बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) प्रवासी भारतीयों (एनआरआई) के लिए ‘अपने ग्राहक को जानें’ (केवाईसी) से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान बनाने पर विचार कर रहा है। इसके तहत प्रवासी भारतीयों को बैंक शाखाओं में व्यक्तिगत तौर पर जाने की जरूरत को खत्म किया जा सकता है। घटनाक्रम से अवगत लोगों ने इसकी जानकारी दी।
दिसंबर 2025 में बाजार नियामक ने प्रवासी भारतीय ग्राहकों के दोबारा-केवाईसी के लिए जियो-लोकेशन टैगिंग और वीडियो के जरिये डिजिटल माध्यम से जांच-परख की औपचारिकता पूरी करने की मंजूरी दी थी। इससे ऐसे लोगों को भारत में सशरीर मौजूद होने की जरूरत खत्म हो गई।
सूत्रों के मुताबिक प्रवासी भारतीय ग्राहकों के लिए पहली बार केवाईसी के लिए भी इसी तरह के उपायों पर विचार किया जा रहा है।
इस मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने कहा, ‘बाजार नियामक दोबारा-केवाईसी के लिए अपनाए गए उपायों को सामान्य केवाईसी के लिए भी लागू करने का प्रयास कर रहा है। हालांकि इसके लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के सहयोग की जरूरत पड़ सकती है। यह यूआईडीएआई की तरह ऑथेंटिकेशन नहीं होगा मगर पासपोर्ट के जरिये सत्यापन का कोई तरीका निकाला जा सकता है। प्रवासी भारतीय जहां भी हों, वहां से निवेश कर सकें, ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए।’
सूत्रों ने बताया कि चर्चा में शामिल उपायों में प्रवासी भारतीयों के पते से केवाईसी की अनुमति देना भी शामिल है, जिसमें अक्षांश-देशांतर आधारित लोकेशन और पते के प्रमाण का इस्तेमाल किया जाएगा।
इसके अलावा सेबी रजिस्ट्रार और ट्रांसफर एजेंटों (आरटीए) के साथ भी बातचीत कर रहा है ताकि दस्तावेजों की जरूरतों को लेकर कोई उलझन न रहे और एक मानक तरीका अपनाया जाए।
उक्त अधिकारी ने कहा, ‘व्याख्या से जुड़ी दिक्कतों से लेकर ढांचागत अड़चनों तक, नियामक ने चिंता वाली बातों को समझने के लिए मध्यस्थों और निवेशकों से संपर्क किया है। वह गैर-जरूरी बाधाओं को हटाने और समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए काम कर रहा है।’
फी ओनली इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स एलएलपी के संस्थापक हर्ष रूंगटा ने कहा, ‘बैंकिंग क्षेत्र की विनियमित संस्थाओं के लिए केवाईसी से जुड़ी मुख्य चुनौती यह है कि मौजूदा सीकेवाईसी ढांचे में केवाईसी जानकारी को मुख्य रूप से दर्ज किया जाता है, न कि उसे स्वतंत्र रूप से सत्यापित किया जाता है। उम्मीद है कि सीकेवाईसी 2.0 इन कमियों को दूर करेगा। इस मामले में प्रतिभूति बाजार अच्छा उदाहरण पेश करता है। सेबी के दायरे में आने वाले आरटीए, केवाईसी रिकॉर्ड को सत्यापित करते हैं जिससे बाजार के अन्य मध्यस्थ पहले से कहीं और कराए गए केवाईसी पर भरोसा करते हैं।’
दिसंबर 2025 में सरकार ने डिजिलॉकर प्लेटफॉर्म पर पासपोर्ट सत्यापन रिकॉर्ड (पीवीआर) की सुविधा शुरू करने की घोषणा की थी जिससे डिजिटल दस्तावेजों और प्रमाणपत्र को संग्रहीत, साझा और सत्यापित करना संभव हो पाया।
रूंगटा ने कहा, ‘प्रवासी भारतीय और भारतीय मूल के विदेशी नागरिक (ओसीआई) के लिए समस्या केवल जियो-टैगिंग की नहीं बल्कि सत्यापन की है। भारतीय पासपोर्ट और ओसीआई कार्ड की जानकारी डिजिलॉकर के जरिये उपलब्ध कराने से बड़ी व्यावहारिक बाधा दूर हो जाएगी।’
आरबीआई ने हाल ही में प्रवासी भारतीयों और भारत मूल के विदेशी नागरिकों (ओसीआई) के लिए निवेश के नियमों में ढील दी है ताकि वे सेबी के पास पंजीकृत हुए बिना सूचीबद्ध कंपनियों में ज्यादा हिस्सेदारी रख सकें। इस कदम से शेयर बाजार के लिए निवेशकों का दायरा बढ़ने, बाजार में लिक्विडिटी बेहतर होने और विदेशी पूंजी के प्रवाह को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, खास कर ऐसे समय में जब विदेशी संस्थागत निवेशक शुद्ध बिकवाल बने हुए हैं।
एक अन्य अधिकारी ने बताया, ‘नियामक प्रवासी भारतीयों के लिए निवेश की सीमा बढ़ाने का प्रयास कर रहा है लेकिन केवाईसी चुनौती बनी हुई है। एयरस्पेस आदि पर लगी कड़ी पाबंदियों के समय में केवाईसी सत्यापन के लिए प्रवासी भारतीयों का खुद आकर मौजूद रहना आसान नहीं है।’
प्राइम डेटाबेस के अनुसार मार्च 2026 तक नैशनल स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध कंपनियों में प्रवासी भारतीयों की हिस्सेदारी 0.62 फीसदी थी जिसका मूल्य 2.5 लाख करोड़ रुपये था जबकि एक साल पहले इसकी हिस्सेदारी 0.63 फीसदी या 2.57 लाख करोड़ रुपये थी।
इसके अलावा वित्तीय नियामक केंद्रीकृत केवाईसी 2.0 के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। इससे निवेशक अलग-अलग सेगमेंट में वित्तीय सेवाओं का इस्तेमाल करने के लिए एक ही केवाईसी का इस्तेमाल कर सकेंगे।
सूत्रों ने बताया कि सीकेवाईसी 2.0 को जुलाई से शुरू किए जाने की उम्मीद है और वित्त मंत्रालय और नियामक इस पर तेजी से काम कर रहे हैं।
एक सूत्र ने कहा, ‘सीकेवाईसी की जरूरतों को सरल रखा जाना चाहिए क्योंकि शिक्षा के स्तर जैसी अतिरिक्त जानकारी अलग से ली जा सकती है। केवल वही जानकारी मांगी जानी चाहिए जिसे सत्यापन करना आसान हो और जिसकी धनशोधन निषेध कानून के लिए जरूरत हो, जैसे कि पते का प्रमाण और पहचान का साक्ष्य।’
वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने शुक्रवार को कहा, ‘अभी, भारत आने वाले एनआरआई या विदेशी निवेशकों के लिए ‘ड्यू डिलिजेंस’ (जरूरी जांच-पड़ताल) के मामले में कई चुनौतियां हैं और उन्हें हमारे वित्तीय तंत्र में शामिल होने में लगभग एक महीना लग जाता है। असल में, भारत में बैंक अकाउंट खोलने के लिए एनआरआई को खुद मौजूद रहना पड़ता है।’
अधिकारी ने कहा, ‘भारत के बाहर से इंटरनेट प्रोटोकॉल या आईपी एड्रेस के जरिए वीडियो केवाईसी पर रोक लगी हुई है। आज के दौर में, जब एआई और आईटी सेक्टर में इतनी तरक्की हो चुकी है, मुझे नहीं लगता कि यह कोई सही बात है। इसलिए हमें यह देखना होगा कि जोखिमों को कैसे कम किया जाए और इसे कैसे शुरू किया जाए।’