facebookmetapixel
Advertisement
पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ने से 1.2 करोड़ गिग वर्कर्स बेहाल, 5 घंटे काम बंद रखकर जताएंगे विरोधNPS सब्सक्राइबर्स को बड़ी राहत: अब गंभीर बीमारी में सरेंडर कर सकेंगे एन्युटी पॉलिसी, नियमों में हुआ बदलावExplainer: क्यों बढ़ रहा है टाटा संस पर पब्लिक होने का दबाव? अंदरूनी कलह व RBI के नियमों का पूरा सचDividend Stocks: अगले हफ्ते L&T और Havells समेत ये 18 कंपनियां करेंगी पैसों की बारिश, देखें पूरी लिस्टभारतीयों के लिए दुबई में घर खरीदना होगा आसान, रेजीडेंसी वीजा के लिए प्रॉपर्टी की न्यूनतम कीमत सीमा खत्मआसमान में भारत की ताकत बढ़ाने की जरूरत, वायुसेना ने ‘घातक’ स्टेल्थ ड्रोन कार्यक्रम को तेज करने पर दिया जोरनिवेशकों की ऊंची यील्ड की मांग के आगे झुका नाबार्ड, 7,000 करोड़ रुपये का बॉन्ड इश्यू लिया वापसडीजल की महंगाई से ट्रांसपोर्टर्स बेहाल, माल ढुलाई दरों में बढ़ोतरी की तैयारी; ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा सीधा असरब्रिटेन के नए स्टील नियमों से अटका भारत का मेगा व्यापार सौदा, FTA लागू होने में हो सकती है देरीरिकॉर्ड तोड़ रफ्तार: पश्चिम एशिया संकट के बावजूद अप्रैल में भारत का निर्यात 13.8% उछला

सीबीआईसी ने चालू वित्त वर्ष में जांच के लिए 50,000 जीएसटी मामलों को छांटा

Advertisement

2017 में जीएसटी के लागू होने के बाद कारोबारों को इसे अपनाने के लिए दी गई मोहलत के बाद वित्त वर्ष 2023 से जीएसटी की विभागीय जांच में तेजी आई है।

Last Updated- June 14, 2023 | 11:19 PM IST
SBI report on GST Rate Cuts

केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर विभाग ने 50,000 नए मामलों को छांटा है जिनकी चालू वित्त वर्ष में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) ऑडिटिंग की जाएगी। यह कर अनुपालन तथा कर आधार को बढ़ाने के प्रयास का हिस्सा है। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के चेयरमैन विवेक जौहरी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड के साथ बातचीत में ये बातें कहीं।

सीबीआईसी प्रमुख ने कहा, ‘केंद्रीय स्तर पर वित्त वर्ष 2021 और वित्त वर्ष 2022 से संबंधित करीब 30,000 जीएसटी मामलों (वित्त वर्ष 2022-23 में) की जांच की गई है। इसमें हमने करीब 17,000 करोड़ रुपये की कर चोरी का पता लगाया है और अभी तक ऐसे मामलों में 18 फीसदी यानी 3,060 करोड़ रुपये की वसूली की जा चुकी है।’

वसूली का आंकड़ा और बढ़ सकता है क्योंकि कुछ मामलों का निपटान चालू वित्त वर्ष में होने की उम्मीद है। वित्त वर्ष 2024 के लिए प्राधिकरण ने जोखिम के आधार पर 50,000 मामलों की जांच करने का लक्ष्य रखा है। जौहरी ने स्पष्ट किया कि यह पिछले वित्त वर्ष के शेष मामलों से इतर होंगे।

जीएसटी जांच या विभागीय जांच घोषित बिक्री, भुगतान किए गए कर, दावा किए गए रिफंड और इनपुट टैक्स क्रेडिट की सत्यता को जांचने के लिए किया जाता है, जिसका पता कर रिटर्न और कारोबार के अन्य रिकॉर्ड की जांच से पता चलता है। विभिन्न दस्तावेजों में किसी तरह की विसंगति होने पर यह कर वंचना को लेकर आगाह करता है।

2017 में जीएसटी के लागू होने के बाद कारोबारों को इसे अपनाने के लिए दी गई मोहलत के बाद वित्त वर्ष 2023 से जीएसटी की विभागीय जांच में तेजी आई है। 15 मई को द्विमासिक विशेष अभियान शुरू करने के बारे में जौहरी ने कहा कि इसका उद्देश्य करदाताओं की सही संख्या का पता लगाना है।

उन्होंने कहा, ‘हमने 30,000 मामलों को भौतिक सत्यापन के लिए छांटा है, जिनमें से अभी तक 35 फीसदी या 10,000 मामलों में कथित तौर पर फर्जी पंजीकरण जारी कर गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा करने से जुड़े थे। विभाग ने इस अभियान के जरिये अभी तक करीब 7,000 करोड़ रुपये फर्जी आईटीसी का दावा करने के का पता लगाया है।’

उन्होंने कहा, ‘राज्यों के साथ मिलकर यह कदम उठाने का मकसद उन करदाताओं की पहचान करनी है जो अपने व्यवहार और अन्य गतिविधियों के कारण संदेहास्पद लगते हैं। सबसे पहले हमें उन करदाताओं की एक सूची तैयार करनी होगी जो अधिक जोखिम वाले हो सकते हैं।

इसके बाद इन करदाताओं की प्रत्यक्ष रूप से पहचान की जाएगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि वे कहीं न कहीं से कारोबार कर रहे हैं और मौजूद हैं। राज्यों के द्वारा इनकी पहचान के लिए हमने कुछ नियम-कायदे तय कर रखे हैं।

किसी इकाई की मौजूदगी का पता नहीं होने की स्थिति में हम उसका पंजीयन रद्द करने और यहां तक कि इनपुट टैक्स क्रेडिट रोकने पर विचार कर रहे हैं।’ जौहरी ने कहा कि विभाग आईटीसी के उपयोगकर्ताओं और उन प्राप्तकर्ताओं की पहचान करने में सक्षम हैं जो टैक्स क्रेडिट के वास्तविक लाभार्थी हैं। उन्होंने कहा कि इसी के आधार पर कदम उठाए जा रहे हैं।

Advertisement
First Published - June 14, 2023 | 11:19 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement