facebookmetapixel
मध्य प्रदेश में ग्रामीण विकास को लगेंगे पंख: नाबार्ड ने FY27 के लिए ₹3.75 लाख करोड़ के ऋण का दिया लक्ष्यNSE IPO को सेबी की हरी झंडी, मिला NoC; अप्रैल-मई में DRHP दाखिल होने की उम्मीददिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: दोबारा शादी के बाद भी नहीं रुकेगी सरकारी कर्मचारी के विधवा की पेंशन10 साल में SIP निवेश 7 गुना उछला, घरेलू बचत का रुख बैंक जमा से म्युचुअल फंड की ओरट्रंप का बड़ा दांव: केविन वॉर्श बनेंगे नए फेड चेयरमैन, जेरोम पॉवेल की जगह संभालेंगे अमेरिकी अर्थव्यवस्थासुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: मासिक धर्म स्वच्छता अब अनुच्छेद 21 के तहत जीवन का मौलिक अधिकारGold–Silver Price Crash: क्या 1980 जैसा होगा चांदी का हाल? 1 दिन में भाव ₹88,000 लुढ़के; निवेशक आगे खरीदें या बेचेंBajaj Auto Q3 Results: मुनाफा 10% उछलकर ₹2,749 करोड़ के पार, कमाई में भी जबरदस्त इजाफाUPI से गलत अकाउंट में भेज दिए पैसे? घबराएं नहीं, इन तरीकों से वापस मिल सकती है रकम!Budget 2026: राजकोषीय घाटे से आगे बढ़कर कर्ज पर नजर, डेट-टू-जीडीपी रेश्यो बनेगा नया पैमाना

EV चार्जिंग इन्फ्रा पर स​ब्सिडी देगी सरकार, इले​क्ट्रिक वाहनों की बढ़ेगी पैठ और रफ्तार

इसमें इलेक्ट्रिक पब्लिक फास्ट चार्जिंग स्टेशन के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे पर 80 फीसदी सब्सिडी दी जाएगी और कुछ मामलों में यह 100 फीसदी तक होगी।

Last Updated- January 05, 2025 | 10:35 PM IST
electric vehicles

इलेक्ट्रिक वाहनों की पैठ बढ़ाने के इरादे से सरकार देश भर में उनकी फास्ट चार्जिंग के लिए सब्सिडी देने जा रही है। इसमें इलेक्ट्रिक पब्लिक फास्ट चार्जिंग स्टेशन के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे पर 80 फीसदी सब्सिडी दी जाएगी और कुछ मामलों में यह 100 फीसदी तक होगी। यह स​ब्सिडी 2,000 करोड़ रुपये की पीएम इले​क्ट्रिक ड्राइव रिवॉल्यूशन इन इनोवेटिव व्हीकल एन्हांसमेंट (पीएम ईड्राइव) योजना के तहत प्रदान की जाएगी, जिसे इलेक्ट्रिक वाहनों की फेम योजना की जगह शुरू किया गया है।

भारी उद्योग मंत्रालय ने दिशानिर्देश का मसौदा जारी किया है, जिसके मुताबिक इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहनों के लिए 48,400 फास्ट चार्जर को सब्सिडी दी जाएगी। इसके लिए 581 करोड़ रुपये तय किए गए हैं। इसी तरह ई-कारों के लिए 21,000 फास्ट चार्जिंग स्टेशनों (1,061 करोड़ रुपये आवंटित) और ई-बस तथा ई-ट्रक के लिए 1,800 फास्ट चार्जिंग स्टेशनों (346 करोड़ रुपये निर्धारित) को सब्सिडी दी जाएगी। इस तरह कुल 72,300 फास्ट चार्जिंग स्टेशनों के लिए सब्सिडी मिलेगी।

इस योजना के तहत भारी उद्योग मंत्रालय ठेका मिलने के बाद 30 फीसदी सब्सिडी राशि दे देगा। 40 फीसदी रकम इलेक्ट्रिक फास्ट चार्जिंग स्टेशन स्थापित होने के बाद दी जाएगी और बाकी रकम तब मिलेगी, जब चार्जिंग स्टेशन वाहनों को चार्ज करने का काम सफलता के साथ करने लगेगा।

