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Battery Swapping Policy: बैटरी स्वैपिंग पर साझेदारों से होगी बात, नए सिरे से विचार-विमर्श करने की योजना

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बैठक का मकसद विभिन्न बैटरी चालित वाहनों (ईवी) के म़ॉडल और चार्जिंग स्टेशनों के लिए बैटरी स्वैपिंग तकनीक के मानदंडों को सुचारु बनाना है।

Last Updated- September 27, 2023 | 10:49 PM IST
Electric vehicle

केंद्र सरकार बैटरी स्वैपिंग नीति में इंटरऑपरेबिलिटी मानक तय करने के लिए नए सिरे से विचार-विमर्श करने की योजना बना रही है। बिज़नेस स्टैंडर्ड को मिली जानकारी के मुताबिक भारी उद्योग मंत्रालय साझेदारों के साथ 29 सितंबर को बैठक करेगा।

इस बैठक का मकसद विभिन्न बैटरी चालित वाहनों (ईवी) के म़ॉडल और चार्जिंग स्टेशनों के लिए बैटरी स्वैपिंग तकनीक के मानदंडों को सुचारु बनाना है। वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘बैटरी इंटरऑपरेबिलिटी के मानदंडों को तय करने के लिए सभी साझेदारों की बैठक बुलाई गई है। हम बैटरी स्वैपिंग नीति जल्दी पेश करना चाहते हैं।’

भारी उद्योग मंत्रालय ने इंडियन बैटरी स्वैपिंग एसोसिएशन (आईबीएसए), इंडियन एनर्जी स्टोरेज एलायंस (आईईएसए), सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सायम), इन्वेस्ट इंडिया, नीति आयोग और विद्युत मंत्रालय के प्रतिनिधियों को बुलाया है। दरअसल, मंत्रालय 20 अप्रैल, 2022 को बैटरी स्वैपिंग नीति के मसौदे पर आम सहमति तक पहुंच पाने में विफल रहा था। इसलिए कुछ महीनों बाद नए सिरे से कदम उठाया जा रहा है।

सरकार के साथ हुई पिछली बैठक में साझेदारों ने कोई भी मानक तय करने से नवाचार में रुकावटें खड़ी होने की बात कही थी। साझेदारों ने दावा किया था कि मानकीकृत बैटरी को बनाना तकनीकी रूप से संभव नहीं है।

तर्क यह दिया था कि वाहन के अनुकूल बैटरी का बैटरी का डिजाइन, खास आकार, हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर तय किया जाता है। इसलिए एक तरह की बैटरी नहीं बनाई जा सकती है। इस क्रम में सरकारी अधिकारियों ने कहा कि इस नीति का ध्येय हालिया आधारभूत संरचना की मदद करना है और यह नीति किसी को भी शोध व विकास के क्षेत्र में निवेश करने से नहीं रोकती है।

वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘इसका ध्येय ईवी वाहनों की बैटरियों के लिए मानक तय करना है, नवाचार को बाधित करना नहीं।’ प्रस्तावित बैठक तकनीकी दिशानिर्देशों, सुरक्षा मानकों और इंटरऑपरेबिलिटी बैटरी स्वैपिंग तकनीक को लागू करने की आवश्यकताओं पर केंद्रित होने की उम्मीद की जा रही है। ईवी क्षेत्र के सामने मुख्य चुनौती मानकीकृत बैटरी स्वैपिंग तकनीक है।

अभी बैटरी का स्वरूप और उसके चार्जिंग आधारभूत ढांचा अपर्याप्त है। इन इंटर ऑपरेबिलिटी मानकों को तय करके भारत ईवी के निर्माताओं और चार्जिंग आधारभूत ढांचा मुहैया करवाने वालों के लिए बेहतर प्रतिस्पर्धी माहौल तैयार करना चाहता है। इससे ग्राहकों को फायदा होगा।

बैटरी स्वैपिंग मामले में ईवी की विभिन्न समस्याओं को हल करने का भरोसा दिया गया है। इसके तहत ईवी मालिक बैटरी की क्षमता कम होने पर पूरी तरह चार्ज बैटरी को तत्काल बदल सकेंगे।

बैटरी स्वैपिंग पहल का विचार वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फरवरी, 2020 में अपने बजट भाषण के दौरान दिया था। इसके बाद आयोग ने अप्रैल में इसी साल के लिए मसौदा नीति जारी की थी।

मसौदा नीति में सुरक्षा मानदंडों को भी शामिल किया गया। इन सुरक्षा मानदंडों में बैटरी की पहचान के लिए विशिष्ट पहचान नंबर जारी करने, बैटरी की निगरानी व पहचान करने, रिसाइकलिंग और नवीनीकरण प्रक्रिया को शामिल किया गया था।

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First Published - September 27, 2023 | 10:49 PM IST

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