facebookmetapixel
Advertisement
LPG Price Hike: मिडिल ईस्ट संकट का असर भारत की रसोई तक, घरेलू गैस सिलेंडर 60 रुपये महंगाकर्नाटक सरकार का बड़ा फैसला: 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर लगेगा प्रतिबंध‘महासागरों में भारत का दबदबा बढ़ेगा’, शक्ति केंद्र बनते समुद्र व बदलती भू-राजनीति पर राजनाथ सिंह का बयानT20 वर्ल्ड कप फाइनल का फीवर: भारत-न्यूजीलैंड भिड़ंत से होटल और रेस्तरां की चांदी, रेवेन्यू होगा दोगुनाWomens Day 2026: तरक्की के दावों के बीच प्रबंधन में घटी महिलाओं की हिस्सेदारी, लक्ष्य अब भी दूररायसीना डायलॉग में बोले ईरान के उप विदेश मंत्री खातिबजादेह: हमारे लिए यह लड़ाई ‘अस्तित्व की जंग’निर्यातकों को बड़ी राहत की तैयारी! बोले गोयल: पश्चिम एशिया संकट से निपटने को उठाएंगे ठोस कदमLPG संकट रोकने को सरकार का बड़ा कदम: घरेलू तेल कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने का सख्त निर्देशबॉन्ड यील्ड में उछाल से बाजार में हलचल, राहत के लिए 1 लाख करोड़ रुपये के बॉन्ड खरीदेगा RBIकच्चे तेल की कीमतों में तेजी पर फिसला बाजार, सेंसेक्स 1,097 अंक, निफ्टी 315 अंक लुढ़का

वैश्विक आईटी खर्च की दिशा बदलेगी!

Advertisement

गार्टनर का यह भी मानना है कि आईटी सेवाओं और उत्पादों के लिए 139 अरब डॉलर का भारतीय बाजार 13 फीसदी की बेहतर दर से बढ़ेगा।

Last Updated- April 22, 2024 | 12:11 AM IST
TCS

देश की तीन दिग्गज सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों, टीसीएस, इन्फोसिस और विप्रो के वित्त वर्ष 24 की चौथी तिमाही (जनवरी से मार्च) और वित्त वर्ष 24 के नतीजे कमजोर रहे हैं। तीनों कंपनियों ने सतर्क अनुमान और सलाह भी जारी किए हैं (हालांकि टीसीएस राजस्व का अनुमान जारी नहीं करती)।

तीनों बड़ी कंपनियों के प्रबंधन की यह सोच है कि वैसे तो मांग में कोई स्पष्ट उभार नहीं दिख रहा, लेकिन वित्त वर्ष 24 की दूसरी छमाही (अक्टूबर 24 से मार्च 25) संभवत: इसका सबसे निचला दौर हो, जिसके बाद सुधार दिख सकता है। उनको उम्मीद है कि वैश्विक स्तर पर हालात बेहतर होने से वित्त वर्ष 25 के अंतिम महीनों और वित्त वर्ष 26 में आय की गति में धीरे-धीरे सुधार आ सकता है।

आईटी की इन तीन दिग्गज कंपनियों की मौजूदगी सभी भौगोलिक इलाकों और कार्यक्षेत्रों तक है। मार्च 2024 तक इन कंपनियों में कुल मिलाकर करीब 12 लाख कर्मचारी थे और वित्त वर्ष 24 का उनका कुल राजस्व 4.8 लाख करोड़ रुपये से अधिक था।

उनके महत्त्वपूर्ण आकार और सभी खंडों और भौगोलिक इलाकों में मौजूदगी को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि वित्त वर्ष 25 के लिए उनके अनुमान और रुझानों का आकलन ज्यादातर आईटी सेवा व्यवसायों के लिए अच्छा रहने की संभावना है, विशेष रूप से उन बड़ी कंपनियों के लिए जो छोटे, विशिष्ट क्षेत्रों तक सीमित नहीं हैं।

