2011..12 में तेंदुलकर समिति के मानदंडों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी रेखा 816 रपये प्रति व्यक्ति और शहरी क्षेत्रों में 1,000 रपये प्रति व्यक्ति रही है। इसका अर्थ यह हुआ कि शहरी क्षेत्रों में प्रतिदिन 33.33 रपये और ग्रामीण क्षेत्रों में 27.20 रपये प्रतिदिन से अधिक वस्तु एवं सेवाओं का इस्तेमाल करने वाला व्यक्ति गरीब नहीं है।
भाषा
नननन