facebookmetapixel
Advertisement
Editorial: महिलाओं की नकद हस्तांतरण योजनाओं ने बदली तस्वीर, लेकिन बढ़ा राज्यों पर वित्तीय दबावअगले दो साल में IPO के लिए तैयार होंगी 210 नई कंपनियां, रेडसीर की रिपोर्ट में हुआ खुलासाSBI Funds Management आईपीओ से पहले बेचेगी हिस्सेदारी, प्री-आईपीओ प्लेसमेंट से जुटाए ₹1,655 करोड़शेयर बाजार में हफ्ते भर मची रही हलचल, रिलायंस और बैंकिंग शेयरों की दम पर आखिरी दिन हुई चौतरफा रिकवरीरूफटॉप सोलर स्कीम को मिलेगी बड़ी रफ्तार, विश्व बैंक भारत के लिए जुटाएगा $4.2 अरब का प्राइवेट फंडMSME सेक्टर को बड़ी राहत, अब सभी सरकारी कंपनियों के लिए ट्रेड्स प्लेटफॉर्म से बिल भुगतान जरूरीओयो-जॉस्टल के बीच बढ़ा कानूनी विवाद, दिल्ली HC ने बैकपैकर हॉस्टल श्रृंखला की नई अर्जी को किया खारिजएमेजॉन प्राइम डे का 10वां सीजन रहा अब तक का सबसे सुपरहिट, छोटे शहरों में दिखा सबसे ज्यादा क्रेजट्रेडमार्क उल्लंघन मामले में गूगल इंडिया को दिल्ली हाई कोर्ट से झटका, अंतरिम राहत देने से अदालत का इनकारभारत के सबसे अमीर और सबसे गरीब राज्य का खुलासा, 10 गुना कमाई का अंतर

फ्लॉप से सुपरहिट बनी इम्तियाज अली की फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’, कैसे दर्शकों ने पलट दी बॉक्स ऑफिस की बाजी

Advertisement

पहले दिन असफल होने के बाद, इम्तियाज अली की फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' ने दर्शकों से सीधे जुड़ाव और सकारात्मक प्रतिक्रिया के दम पर 89 करोड़ रुपये की शानदार कमाई कर ली है

Last Updated- July 10, 2026 | 10:19 PM IST
Main Wapas Aaunga
इम्तियाज अली की फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ का पोस्टर

इम्तियाज अली की फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ को फिल्म व्यापार जगत ने रिलीज के पहले ही दिन लगभग असफल घोषित कर दिया था। 12 जून को रिलीज के दिन इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर केवल लगभग 1 करोड़ रुपये की कमाई की। लेकिन तीन सप्ताह बाद, 6 जुलाई तक इसकी कमाई 89 करोड़ रुपये से अधिक हो गई। यदि इसमें से कर और वितरकों का हिस्सा निकाल दिया जाए साथ ही नेटफ्लिक्स, टेलीविजन और संगीत अधिकारों के पहले से हुए सौदों की आमदनी जोड़ दी जाए तब लगभग 70 करोड़ रुपये के बजट पर यह फिल्म अच्छा-खासा मुनाफा कमाने वाली साबित होती है।

अब फिल्म कारोबार जगत ने इसे ‘हिट’ घोषित कर दिया है। ‘मैं वापस आऊंगा’ की सफलता फिल्म मार्केटिंग के लिए एक महत्त्वपूर्ण और लंबे समय से प्रतीक्षित सबक है। एक ट्रेलर बनाइए, एक टीजर जारी कीजिए, उसे इंटरनेट पर डालिए, मुंबई में बड़े-बड़े होर्डिंग लगाइए और कलाकारों के कुछ साक्षात्कार करवा दीजिए। वर्षों से लगभग हर स्टूडियो और प्रोडक्शन हाउस इसी तयशुदा तरीके का आंख बंद करके पालन करता आया है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि फिल्म किस विषय पर है, किस दर्शक वर्ग के लिए बनाई गई है, उसकी शैली क्या है या उसमें कौन-कौन से कलाकार हैं।

‘मैं वापस आऊंगा’ के साथ भी यही किया गया था। लेकिन जब पहले दिन की कमाई के आंकड़े सामने आए तब रिलायंस एंटरटेनमेंट के समूह मुख्य कार्याधिकारी और इम्तियाज अली की प्रोडक्शन कंपनी ‘विंडो सीट फिल्म्स’ के साझेदार शिवाशिष सरकार ने कहा, ‘हमें समझ आ गया था कि कहीं न कहीं बड़ी गलती हो गई है।’

‘मैं वापस आऊंगा’ हमारे भीतर बसे उस ‘घर’ की भावना को पकड़ने की कोशिश करती है, जो हमारी यादों में कैद है और किसी व्यक्ति, किसी स्थान, किसी समय या इन सभी से जुड़ी हुई है।

सरगोधा (पंजाब) में 17 वर्ष के कीनू और जिया का प्रेम अभी शुरू ही हो रहा होता है कि देश का विभाजन हो जाता है। पंजाब और बंगाल दो हिस्सों में बंट जाते हैं। सिख होने के कारण कीनू को अपना घर छोड़कर नए बने भारत में शरण लेनी पड़ती है। 95 वर्ष की आयु में, जब डिमेंशिया उसकी लगभग सारी यादें मिटा देता है तब भी वह जिया से किया हुआ अपना एक वादा नहीं भूलता। 95 वर्षीय कीनू ग्रेवाल की भूमिका में नसीरुद्दीन शाह और 17 वर्षीय कीनू के रूप में वेदांग रैना ने शानदार अभिनय किया है।

यह फिल्म लंबे समय तक आपके दिल और दिमाग में बनी रहती है, विशेषकर यदि मेरी तरह आपका बचपन भी विभाजन से प्रभावित परिवार में बीता हो। विभाजन के पीड़ितों और अन्य लोगों के लिए विशेषतौर पर लगभग 10 फिल्म प्रदर्शन का आयोजन किया गया। इस दौरान दर्शक हंसे, खुलकर रोए और फिल्म को बेहद पसंद किया। फिर भी इस फिल्म की मार्केटिंग अपने सबसे बुनियादी उद्देश्य में असफल रही यानी वह लोगों तक यह बात ही नहीं पहुंचा सकी कि फिल्म वास्तव में किस बारे में है।

सामान्य परिस्थितियों में फिल्म की पूरी टीम निराश होकर बैठ जाती। एक फिल्म, चाहे वह अच्छी हो या बुरी, उसे बनाना बहुत कठिन काम है। इसमें सैकड़ों लोगों की मेहनत लगती है और विचार से लेकर रिलीज तक कम से कम दो वर्ष का समय लगता है। जब दर्शक किसी फिल्म को नकार देते हैं तब उसका असर निर्माताओं पर इतना गहरा होता है कि वे अवसाद तक में चले जाते हैं। इसके साथ ही यह खतरा भी बना रहता है कि यदि पहले सप्ताह के बाद दर्शकों की संख्या नहीं बढ़ी तब सिनेमाघर फिल्म के शो कम या बंद कर देंगे।

रिलीज वाले शुक्रवार की शाम, पूरी टीम ने मिलकर विचार-विमर्श किया। इम्तियाज अली ने तय किया कि वे सीधे दर्शकों से मिलेंगे। उन्हें विश्वास था कि फिल्म अच्छी है और जिसने भी इसे देखा है उसे यह पसंद आई है। अब सबसे बड़ा सवाल यही था कि इस सकारात्मक प्रतिक्रिया को अधिक से अधिक लोगों तक कैसे पहुंचाया जाए। अगले दिन, यानी शनिवार से, इम्तियाज अली, शिवाशिष सरकार और पूरी कलाकार टीम की नई यात्रा शुरू हुई। 26 दिनों में वे इंदौर, दिल्ली, मुंबई, पुणे सहित कई शहरों में 50 से अधिक सिनेमाघरों में आयोजित विशेष फिल्म प्रदर्शनों में पहुंचे। कुछ जगहों पर स्वयं इम्तियाज अली दर्शकों से मिले, जबकि अन्य स्थानों पर वेदांग रैना या फिल्म के अन्य कलाकार मौजूद रहे।