तीनों बड़ी कंपनियों का वित्त वर्ष 24 की चौथी तिमाही में राजस्व कम रहा है। इस अव​धि में विप्रो का राजस्व तिमाही आधार पर थोड़ा कम रहा, जबकि एक साल पहले की तुलना में 6.5 फीसदी कम रहा। इसी तरह, इन्फोसिस के राजस्व में तिमाही आधार पर 2.2 फीसदी गिरावट आई, जबकि यह सालाना आधार पर यह सपाट रहा। टीसीएस का राजस्व तिमाही आधार पर 1.1 फीसदी बढ़ा, जबकि सालाना आधार पर इसमें 2.2 फीसदी की बढ़त हुई।

तीनों कंपनियों में वित्त वर्ष 24 की चौथी तिमाही में कर्मचारियों की संख्या में भी तिमाही आधार पर गिरावट आई है। एक साल पहले के मुकाबले उनके कर्मचारियों की संख्या में 63,000 से ज्यादा की कमी आई है। इसके बावजूद कार्यबल का उपयोग अभी भी ऐतिहासिक स्तर से नीचे है। तीनों कंपनियों में आट्रिशन रेट यानी नौकरी छोड़ने की दर भी घटकर 12 फीसदी के आसपास रह गई है जो कि पिछले वर्षों के मुकाबले आधा है। कर्मचारियों की कम संख्या और कम नौकरी छोड़ने की दर का यह संयोजन पूरे उद्योग में कमजोर मांग का संकेत देता है।

तीनों कंपनियां कमजोर विवेकाधीन खर्च को चिंता का एक प्रमुख क्षेत्र बताती हैं। हालांकि सभी कंपनियां लगातार सौदे हासिल कर रही हैं, लेकिन अधिकांश कार्यक्षेत्रों के ग्राहकों ने विवेकाधीन खर्चों में कटौती की है या इसे टाल दिया है। ऐसे में मांग का पूरा माहौल कमजोर बना हुआ है। कंपनियों ने कहा है कि जब तक व्यापक आर्थिक वृदि्ध में वैश्विक तेजी नहीं आती है और ग्राहक विवेकाधीन परियोजनाओं को फिर से शुरू नहीं करते हैं, तब तक इसमें बड़े बदलाव की संभावना नहीं है।

ये तीनों कंपनियां जेनरेटिव आर्टिफिशल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों, हाइपरस्केलर्स (क्लाउड सेवा प्रदाता) और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में नए अवसरों की तलाश कर रही हैं। कुछ निवेशकों और विश्लेषकों का मानना है कि बाजार का अब सबसे निचला स्तर आ चुका है और वे इस तथ्य की ओर इशारा करते हैं कि तीनों कंपनियां मार्जिन बनाए रखने में सक्षम हैं, भले ही राजस्व वृद्धि कमजोर या नगण्य रही हो। आईटी कंसल्टिंग फर्म गार्टनर का मानना है कि 5 लाख करोड़ डॉलर के वैश्विक आईटी बाजार के खर्च में कैलेंडर वर्ष 2024 (वित्त वर्ष 2025 की पहली तीन तिमाहियों) में 8 फीसदी की महत्त्वपूर्ण वृद्धि होगी।

गार्टनर का यह भी मानना है कि आईटी सेवाओं और उत्पादों के लिए 139 अरब डॉलर का भारतीय बाजार 13 फीसदी की बेहतर दर से बढ़ेगा। यदि यह काफी हद तक सही होती है, तो यह मांग बढ़ाने वाला हो सकता है और भारतीय कंपनियों को काफी हद तक इसका लाभ होने की संभावना है। गार्टनर का कहना है कि बढ़ा हुआ खर्च आईटी परामर्श क्षेत्र में केंद्रित हो सकता है। सीआईओ अब एनालिटिक्स और जेनरेटिव एआई में भी निवेश पर विचार कर रहे हैं। भारत में, डिवाइस और उपकरण सॉफ्टवेयर और डेटा सेंटर सिस्टम पर खर्च में तेज वृद्धि देखने की संभावना है।

आंतरिक प्रक्रियाओं और वितरण मॉडल को अनुकूलित करने में भी जेनरेटिव एआई ऐ​प्लिकेशन ढूंढना शुरू कर सकता है। यह पूर्वानुमान मध्यम अवधि में उम्मीद प्रदान करता है, लेकिन निकट अवधि का नजरिया मंद ही दिखाई दे रहा है।

 

Advertisement
First Published - April 22, 2024 | 12:11 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement