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केरल सरकार ने 15 लाख रुपये से अ​​धिक दाम वाले EV पर बढ़ाया टैक्स, इले​क्ट्रिक वाहनों की पहुंच एवं बिक्री की रफ्तार पर लगेगा ब्रेक

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उद्योग के लोगों का मानना ​​है कि सरकार के इस कदम से राज्य में तेजी से बढ़ रही ईवी की बिक्री और पैठ पर असर पड़ सकता है।

Last Updated- February 07, 2025 | 11:08 PM IST
electric vehicles

केरल सरकार ने राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की बढ़ती ब्रिकी का फायदा उठाने के लिए आज 15 लाख रुपये से अधिक कीमत वाले निजी ईवी पर एकमुश्त रोड टैक्स बढ़ा दिया। उद्योग के लोगों का मानना ​​है कि सरकार के इस कदम से राज्य में तेजी से बढ़ रही ईवी की बिक्री और पैठ पर असर पड़ सकता है।

सरकार ने 15 लाख रुपये से अधिक कीमत वाले इलेक्ट्रिक वाहनों पर एकमुश्त रोड टैक्स बढ़ाकर वाहन की कीमत का 8 फीसदी कर दिया है। अब तक उस पर 5 फीसदी रोड टैक्स लगता था।

इसी प्रकार 20 लाख रुपये और इससे अधिक कीमत वाले ईवी पर 10 फीसदी कर लगाया जाएगा। सरकार ने बैटरी किराए पर देने की सुविधा वाली इलेक्ट्रिक कारों पर भी 10 फीसदी कर लगाया है, भले ही उसकी कीमत कुछ भी हो। देश में इले​क्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने के मामले में केरल दूसरे पायदान पर है और उससे आगे केवल महाराष्ट्र है। केरल के वित्त मंत्री केएन बालगोपाल ने आज विधान सभा में पेश बजट में यह घोषणा की। सरकार ने भूमि कर में भी 50 फीसदी की वृद्धि की है। इससे राज्य को 100 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होने का अनुमान है। 

राज्य के बजट में पुराने वाहनों के उपयोग पर अंकुश के लिए मोटरसाइकल, तिपहिया और 15 साल से अधिक पुराने अन्य निजी वाहनों के लिए करों में भी 50 फीसदी इजाफे का प्रस्ताव किया गया है।

जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर इंडिया के एक सूत्र ने कहा कि विंडसर के लिए उसका मॉडल ‘बैटरी एज अ सर्विस’ बैटरी किराए पर देने की परिभाषा के दायरे में नहीं आता है। कर में की गई इस वृद्धि के जरिये राज्य सरकार को 30 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिलने की उम्मीद है।

एक उद्योग संगठन के नेता ने अपनी पहचान जाहिर न करने की शर्त पर कहा, ‘ऐसे समय में यह एक सकारात्मक कदम नहीं है जब पूरा देश ईवी की पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रहा है और केरल के लोग उसमें सबसे आगे हैं।’

बजट में कर के मोर्चे पर किए गए उपायों से राज्य सरकार को 366 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होने का अनुमान है। यह राज्य सरकार का अंतिम पूर्ण बजट है। इसमें 1.79 लाख करोड़ रुपये के राजस्व व्यय और 1.52 लाख करोड़ रुपये की राजस्व प्राप्ति का अनुमान लगाया गया है। इस प्रकार इससे राज्य को 27,125 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा होगा।

इले​क्ट्रिक वाहनों पर कर लगाने की इस पहल के बारे में उद्योग जगत का कहना है कि यह पीछे की ओर ले जाने वाला कदम है। बीएनपी परिबा की एक रिपोर्ट से पता चलता है कि केरल में 

इले​क्ट्रिक कार की पैठ 6.4 फीसदी की दर से बढ़ रही है और वह इस मामले में सबसे आगे है। दिल्ली और पश्चिम बंगाल में यह आंकड़ा 6 फीसदी है।

इलेक्ट्रिक यात्री वाहन की कुल पैठ के मामले में भी केरल वित्त वर्ष 2024 में 5.2 फीसदी दर के साथ सबसे आगे था। दोपहिया वाहन के मामले में भी केरल में ईवी पैठ 13.5 फीसदी की दर से बढ़ रही है। यह आंकड़ा कर्नाटक में 11.5 फीसदी और महाराष्ट्र में 10.1 फीसदी दर्ज किया गया था।

उद्योग के एक अन्य सूत्र ने कहा, ‘केरल ईवी तंत्र विकसित करने के मामले में आगे बढ़ रहा है। ऐसे में मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि सरकार की इस पहल के पीछे क्या तर्क है।’

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First Published - February 7, 2025 | 11:05 PM IST

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