फिल्म के प्रदर्शन के बाद इम्तियाज अली जब दर्शकों से मिलते हैं तब कई बार लोग भावुक होकर अपनी निजी यादें और जीवन की कहानियां उनसे साझा करते हैं। सिनेमाघरों में मौजूद अन्य लोग इन मुलाकातों के वीडियो रिकॉर्ड कर लेते हैं। बाद में इन्हें विभिन्न सोशल मीडिया मंचों पर साझा किया जाता है। देखते ही देखते ये वीडियो इतने व्यापक रूप से वायरल हो गए हैं कि बिना किसी डिजिटल एजेंसी की रणनीति और बिना स्टूडियो के पैसे खर्च किए इस तरह की लोकप्रियता मिलना विरल है।

शिवाशिष सरकार बताते हैं कि कंपनी ने जानबूझकर इस प्रक्रिया में कोई दखल नहीं दिया। इम्तियाज अली कहते हैं, ‘मेरे जीवन में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। इस बार फिल्म के प्रचार और मार्केटिंग की कमान खुद दर्शकों ने संभाल ली। उन्होंने ही दूसरे लोगों को सिनेमाघरों तक पहुंचने के लिए प्रेरित किया। हर दिन थिएटर में दर्शकों की संख्या और फिल्म की कमाई दोनों बढ़ती गईं।’

तयशुदा और एक जैसी मार्केटिंग रणनीतियों पर निर्भर रहने वाले फिल्म स्टूडियो के शीर्ष अधिकारियों और संचार विशेषज्ञों के लिए इस अनुभव में तीन महत्त्वपूर्ण सबक हैं। पहली सीख यह है कि केवल डिजिटल दुनिया तक ही सीमित न रहें। मार्केटिंग का पहला नियम है, अपने उपभोक्ता को समझना। मीडिया केवल सही दर्शकों तक पहुंचने का माध्यम है, वह स्वयं मार्केटिंग रणनीति नहीं है। आज लगभग 56.6 करोड़ भारतीय, इंटरनेट का उपयोग करते हैं लेकिन देश का एक बड़ा वर्ग अब भी टेलीविजन देखता है, अखबार-पत्रिकाएं पढ़ता है या फिर सीधे संवाद की प्रतीक्षा करता है। इम्तियाज अली ने दर्शकों से आमने-सामने मिलकर यही साबित किया।

दूसरी सीख है कि फिल्म का संदेश बिल्कुल स्पष्ट होना चाहिए। किसी फिल्म का पोस्टर, ट्रेलर और पूरा प्रचार अभियान भी स्पष्ट रूप से यह बताए कि फिल्म किस बारे में है तब यह अच्छी बात होगी। यह बात उन फिल्मों के लिए और भी अधिक महत्त्वपूर्ण हो जाती है, जिनमें कोई बड़ा सितारा न हो या जो किसी लोकप्रिय फ्रेंचाइजी का हिस्सा न हों। लेकिन इसके साथ एक मूल शर्त भी जुड़ी है कि फिल्म अच्छी होनी चाहिए। यदि फिल्म अच्छी नहीं है तब सबसे बेहतरीन मार्केटिंग भी उसे सफल नहीं बना सकती।

अली स्वीकार करते हैं, ‘हमें लगा था कि हमें फिल्म का प्रचार करना आता है लेकिन ऐसा नहीं था। हमें दर्शकों ने बचाया। हमें एक दूसरा अवसर मिला है और अब हम उम्मीद करते हैं कि मार्केटिंग के बारे में सही तरीके से सीखेंगे। फिल्मों के लिए मार्केटिंग केवल व्यावसायिक गतिविधि नहीं बल्कि भावनात्मक जुड़ाव का भी माध्यम है।’

यही तीसरी सीख है कि अपनी फिल्म पर भरोसा रखिए, अपनी सहज समझ पर भरोसा कीजिए और कुछ नया करने का साहस दिखाइए। अच्छी मार्केटिंग के साथ पेश की गई एक अच्छी फिल्म सामान्य तौर पर सफल होती है। हाल के समय में ‘सितारे जमीन पर’ इसका एक बेहतरीन उदाहरण है। इस बीच, इम्तियाज अली लगातार विभिन्न सिनेमाघरों में जाकर दर्शकों से मिल रहे हैं। फिल्म व्यापार से जुड़े लोगों का अनुमान है कि ‘मैं वापस आऊंगा’ अगले चार से छह सप्ताह तक बॉक्स ऑफिस पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखेगी।

Advertisement
First Published - July 10, 2026 | 10:19 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement