facebookmetapixel
Q3 Results: DLF का मुनाफा 13.6% बढ़ा, जानें Zee और वारी एनर्जीज समेत अन्य कंपनियों का कैसा रहा रिजल्ट कैंसर का इलाज अब होगा सस्ता! Zydus ने भारत में लॉन्च किया दुनिया का पहला निवोलुमैब बायोसिमिलरबालाजी वेफर्स में हिस्से के लिए जनरल अटलांटिक का करार, सौदा की रकम ₹2,050 करोड़ होने का अनुमानफ्लाइट्स कैंसिलेशन मामले में इंडिगो पर ₹22 करोड़ का जुर्माना, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट हटाए गएIndiGo Q3 Results: नई श्रम संहिता और उड़ान रद्द होने का असर: इंडिगो का मुनाफा 78% घटकर 549 करोड़ रुपये सिंडिकेटेड लोन से भारतीय कंपनियों ने 2025 में विदेश से जुटाए रिकॉर्ड 32.5 अरब डॉलरग्रीनलैंड, ट्रंप और वैश्विक व्यवस्था: क्या महा शक्तियों की महत्वाकांक्षाएं नियमों से ऊपर हो गई हैं?लंबी रिकवरी की राह: देरी घटाने के लिए NCLT को ज्यादा सदस्यों और पीठों की जरूरतनियामकीय दुविधा: घोटालों पर लगाम या भारतीय पूंजी बाजारों का दम घोंटना?अवधूत साठे को 100 करोड़ रुपये जमा कराने का निर्देश 

Stubble Burning: कृषि अवशेष जलाने से बढ़ा ग्रीनहाउस गैस का एमिशन

अध्ययन में बताया गया है कि पंजाब में सबसे ज्यादा उत्सर्जन होता है। उसके कृषि क्षेत्र के 27 प्रतिशत हिस्से के अवशेष 2020 में जला दिए गए।

Last Updated- September 27, 2023 | 10:46 PM IST
Stubble Burning

उत्तर भारत में पराली (Stubble Burning) जलाए जाने के सीजन के ठीक पहले भोपाल के इंडियन इंस्टीट्यूट आफ साइंस, एजूकेशन ऐंड रिसर्च (आईआईएसईआर) की एक रिपोर्ट में पाया गया है कि 2011 से 2020 दशक के दौरान कृषि अवशेष जलाए जाने से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन (जीएचजी) में 75 प्रतिशत वृद्धि हुई है।

अध्ययन में बताया गया है कि पंजाब में सबसे ज्यादा उत्सर्जन होता है। उसके कृषि क्षेत्र के 27 प्रतिशत हिस्से के अवशेष 2020 में जला दिए गए। उसके बाद मध्य प्रदेश का स्थान आता है। मध्य प्रदेश दूसरा राज्य बनकर उभरा है जिसकी 2020 में भारत में कृषि अवशेष जलाए गए क्षेत्र में 30 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

हालांकि पिछले कुछ साल में (खासकर 2021 से) फसल के अवशेष जलाने के मामले घटे हैं। केंद्र व राज्य सरकारों की दीर्घावधि रणनीति के कारण खासकर उत्तर भारत में खरीफ की फसल के अवशेष कम जलाए गए हैं, लेकिन यह पूरी तरह बंद नहीं हुआ है।

हरियाणा जैसे कुछ राज्यों ने आश्चर्यजनक रूप से पराली जलाने की घटना पर नियंत्रण हासिल किया है, जिसकी वजह वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाना, सब्सिडी वाली मशीनें मुहैया कराना, जुर्माने का प्रावधान और जागरूकता अभियान शामिल है।

अध्ययन में यह भी पाया गया है कि ज्यादातर उत्सर्जन खरीफ सीजन के अंत में हुआ है, उसके बाद रबी का स्थान आता है। इसकी वजह धान व गेहूं की पराली जलाना है।

First Published - September 27, 2023 | 10:46 PM IST

संबंधित पोस्ट