मसौदे में न्यूनतम चार्जिंग क्षमता भी तय की गई है। इलेक्ट्रिक दोपहिया एवं तिपहिया वाहनों के लिए कम से कम 12 किलोवॉट चार्जिंग क्षमता होनी चाहिए, जिस पर कम से कम 1.5 लाख रुपये की लागत आए। ई-कारों के लिए कम से कम 6 लाख रुपये की लागत के साथ न्यूनतम 60 किलोवॉट और ई-बसों के लिए न्यूनतम 24 लाख रुपये लागत के साथ कम से कम 240 किलोवॉट चार्जिंग क्षमता होनी चाहिए।

मंत्रालय ने ई-वाहनों की ज्यादा हिस्सेदारी वाले 40 शहर भी पहचान लिए हैं, जिन्हें चार्जिंग ढांचे के मामले में प्राथमिकता दी जाएगी। इनमें कुल ई-कारों में 14.6 फीसदी हिस्सेदारी वाला दिल्ली सबसे ऊपर है। उसके बाद बेंगलूरु (12.2 फीसदी), मुंबई (9.5 फीसदी), हैदराबाद (7.4 फीसदी) और 5.2 फीसदी हिस्सेदारी वाला पुणे है। इनके अलावा लुधियाना, जोधपुर एवं उदयपुर जैसे शहर भी इस सूची में शामिल हैं।

इलेक्ट्रिक बसों की आवाजाही के लिए 40 राजमार्ग गलियारे और इलेक्ट्रिक ट्रकों के लिए 20 राजमार्ग गलियारे भी चिह्नित किए गए हैं, जिन्हें चार्जिंग ढांचा स्थापित करते समय तरजीह दी जाएगी। इनमें ई-बसों के लिए हैदराबाद से विजयवाड़ा तक 270 किलोमीटर, पुणे से कोल्हापुर तक 230 किलोमीटर, दिल्ली से चंडीगढ़ तक 240 किलोमीटर, दिल्ली एवं आगरा के बीच 240 किलोमीटर और दिल्ली से लखनऊ तक 554 किलोमीटर दूरी वाले गलियारे शामिल हैं। ई-ट्रकों के लिए दिल्ली-चंडीगढ़, जयपुर-दिल्ली, गोरखपुर-लखनऊ, विजयवाड़ा-विशाखापत्तनम राजमार्ग पहचाने गए हैं।

इस योजना के तहत विभिन्न शहरों और राजमार्गों पर ईवी चार्जिंग स्टेशन की मांग का हिसाब लगाने के लिए राज्यों और केंद्र के विभिन्न मंत्रालयों (जैसे सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, पर्यटन मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, रेल मंत्रालय और नागर विमानन मंत्रालय आदि) को न्योता दिया जाएगा।

मंत्रालय अपने नियंत्रण में आने वाले संगठनों के जरिये इस काम को अंजाम देंगे। राज्य चार्जिंग स्टेशनों की कुल मांग का पता करने के लिए नोडल एजेंसी बनाएंगी और ये प्रस्ताव अंतिम मंजूरी के लिए भारी उद्योग मंत्रालय के पास भेजे जाएंगे।

मंजूरी मिलने के बाद राज्य जमीन पहचानने और पाने में मदद करेंगे और चार्जिंग स्टेशन लगाने के लिए पारदर्शी बोली प्रक्रिया के जरिये चार्जिंग पॉइंट ऑपरेटर चुने जाएंगे। वे चार्जिंग स्टेशन चलाने के लिए तकनीकी कौशल भी लाएंगे, जिसके लिए मंत्रालय की मंजूरी जरूरी होगी। इस योजना के तहत पात्रता के लिए चार्जरों को चरणबद्ध विनिर्माण कार्यक्रम के तहत ही बनाना होगा।

भारी उद्योग मंत्रालय ने इस कार्यक्रम पर अमल करने के लिए व्यापक योजना भी तैयार की है। इसके मुताबिक योजना को मंजूरी मिलने के 16 हफ्तों के भीतर निविदा जारी कर दी जाएंगी, 26 हफ्तों में बोली की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी, 28 हफ्तों में प्रोत्साहन की पहली किस्त जारी कर दी जाएगी और 52 हफ्तों के भीतर अंतिम किस्त भी जारी कर दी जाएगी बशर्ते चार्जिंग ढांचा व्यावसायिक रूप से काम करने लगे।

First Published - January 5, 2025 | 10:35 PM IST

संबंधित पोस्ट