सरकार ने ब्रिटेन से कार और वाहन आयात होने पर रियायती शुल्क फायदों पर अधिसूचना शुक्रवार को जारी की। दरअसल, भारत-ब्रिटेन समग्र आर्थिक एवं व्यापार समझौता बुधवार से लागू होगा।
इस समझौते में 15 साल की अवधि में शुल्क दर कोटे (टीआरक्यू) में चरणबद्ध ढंग से बदलाव किए जाएंगे। साथ ही भारत के घरेलू इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) विनिर्माण पारिस्थितिकीतंत्र को भी सुरक्षित रखा जाएगा। समझौते के अनुसार भारत वाहनों पर आयात शुल्क को लगभग 110 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर देगा और यह कोटा दोनों पक्षों पर लागू होगा।
उद्योग के सूत्रों का कहना है कि इस समझौते से भारत के प्रीमियम वाहन बाजार में तुरंत कोई रुकावट आने की उम्मीद नहीं है जबकि देश का तेजी से बढ़ता घरेलू इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण पारिस्थितिकीतंत्र सुरक्षित रहेगा।
यह भी माना जा रहा है कि लक्जरी खंड में धीरे–धीरे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। जैसे–जैसे शुरुआती पांच वर्षों में शुल्क घटकर 10 प्रतिशत के स्तर पर आएगा। इससे ब्रिटेन से आयात की जाने वाली गाड़ियां मर्सिडीज–बेंज, बीएमडब्ल्यू और ऑडी जैसी कंपनियों के स्थानीय स्तर पर असेंबल किए गए लक्जरी मॉडलों के मुकाबले ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो सकती हैं। इससे जगुआर लैंड रोवर जैसी कंपनियों को फायदा होने की उम्मीद है।
ऑटोमोटिव इंटेलिजेंस फर्म जेएटीओ डायनामिक्स के प्रेसिडेंट रवि भाटिया के अनुसार इस समझौते का सबसे अहम परिणाम भारत के निर्यात के लिए बना मौका है। भारत में बनी इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और हाइड्रोजन से चलने वाली गाड़ियां (जिनकी कीमत 20,000 से 80,000 ब्रिटिश पाउंड के बीच है) ब्रिटेन के मार्केट में छठे साल से बिना शुल्क के बेची जा सकेंगी। निर्यात कोटा धीरे–धीरे बढ़कर 15वें साल तक 88,000 गाड़ियों तक पहुंच जाएगा। इससे वैश्विक स्तर पर अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर रहे भारतीय विनिर्माताओं के लिए दीर्घावधि में अहम मौका बनेगा।
भाटिया ने कहा, ‘पहले साल में 20,000 गाड़ियों का शुरुआती कोटा भारत के सालाना यात्री वाहन मार्केट का 0.5 प्रतिशत से भी कम है। हालांकि इसका तुरंत वाणिज्यिक असर सीमित है, लेकिन यह समझौता एक व्यापक मुक्त व्यापार समझौते के तहत मार्केट तक नपे–तुले तरीके से पहुंच बनाने की अहम मिसाल कायम करता है। इसमें व्यापार उदारीकरण और घरेलू उद्योग के बचाव के बीच संतुलन बनाया गया है।’
समझौते के तहत शुल्क में कटौती एक बार में नहीं बल्कि चरणों में की जाएगी। बड़े इंजन वाली गाड़ियों के लिए ड्यूटी पहले साल में 110 प्रतिशत से घटकर 30 प्रतिशत हो जाएगी और पांचवें साल तक 10 प्रतिशत पर आ जाएगी। मिड–रेंज गाड़ियों के लिए ड्यूटी 66 प्रतिशत से घटकर 50 प्रतिशत हो जाएगी और इसी अवधि में घटकर 10 प्रतिशत पर आ जाएगी।
उन्होंने कहा, ‘आयात कोटा शुरू में 20,000 गाड़ियों से बढ़कर पांचवें साल तक 37,000 हो जाएगा और 15 सालों में कुल 3,78,000 गाड़ियों तक पहुंच मिलेगी। अहम बात यह है कि खास वरीयता दरें (प्रेफरेंशियल टैरिफ) सिर्फ उन्हीं गाड़ियों पर लागू होंगी जो ‘रूल्स ऑफ ओरिजिन‘ (उत्पत्ति के नियम) को पूरा करती हैं और ब्रिटेन में बनी हैं। इसमें दूसरे देशों में बने मॉडल शामिल नहीं होंगे।’
वाणिज्य मंत्रालय के विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने ब्रिटेन से आयात किए जाने वाले वाहनों के शुल्क दर कोटा की निगरानी करने की प्रक्रिया की सार्वजनिक सूचना जारी की है। इस अधिसूचना में सालाना कोटा की संख्या, लागू होने वाली इन–कोटा कस्टम ड्यूटी दरें और कोटा प्रमाणपत्र पाने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी गई है।